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हर माह खर्च हो रहे 1.35 करोड़, साफ सुथरा नहीं हुआ अपना शहर
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रायबरेली। प्रतिमाह एक करोड़ 35 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी अपना शहर साफ सुथरा नहीं हो सका है। मोहल्लों और गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं।
गंदगी से लोगों का सांस लेना दुश्वार है। यह हाल तब है, जब स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 का काम चल रहा है। जल्द स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी आनी है। बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था खानापूर्ति तक सीमित है।
शहर क्षेत्र के 34 मोहल्लों में करीब ढाई लाख की आबादी रहती है। साफ-सफाई कराने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है।
नगर पालिका के अफसरों की ढिलाई का नतीजा है कि शहर को साफ सुथरा बनाने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। शहर क्षेत्र के बड़ा घोसियाना, सत्य नगर, इंदिरा नगर, निराला नगर, नया पुरवा, कल्लू का पुरवा समेत अन्य मोहल्लों में कूड़े के ढेर लगे हैं। एक करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च करने के बाद भी सफाई व्यवस्था बेहतर न होना, अफसरों के कार्य पर सवाल खड़े कर रही है।
34 वार्डों में नहीं शुरू हो पाई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना
शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए संचालित कराई गई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना मजाक बनकर रह गई है। हाल ये है कि यह योजना अभी तक शहर क्षेत्र के सभी 34 वार्डों में शुरू नहीं हो पाई हैं। जिन 20 वार्डों में योजना संचालित की जा रही है, वहां पर भी कूड़े के ढेर लगे हैं। योजना के तहत घर-घर कूड़ा उठाने का कार्य कराया जाता है। इसके एवज में शुल्क भी वसूला जाता है।
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कानपुर की जिस कंपनी को योजना संचालित करने का जिम्मा दिया है, उसके अफसर लापरवाही बरत रहे हैं। इससे पहले लखनऊ की एक फर्म इस योजना को संचालित कर रही थी। काम ठीक न होने पर कानपुर की फर्म को योजना की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन अब यह फर्म भी ठीक तरीके से काम नहीं कर पा रही है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को उठाना पड़ रहा है।
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गंदगी से लोगों का सांस लेना दुश्वार है। यह हाल तब है, जब स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 का काम चल रहा है। जल्द स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी आनी है। बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था खानापूर्ति तक सीमित है।
शहर क्षेत्र के 34 मोहल्लों में करीब ढाई लाख की आबादी रहती है। साफ-सफाई कराने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है।
नगर पालिका के अफसरों की ढिलाई का नतीजा है कि शहर को साफ सुथरा बनाने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। शहर क्षेत्र के बड़ा घोसियाना, सत्य नगर, इंदिरा नगर, निराला नगर, नया पुरवा, कल्लू का पुरवा समेत अन्य मोहल्लों में कूड़े के ढेर लगे हैं। एक करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च करने के बाद भी सफाई व्यवस्था बेहतर न होना, अफसरों के कार्य पर सवाल खड़े कर रही है।
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34 वार्डों में नहीं शुरू हो पाई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना
शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए संचालित कराई गई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना मजाक बनकर रह गई है। हाल ये है कि यह योजना अभी तक शहर क्षेत्र के सभी 34 वार्डों में शुरू नहीं हो पाई हैं। जिन 20 वार्डों में योजना संचालित की जा रही है, वहां पर भी कूड़े के ढेर लगे हैं। योजना के तहत घर-घर कूड़ा उठाने का कार्य कराया जाता है। इसके एवज में शुल्क भी वसूला जाता है।
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कानपुर की जिस कंपनी को योजना संचालित करने का जिम्मा दिया है, उसके अफसर लापरवाही बरत रहे हैं। इससे पहले लखनऊ की एक फर्म इस योजना को संचालित कर रही थी। काम ठीक न होने पर कानपुर की फर्म को योजना की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन अब यह फर्म भी ठीक तरीके से काम नहीं कर पा रही है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को उठाना पड़ रहा है।