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Raebareli News: प्रसव में वसूली और फर्जी हाजिरी के आरोपों की जांच शुरू

Tue, 26 May 2026 01:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली Updated Tue, 26 May 2026 01:06 AM IST
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Investigation begins into allegations of extortion and fake attendance during delivery
रायबरेली। मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर सलोन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के अधीक्षक के खिलाफ शुरू हुई वसूली और भ्रष्टाचार की जांच पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जांच टीम आरोपों की गहराई से जांच करने के बजाय अस्पताल के स्टाफ से ही अधीक्षक के पक्ष में शपथपत्र इकट्ठा करने में जुट गई है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
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मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में सीएचसी के ही पीड़ित कर्मचारियों और डॉक्टरों ने अधीक्षक पर आरोप लगाया कि अधीक्षक सिजेरियन प्रसव के नाम पर सात से आठ हजार रुपये वसूलने का दबाव बनाते हैं। सामान्य प्रसव कक्ष में आने वाली सभी प्रसूताओं से भी पैसे ऐंठने को कहा जाता है।
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शिकायत के अनुसार, कई डॉक्टर अधीक्षक को हर महीने बंधी-बंधाई रकम देकर अस्पताल से गायब रहते हैं। अधीक्षक उनकी फर्जी उपस्थिति दर्ज कर उन्हें हर महीने पूरा वेतन दिला रहे हैं। इसके अलावा, पूरे क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टरों से अवैध वसूली करने और अस्पताल के कर्मचारियों की छुट्टी मंजूर करने के बदले भी रुपये मांगे जाते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसचिव ने इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य महानिदेशक को जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए थे।
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शासन के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ. अरविंद कुमार की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई। जांच टीम ने सलोन सीएचसी पहुंचकर तफ्तीश भी शुरू की, लेकिन पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कमेटी आरोपों से जुड़े सबूत जुटाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।


इसके उलट, अस्पताल के कर्मचारियों से दस-दस रुपये के स्टांप पेपर पर अधीक्षक के समर्थन में जबरन गवाही लिखवाई जा रही है ताकि मामले को पूरी तरह रफा-दफा किया जा सके। दूसरी ओर, जांच अधिकारी एसीएमओ डॉ. अरविंद कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मामले की जांच निष्पक्षता से की जा रही है। जल्द ही जांच रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ को सौंप दी जाएगी।
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