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डिप्टी सीएम अस्पताल का दौरा कर रहे, जेडी आए, एसी दफ्तर में बैठकर अफसरों से मिले और लखनऊ चले गए
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सीएमओ चैंबर में समीक्षा करते जेडी मलेरिया डॉ. बीपी सिंह।
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। पहले मंत्रियों की टीम और फिर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने जमीनी हकीकत परखी। इन मंत्रियों ने देखा कि धरातल पर कहां विकास हो रहा है, कहां क्या खामियां हैं और जरूरतमंदों को कहां कितना लाभ मिल रहा है। डिप्टी सीएम ने सीधे मरीजों और तीमारदारों से बात करके स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जाना।
वहीं संयुक्त निदेशक (जेडी) डॉ. बीपी सिंह मंगलवार को सीएमओ दफ्तर पहुंचे और एसी में बैठकर समीक्षा करने के बाद राजधानी लखनऊ लौट गए। मंत्रियों की तरह यदि अफसर भी धरातल पर जाकर लोगों से मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के बारे में जानने का प्रयास करें तो तस्वीर के साथ लोगों की तकदीर भी बदल सकती है।
संयुक्त निदेशक (मलेरिया) डॉ. बीपी सिंह मंगलवार सुबह 10 बजे मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। करीब चार घंटे तक एसी कमरे में बैठकर अफसरों के साथ बैठक की।
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जिले में 12 मई से घर-घर जाकर दवा खिलाने के लिए शुरू होने वाले फाइलेरिया अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। अधूरी तैयारी मिलने पर उन्होंने फाइलेरिया इंस्पेक्टर और बायोलॉजिस्ट को कड़ी फटकार लगाई।
दोनों लोगों को तत्काल तैयारी पूरी कर अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के आदेश दिए। संक्रामक रोगों के बढ़ने का खतरा है, लेकिन अधिकारी ने जमीनी हकीकत जानने के लिए धूप में निकलने की जहमत नहीं उठाई।
सीएमओ चैंबर में समीक्षा के दौरान संयुक्त निदेशक ने कहा कि अभियान को प्रभावी ढंग से सफल बनाया जाएगा। हर घर में टीमें फाइलेरिया की दवा खिलाने के लिए पहुंचनी चाहिए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसी शिकायतें नहीं आनी चाहिए कि टीमें गांव स्तर पर घरों पर पहुंचकर लोगों तक दवा नहीं पहुंचाई हैं।
समीक्षा के दौरान पाया कि शहर में तैयारी अधूरी है। इस पर फाइलेरिया इंस्पेक्टर अरुण यादव और बायोर्लॉजिस्ट रामकृष्ण मिश्रा को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल तैयारी पूरी करने के आदेश दिए। इस मौके पर एसीएमओ डॉ. दिलीप सिंह, प्रभारी मलेरिया अधिकारी डीएस अस्थाना व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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वहीं संयुक्त निदेशक (जेडी) डॉ. बीपी सिंह मंगलवार को सीएमओ दफ्तर पहुंचे और एसी में बैठकर समीक्षा करने के बाद राजधानी लखनऊ लौट गए। मंत्रियों की तरह यदि अफसर भी धरातल पर जाकर लोगों से मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के बारे में जानने का प्रयास करें तो तस्वीर के साथ लोगों की तकदीर भी बदल सकती है।
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संयुक्त निदेशक (मलेरिया) डॉ. बीपी सिंह मंगलवार सुबह 10 बजे मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। करीब चार घंटे तक एसी कमरे में बैठकर अफसरों के साथ बैठक की।
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जिले में 12 मई से घर-घर जाकर दवा खिलाने के लिए शुरू होने वाले फाइलेरिया अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। अधूरी तैयारी मिलने पर उन्होंने फाइलेरिया इंस्पेक्टर और बायोलॉजिस्ट को कड़ी फटकार लगाई।
दोनों लोगों को तत्काल तैयारी पूरी कर अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के आदेश दिए। संक्रामक रोगों के बढ़ने का खतरा है, लेकिन अधिकारी ने जमीनी हकीकत जानने के लिए धूप में निकलने की जहमत नहीं उठाई।
सीएमओ चैंबर में समीक्षा के दौरान संयुक्त निदेशक ने कहा कि अभियान को प्रभावी ढंग से सफल बनाया जाएगा। हर घर में टीमें फाइलेरिया की दवा खिलाने के लिए पहुंचनी चाहिए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसी शिकायतें नहीं आनी चाहिए कि टीमें गांव स्तर पर घरों पर पहुंचकर लोगों तक दवा नहीं पहुंचाई हैं।
समीक्षा के दौरान पाया कि शहर में तैयारी अधूरी है। इस पर फाइलेरिया इंस्पेक्टर अरुण यादव और बायोर्लॉजिस्ट रामकृष्ण मिश्रा को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल तैयारी पूरी करने के आदेश दिए। इस मौके पर एसीएमओ डॉ. दिलीप सिंह, प्रभारी मलेरिया अधिकारी डीएस अस्थाना व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।