{"_id":"caa2794c82ca1f10e5840c8d40229185","slug":"giants-shock-lost-loved-ones-in-the-gap-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिग्गजों को झटका, अपनों ने खाई शिकस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिग्गजों को झटका, अपनों ने खाई शिकस्त
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Nov 2015 12:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, कांग्रेस एमएलएसी और सरेनी सपा विधायक के परिवारीजन चुनाव हार गए। परिणाम आने के बाद कहीं खुशी और कहीं गम का माहौल दिखा।
जीते प्रत्याशियों ने खुशी का इजहार किया तो उनके समर्थकों ने मिठाई बांटकर पटाखे दगाए। बीडीसी को जहां ब्लॉकों में जीत के प्रमाणपत्र दिए गए।
वहीं डीडीसी प्रत्याशियों को जिला मुख्यालय पर एडीएम प्रशासन एससी चौधरी ने कलेक्ट्रेट में प्रमाणपत्र दिए गए। वैसे तो रविवार को ही डीडीसी और बीडीसी पदों की मतगणना शुरू हुई थी।
लेकिन सोमवार को दोपहर तक मतगणना चली। इससे पहले दिन सारे नतीजे नहीं आ सके। बीडीसी के सभी परिणाम भोर में आए। जबकि डीडीसी पदों का रिजल्ट दोपहर बाद आने शुरू हुए।
विज्ञापन
डीडीसी के रिजल्ट से दिग्गजों की साख पर बट्टा लग गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री मनोज पांडेय के भाई रोहनियां द्वितीय से डीडीसी का चुनाव 490 वोट से हार गए।
यहां से श्रीराम पाल ने बाजी मारी। महराजगंज प्रथम से सपा नेता प्रभात साहू ने कांग्रेस एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की अनुज वधू एवं निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन सिंह को 3,074 वोटों से कड़ी शिकस्त दी।
सरेनी विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह के बेटे दिव्यांबर सिंह डीडीसी का चुनाव हार गए। लालगंज द्वितीय से उन्हें गयासुद्दीन ने 390 वोटों से हराया।
छतोह द्वितीय से एमएलसी के भाई अवधेश सिंह डीडीसी का चुनाव जीत गए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिदंदी सुनील सिंह को 3,754 वोटों से हराया।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख उमेश सिंह सतांव द्वितीय से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गए। इसी तरह अन्य कई प्रत्याशी चुनाव हारे तो कई जीत गए।
जीत मिलते ही बीडीसी और डीडीसी प्रत्याशी और उनके समर्थक खुशी से झूम उठे। समर्थकों ने प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत किया। साथ ही फूलमाला से लाद दिया और मुंह मीठा कराया।
डीएम की सख्ती के कारण विजेताओं ने जुलूस नहीं निकाले। कलेक्ट्रेट में एक-एक करके विजेता डीडीसी प्रत्याशियों को एडीएम प्रशासन एससी चौधरी ने प्रमाणपत्र दिए।
काफी लोग अपने प्रत्याशियों के स्वागत के लिए माला लिए इंतजार करते रहे। अपने समर्थकों के साथ विजेता प्रत्याशी एक-एक करके कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रमाणपत्र लेते और जाते रहे।
विज्ञापन
जीते प्रत्याशियों ने खुशी का इजहार किया तो उनके समर्थकों ने मिठाई बांटकर पटाखे दगाए। बीडीसी को जहां ब्लॉकों में जीत के प्रमाणपत्र दिए गए।
वहीं डीडीसी प्रत्याशियों को जिला मुख्यालय पर एडीएम प्रशासन एससी चौधरी ने कलेक्ट्रेट में प्रमाणपत्र दिए गए। वैसे तो रविवार को ही डीडीसी और बीडीसी पदों की मतगणना शुरू हुई थी।
विज्ञापन
लेकिन सोमवार को दोपहर तक मतगणना चली। इससे पहले दिन सारे नतीजे नहीं आ सके। बीडीसी के सभी परिणाम भोर में आए। जबकि डीडीसी पदों का रिजल्ट दोपहर बाद आने शुरू हुए।
विज्ञापन
डीडीसी के रिजल्ट से दिग्गजों की साख पर बट्टा लग गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री मनोज पांडेय के भाई रोहनियां द्वितीय से डीडीसी का चुनाव 490 वोट से हार गए।
यहां से श्रीराम पाल ने बाजी मारी। महराजगंज प्रथम से सपा नेता प्रभात साहू ने कांग्रेस एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की अनुज वधू एवं निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन सिंह को 3,074 वोटों से कड़ी शिकस्त दी।
सरेनी विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह के बेटे दिव्यांबर सिंह डीडीसी का चुनाव हार गए। लालगंज द्वितीय से उन्हें गयासुद्दीन ने 390 वोटों से हराया।
छतोह द्वितीय से एमएलसी के भाई अवधेश सिंह डीडीसी का चुनाव जीत गए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिदंदी सुनील सिंह को 3,754 वोटों से हराया।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख उमेश सिंह सतांव द्वितीय से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गए। इसी तरह अन्य कई प्रत्याशी चुनाव हारे तो कई जीत गए।
जीत मिलते ही बीडीसी और डीडीसी प्रत्याशी और उनके समर्थक खुशी से झूम उठे। समर्थकों ने प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत किया। साथ ही फूलमाला से लाद दिया और मुंह मीठा कराया।
डीएम की सख्ती के कारण विजेताओं ने जुलूस नहीं निकाले। कलेक्ट्रेट में एक-एक करके विजेता डीडीसी प्रत्याशियों को एडीएम प्रशासन एससी चौधरी ने प्रमाणपत्र दिए।
काफी लोग अपने प्रत्याशियों के स्वागत के लिए माला लिए इंतजार करते रहे। अपने समर्थकों के साथ विजेता प्रत्याशी एक-एक करके कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रमाणपत्र लेते और जाते रहे।