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आधी सर्दी बीती, अब ठंड की मार
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2016 11:34 PM IST
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कोहरा छाने और सर्द हवा चलने से रविवार को कड़ाके की ठंड से लोग ठिठुर गए।
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सर्दी के सितम ने लोगों को घर के अंदर कैद होने पर मजबूर कर दिया।
हालात ये रहे कि गलन होने के कारण लोगों में कंपकंपी छूट रही थी। जरूरी कार्य होने पर ही लोग घरों से निकले। मौसम विभाग के अनुसार कड़ाके की ठंड से अधिकतम और न्यूनतम तापमान लुढ़क गया।
रविवार को अधिकतम तापमान 13.6 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 6.6 डिग्री सेल्सियस रहा। ऐसे में लोगों की परेशानी बढ़ गई। सर्दी से बचने के लिए लोगों ने अलाव का सहारा लिया।
वहीं प्रशासन की ओर से अलाव की कोई व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वैसे तो शनिवार से ही मौसम का मिजाज बदला था, लेकिन रविवार को सर्दी और बढ़ गई।
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सुबह कोहरा छाया था। सर्द हवा चल रही थी। आसमान में बदली थी। इससे गलन रही और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लोग कड़ाके की ठंड से कांप उठे।
रविवार की छुट्टी का दिन होने और सर्दी के चलते लोग घरों में ही दुबके रहे। बाजारों में भी सर्दी के कारण चहल-पहल गायब रही। शाम को कुछ देर के लिए सूरज दिखा, लेकिन फिर बादलों में जाकर छिप गया।
दिनभर लोगों को सर्दी से राहत नहीं मिली। वहीं सर्दी बढ़ी, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अलाव जलवाने के नाम पर कंजूसी बरती गई।
सुपर मार्केट, जिला अस्पताल चौराहा, डिग्री कॉलेज, सिविल लाइंस आदि स्थानों पर अलाव जलते नहीं दिखे। ऐसे में आने जाने वाले राहगीरों को सर्दी से राहत नहीं मिली।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी फुरसतगंज अमेठी (इग्रुआ) के मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम बदला है। इसके कारण पहाड़ों की बर्फ पिघल रही है।
ठंडी हवा चल रही हैं। यही वजह है कि कड़ाके की ठंड हो गई है। गलन से लोग ठिठुर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि आगे भी मौसम इसी तरह रहने का अनुमान है। ऐसे में लोगों को कड़ाके की ठंड से और परेशान होना पड़ेगा।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीरबल का कहना है कि कड़ाके की ठंड से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। घर से निकलते समय कान ढक लें।
साथ ही गर्म कपड़े पहनें। सबसे अच्छा है कि जरूरत पड़ने पर ही घरों से लोग बाहर निकले तो ज्यादा अच्छा रहेगा। इस मौसम में निमोनिया, सर्दी, जुकाम, बुखार के अलावा हार्टअटैक, ब्रेनहैमरेज का खतरा भी बढ़ जाता है।
आयुर्वेदाचार्य पंडित गुरु प्रसाद त्रिपाठी का कहना है कि सर्दी में खानपान पर लोगों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ठंडी चीजों को खाने से लोग बचें।
खासकर बादी और तली चीजों का सेवन न करें तो ज्यादा ठीक रहेगा। अरहर, मूंग, मसूर की दाल खाएं। गेहूं और जौै, चना की रोटी खाएं। साथ ही दिन में ही चावल खाएं।
सर्दी में रात में चावल खाने से बचा जाए तो अच्छा रहेगा। गर्म भोजन करें। ऐसा करने से लोगों के बीमार होने का खतरा कम रहता है।
हालात ये रहे कि गलन होने के कारण लोगों में कंपकंपी छूट रही थी। जरूरी कार्य होने पर ही लोग घरों से निकले। मौसम विभाग के अनुसार कड़ाके की ठंड से अधिकतम और न्यूनतम तापमान लुढ़क गया।
रविवार को अधिकतम तापमान 13.6 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 6.6 डिग्री सेल्सियस रहा। ऐसे में लोगों की परेशानी बढ़ गई। सर्दी से बचने के लिए लोगों ने अलाव का सहारा लिया।
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वहीं प्रशासन की ओर से अलाव की कोई व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वैसे तो शनिवार से ही मौसम का मिजाज बदला था, लेकिन रविवार को सर्दी और बढ़ गई।
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सुबह कोहरा छाया था। सर्द हवा चल रही थी। आसमान में बदली थी। इससे गलन रही और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लोग कड़ाके की ठंड से कांप उठे।
रविवार की छुट्टी का दिन होने और सर्दी के चलते लोग घरों में ही दुबके रहे। बाजारों में भी सर्दी के कारण चहल-पहल गायब रही। शाम को कुछ देर के लिए सूरज दिखा, लेकिन फिर बादलों में जाकर छिप गया।
दिनभर लोगों को सर्दी से राहत नहीं मिली। वहीं सर्दी बढ़ी, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अलाव जलवाने के नाम पर कंजूसी बरती गई।
सुपर मार्केट, जिला अस्पताल चौराहा, डिग्री कॉलेज, सिविल लाइंस आदि स्थानों पर अलाव जलते नहीं दिखे। ऐसे में आने जाने वाले राहगीरों को सर्दी से राहत नहीं मिली।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी फुरसतगंज अमेठी (इग्रुआ) के मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम बदला है। इसके कारण पहाड़ों की बर्फ पिघल रही है।
ठंडी हवा चल रही हैं। यही वजह है कि कड़ाके की ठंड हो गई है। गलन से लोग ठिठुर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि आगे भी मौसम इसी तरह रहने का अनुमान है। ऐसे में लोगों को कड़ाके की ठंड से और परेशान होना पड़ेगा।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीरबल का कहना है कि कड़ाके की ठंड से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। घर से निकलते समय कान ढक लें।
साथ ही गर्म कपड़े पहनें। सबसे अच्छा है कि जरूरत पड़ने पर ही घरों से लोग बाहर निकले तो ज्यादा अच्छा रहेगा। इस मौसम में निमोनिया, सर्दी, जुकाम, बुखार के अलावा हार्टअटैक, ब्रेनहैमरेज का खतरा भी बढ़ जाता है।
आयुर्वेदाचार्य पंडित गुरु प्रसाद त्रिपाठी का कहना है कि सर्दी में खानपान पर लोगों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ठंडी चीजों को खाने से लोग बचें।
खासकर बादी और तली चीजों का सेवन न करें तो ज्यादा ठीक रहेगा। अरहर, मूंग, मसूर की दाल खाएं। गेहूं और जौै, चना की रोटी खाएं। साथ ही दिन में ही चावल खाएं।
सर्दी में रात में चावल खाने से बचा जाए तो अच्छा रहेगा। गर्म भोजन करें। ऐसा करने से लोगों के बीमार होने का खतरा कम रहता है।