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जेल में खुलेगी लाइब्रेरी, बंदियों को मिलेंगी पुस्तकें
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रायबरेली। सलाखों के पीछे पहुंचने वाले बंदियों को अब न सिर्फ धार्मिक, बल्कि मनोरंजन से जुड़ी पुस्तकों को पढ़ने का मौका मिलेगा। इसके लिए जिला कारागार में लाइब्रेरी खोली जाएगी।
जेल अफसरों के प्रयास से जल्द ही बंदियों को पढ़ने के लिए पुस्तकें मिलना शुरू हो जाएंगी। इसके पीछे अफसरों का मकसद है कि जेल से छूटने के बाद बंदी बाहर जाएं तो उनके जीवन में सुधार आ सके। अपराधी प्रवृत्ति से दूर होकर ऐसे काम करें, ताकि उनके जीवन में भी खुशियां आए।
मौजूदा समय में जिला कारागार में 1500 बंदी हैं। बंदी भी पुस्तकों को पढ़ सके, इसके लिए जेल अफसरों ने लाइब्रेरी खोलने का खाका तैयार किया है। इसके लिए जेल अधिकारी बिरला इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नालाजी गौतमबुद्धनगर की मदद लेंगे।
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यहीं से जेल के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। जो पुस्तकें बंदियों को पढ़ने के लिए दी जाएंगी, उसमें धार्मिक पुस्तकों के अलावा मनोरंजन से संबंधित पुस्तकें रहेंगी।
जेलर सत्य प्रकाश ने बताया कि जेल में लाइब्रेरी खोलने का प्रस्ताव काफी समय से चल रहा था। अब जाकर लाइब्रेरी खोलने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
इसके लिए बिरला इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नालाजी गौतमबुद्धनगर की मदद ली जाएगी। मकसद है कि बंदी किताबों को पढ़कर ज्ञान अर्जित कर सके और जेल से बाहर जाने पर एक नेक इंसान बने। अपराध के दलदल से दूर रहें। अगले माह तक लाइब्रेरी खुल जाएगी।
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जेल अफसरों के प्रयास से जल्द ही बंदियों को पढ़ने के लिए पुस्तकें मिलना शुरू हो जाएंगी। इसके पीछे अफसरों का मकसद है कि जेल से छूटने के बाद बंदी बाहर जाएं तो उनके जीवन में सुधार आ सके। अपराधी प्रवृत्ति से दूर होकर ऐसे काम करें, ताकि उनके जीवन में भी खुशियां आए।
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मौजूदा समय में जिला कारागार में 1500 बंदी हैं। बंदी भी पुस्तकों को पढ़ सके, इसके लिए जेल अफसरों ने लाइब्रेरी खोलने का खाका तैयार किया है। इसके लिए जेल अधिकारी बिरला इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नालाजी गौतमबुद्धनगर की मदद लेंगे।
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यहीं से जेल के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। जो पुस्तकें बंदियों को पढ़ने के लिए दी जाएंगी, उसमें धार्मिक पुस्तकों के अलावा मनोरंजन से संबंधित पुस्तकें रहेंगी।
जेलर सत्य प्रकाश ने बताया कि जेल में लाइब्रेरी खोलने का प्रस्ताव काफी समय से चल रहा था। अब जाकर लाइब्रेरी खोलने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
इसके लिए बिरला इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नालाजी गौतमबुद्धनगर की मदद ली जाएगी। मकसद है कि बंदी किताबों को पढ़कर ज्ञान अर्जित कर सके और जेल से बाहर जाने पर एक नेक इंसान बने। अपराध के दलदल से दूर रहें। अगले माह तक लाइब्रेरी खुल जाएगी।