{"_id":"6102d8458ebc3e789f6a3286","slug":"jail-raibaraily-news-lko589048091","type":"story","status":"publish","title_hn":"सचिव ने जेल से बंदी को जिला अस्पताल भेजवाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सचिव ने जेल से बंदी को जिला अस्पताल भेजवाया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव अभिनव जैन ने गुरुवार को जिला जेल का निरीक्षण किया। जेल अधीक्षक अविनाश गौतम तथा कारापाल सत्य प्रकाश से जेल के अंदर कैदियों की स्थिति व रखरखाव आदि के बारे में जानकारी ली। जेल अधीक्षक को दिए कि जो भी बंदी जिला कारागार में आ रहे है उनकी जांच कराकर उन्हें मास्क व सैनिटाइजर दिया जाए।
प्रभारी सचिव ने जेल की सभी बैरकों, भोजनालय, अस्पताल एवं महिला बैरक को रोजाना सैनिटाइज कराने के आदेश दिए। निरीक्षण के दौरान 1367 बंदी जेल में बंद पाए।
प्रभारी सचिव ने जेल अधीक्षक को महिला बंदी के साथ रह रहे बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल कराने तथा उन्हें समय से दवा आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अस्पताल के निरीक्षण के दौरान पाया कि अस्पताल में 20 बंदियों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था है। वर्तमान में 10 बंदी अस्पताल में भर्ती है। एक बंदी को जिला अस्पताल भेजवाने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
उन्होंने बंदियों से मुलाकात करके उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या हो तो वह जेल में स्थापित लीगल ऐड क्लीनिक के माध्यम से विधिक मदद ले सकते है। निरीक्षण के दौरान जिन बंदियों ने यह बताया कि उनके मुकदमे की पैरवी के लिए अधिवक्ता नहीं है। उन्हें यह सुझाव दिया गया कि वह जेल अधीक्षक के माध्यम से अपने प्रार्थनापत्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेज दें।
विज्ञापन
प्रभारी सचिव ने जेल की सभी बैरकों, भोजनालय, अस्पताल एवं महिला बैरक को रोजाना सैनिटाइज कराने के आदेश दिए। निरीक्षण के दौरान 1367 बंदी जेल में बंद पाए।
विज्ञापन
प्रभारी सचिव ने जेल अधीक्षक को महिला बंदी के साथ रह रहे बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल कराने तथा उन्हें समय से दवा आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अस्पताल के निरीक्षण के दौरान पाया कि अस्पताल में 20 बंदियों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था है। वर्तमान में 10 बंदी अस्पताल में भर्ती है। एक बंदी को जिला अस्पताल भेजवाने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
उन्होंने बंदियों से मुलाकात करके उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या हो तो वह जेल में स्थापित लीगल ऐड क्लीनिक के माध्यम से विधिक मदद ले सकते है। निरीक्षण के दौरान जिन बंदियों ने यह बताया कि उनके मुकदमे की पैरवी के लिए अधिवक्ता नहीं है। उन्हें यह सुझाव दिया गया कि वह जेल अधीक्षक के माध्यम से अपने प्रार्थनापत्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेज दें।