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प्रसूता को लाने-छोड़ने के एवज में फर्जी वसूली, जांच शुरू
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रायबरेली। गर्भवती को घर से अस्पताल लाने और प्रसव के बाद वापस घर पहुंचाने के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इसके चलते ही 102 एंबुलेस सेवा के संचालन से जुड़ी कंपनी ने मात्र तीन माह में 10 हजार से अधिक प्रसूता का केस दर्शाकर भुगतान की मांग की है। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर से 102 एंबुलेंस सेवा से जुड़ी कंपनी के मांग पत्र की जांच का आदेश दिया गया है। इसके लिए अपर निदेशक स्वास्थ्य के निर्देश पर सीएमओ ने 19 सीएचसी अधीक्षकों की एक टीम गठित कर पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पांच दिन में तलब की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही एजेंसी के भुगतान पत्र पर फैसला होगा। इसे लेकर विभाग में हड़कंप व्याप्त है।
गर्भवतियों को 102 एंबुलेंस सेवा के तहत घरों से अस्पताल लाकर इलाज की सुविधा दिलाने के साथ ही प्रसव बाद घर नि:शुल्क पहुंचाने की व्यवस्था है। शिकायत मिली थी कि एंबुलेंस सेवा के संचालन से जुड़ी कंपनी ने एक ही चक्कर में कई प्रसूताओं को घर पहुंचाकर बाद में अलग-अलग केस दिखाकर इनका भुगतान प्राप्त किया जा रहा है। 102 और 108 एंबुलेंस का संचालन जीवीके कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए प्रति केस के हिसाब से कंपनी को शासन स्तर से स्वीकृत राशि का भुगतान होता है। बीते कुछ माह में जिले में प्रसूता को पहले अस्पताल व फिर घर पहुंचाने के भुगतान से जुड़े करीब 10 हजार केस सामने आने के बाद भुगतान में फर्जीवाड़े की आशंका जतायी गयी। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने भुगतान से जुड़े इन सभी केसों का सत्यापन कर जांच कराने का निर्देश दिया है।
इस मामले में अपर निदेशक डॉ. जीएस बाजपेयी ने बीते गुरुवार को एक बैठक करके सीएमओ को तत्काल इस पूरे मामले की जांच का आदेश देकर रिपोर्ट तलब की है ताकि कंपनी द्वारा की गयी मांग के अनुरूप भुगतान के संबंध में निर्णय लिया जा सके। निर्देश बाद सीएमओ ने इस मामले की जांच के लिए सभी 19 सीएचसी अधीक्षकों की एक संयुक्त टीम गठित करते हुए पांच दिनों में अपने-अपने क्षेत्र के केसों की जांच कर सत्यापन रिपोर्ट देने को कहा है। जांच के आदेश से जीवीके कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़क प है।
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पहले भी पकड़ में आ चुके फर्जी केस
जिले में 102 और 108 एंबुलेंस से मरीजों को अस्पताल लाने और घर पहुंचाने के संबंध में पहले भी फर्जीवाड़ा पकड़ में आ चुका है। कई साल बाद सरकार ने फिर से जांच के बाद भुगतान के आदेश दिए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में अगर सीएचसी अधीक्षकों ने सही से जांच की तो भुगतान की आड़ में बड़ा खेल पकड़ में आ सकता है। जानकार बताते हैं कि कंपनी स्तर से कई प्रसूताओं को एंबुलेंस सुविधा का लाभ दिए बिना ही भुगतान पाने का दावा पेश किया गया है।
शासन को भेजी जाएगी जांच रिपोर्ट
जिले में करीब तीन माह में 102 एंबुलेंस से प्रसूताओं को अस्पताल लाने और घर पहुंचाने के 10 हजार केस दर्शा कर भुगतान की मांग की गयी है। इन केसों की जांच के आदेश दिए गए हैं। मामले में सीएचसी अधीक्षकों को पत्र जारी करके तीन दिन में जांच पूरी करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। पांच दिनों में जांच रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाएगी। -डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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गर्भवतियों को 102 एंबुलेंस सेवा के तहत घरों से अस्पताल लाकर इलाज की सुविधा दिलाने के साथ ही प्रसव बाद घर नि:शुल्क पहुंचाने की व्यवस्था है। शिकायत मिली थी कि एंबुलेंस सेवा के संचालन से जुड़ी कंपनी ने एक ही चक्कर में कई प्रसूताओं को घर पहुंचाकर बाद में अलग-अलग केस दिखाकर इनका भुगतान प्राप्त किया जा रहा है। 102 और 108 एंबुलेंस का संचालन जीवीके कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए प्रति केस के हिसाब से कंपनी को शासन स्तर से स्वीकृत राशि का भुगतान होता है। बीते कुछ माह में जिले में प्रसूता को पहले अस्पताल व फिर घर पहुंचाने के भुगतान से जुड़े करीब 10 हजार केस सामने आने के बाद भुगतान में फर्जीवाड़े की आशंका जतायी गयी। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने भुगतान से जुड़े इन सभी केसों का सत्यापन कर जांच कराने का निर्देश दिया है।
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इस मामले में अपर निदेशक डॉ. जीएस बाजपेयी ने बीते गुरुवार को एक बैठक करके सीएमओ को तत्काल इस पूरे मामले की जांच का आदेश देकर रिपोर्ट तलब की है ताकि कंपनी द्वारा की गयी मांग के अनुरूप भुगतान के संबंध में निर्णय लिया जा सके। निर्देश बाद सीएमओ ने इस मामले की जांच के लिए सभी 19 सीएचसी अधीक्षकों की एक संयुक्त टीम गठित करते हुए पांच दिनों में अपने-अपने क्षेत्र के केसों की जांच कर सत्यापन रिपोर्ट देने को कहा है। जांच के आदेश से जीवीके कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़क प है।
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पहले भी पकड़ में आ चुके फर्जी केस
जिले में 102 और 108 एंबुलेंस से मरीजों को अस्पताल लाने और घर पहुंचाने के संबंध में पहले भी फर्जीवाड़ा पकड़ में आ चुका है। कई साल बाद सरकार ने फिर से जांच के बाद भुगतान के आदेश दिए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में अगर सीएचसी अधीक्षकों ने सही से जांच की तो भुगतान की आड़ में बड़ा खेल पकड़ में आ सकता है। जानकार बताते हैं कि कंपनी स्तर से कई प्रसूताओं को एंबुलेंस सुविधा का लाभ दिए बिना ही भुगतान पाने का दावा पेश किया गया है।
शासन को भेजी जाएगी जांच रिपोर्ट
जिले में करीब तीन माह में 102 एंबुलेंस से प्रसूताओं को अस्पताल लाने और घर पहुंचाने के 10 हजार केस दर्शा कर भुगतान की मांग की गयी है। इन केसों की जांच के आदेश दिए गए हैं। मामले में सीएचसी अधीक्षकों को पत्र जारी करके तीन दिन में जांच पूरी करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। पांच दिनों में जांच रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाएगी। -डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ