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कबाड़ हो चुके वाहनों की नंबर प्लेट लगाकर बेचते थे कारें

Fri, 05 Aug 2022 12:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Aug 2022 12:00 AM IST
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रायबरेली। पुलिस के हत्थे चढ़े वाहन चोर गैंग के बदमाश बड़े ही शातिर किस्म के हैं। पुलिस की जांच में पता चला कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन या फिर कबाड़ हो चुके वाहनों की नीलामी में बदमाश भाग लेकर इन चौपहिया वाहनों को खरीद लेते थे। इसके बाद इन वाहनों को कबाड़ी के पास जाकर बेच देते थे, लेकिन उन वाहनों के दस्तावेज अपने पास ही रखते थे।
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इसके बाद जो वाहन चोरी करते थे, उसमें दुर्घटनाग्रस्त वाहन या फिर कबाड़ हुए वाहनों की नंबर प्लेट, चेचिस नंबर डाल देते थे। इसके बाद लग्जरी वाहनों को सस्ते कीमत पर लोगों को बेचते थे। चेसिस और नंबर प्लेट बदलने से पुलिस भी आसानी से इन वाहनों को नहीं पकड़ पाती थी।
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एसपी आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि गैंग के सरगना अंकित श्रीवास्तव व श्याम किशोर वाजपेयी को लखनऊ पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
जेल भेजे गए अंकित की लखनऊ में मुलायम तिराहे के पास टॉप व्हील्स गैराज था, जहां पर चोरी के वाहनों को लाकर चेसिस और नंबर प्लेट बदली जाती थी।
चेसिस और नंबर प्लेट बदलने से किसी को शक नहीं हो पाता था कि यह वाहन चोरी के हैं। गैंग के पास लैपटॉप समेत अन्य उपकरण होते थे, जिससे यह वाहनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर लेते थे। पुलिस अधीक्षक बताते हैं कि जिस वाहनों को चोरी करना होता था, उनकी पहले रेकी कर लेते थे।
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गैंग से जुड़े हर बदमाश के पास था अलग-अलग काम
पकड़े गए गैंग के हर बदमाश का काम बंटा था। इसीलिए हर कोई अपना काम बखूबी करता था। आरोपी नुरूल अंसार ने बताया कि लैपटॉप व प्रिंटर के सहयोग से वह फर्जी दस्तावेज तैयार करता था।
राजीव सिंह ने बताया कि फर्जी कागजात से तैयार चोरी के वाहन के लिए ग्राहक लाना उसका काम था। फर्जी नंबर प्लेट और चेसिस नंबर, फर्जी दस्तावेज तैयार करके वाहनों को बेचना संतोष के जिम्मे था।

सहारा सिटी होम्स के पास कार खरीदने व बेचने की दुकान चलाने वाला प्रिंस मिश्रा वाहनों को दिखाता था। इसी दुकान पर चोरी किए गए वाहनों के चेसिस नंबर, असली नंबर प्लेट रखी जाती थीं। आरोपी अब्बास चोरी किए गए वाहनों को रखने का इंतजाम करता था।
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