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मूल्यांकन स्थगित, गेट पर परीक्षकों का लगा मजमा
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रायबरेली। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन कार्य तीसरे दिन बुधवार को कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव को देखते हुए अचानक 2 अप्रैल तक स्थगित कर दिया गया। मौखिक तौर पर फरमान भले ही मंगलवार देर शाम जारी हुआ, लेकिन लिखित रूप से आदेश बुधवार को जारी हुआ।
मूल्यांकन को लेकर इस बार इतनी ज्यादा सख्ती रही कि स्पष्ट आदेश न मिल पाने पर परीक्षक रोजाना की तरह मूल्यांकन केंद्र पहुंच गए। इससे अफरातफरी का माहौल रहा और परीक्षकों को घर लौटना पड़ा। जिले में मूल्यांकन के लिए चार केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगभग सवा तीन लाख कॉपियों को जांचने का काम होना है। इसके लिए 177 उप प्रधान परीक्षक एवं 1652 परीक्षक तैनात किए गए हैं।
सोमवार से शुरू हुआ मूल्यांकन कार्य मंगलवार तक यानी दो दिन ही चला। जिसमें 54 हजार से अधिक कॉपियां जांची गईं। तीसरे दिन बुधवार को सुबह लोगों को मूल्यांकन कार्य स्थगित होने की जानकारी तो मिली, लेकिन स्पष्ट आदेश न मिल पाने के कारण मूल्यांकन केंद्र पहुंच गए। मूल्यांकन केंद्र के गेट पर परीक्षकों का मजमा लगा रहा, लेकिन ऊहापोह की स्थिति बनी रही।
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आखिरकार स्पष्ट रूप से मूल्यांकन कार्य 2 अप्रैल तक स्थगित होने का फरमान जारी हुआ तो परीक्षक घरों को लौट गए। मूल्यांकन कार्य स्थगित होने का फरमान मिलने पर चारों केंद्रों में कोठार को सील करा दिया गया। इसके पहले डीएचई एवं परीक्षकों से मूल्यांकन संबंधी प्रपत्र जमा कराए गए। सभी मूल्यांकन केंद्रों में पुलिस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
मूल्यांकन केंद्रों में किसी बाहरी तत्व को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सभी उप नियंत्रकों को कॉपियों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर मुआयना करने और व्यवस्था को परखने की हिदायत दी गई है, ताकि कहीं कोई समस्या उत्पन्न न होने पाए। डीआईओएस डॉ. चंद्रशेखर मालवीय ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बुधवार को मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रकों को उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं।
उन्हें कोठार कक्षों का नियमित निरीक्षण करने को कहा है। कॉपियों को चूहों, दीमक आदि से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव कराने, नमी, सीलन, पानी आदि से बचाव के उपाय करने समेत कई निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा है कि जिन कॉपियों का मूल्यांकन हो गया है, उसका ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड करा दें। निर्देशानुसार सारी व्यवस्थाएं कर दी गई हैं।
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मूल्यांकन को लेकर इस बार इतनी ज्यादा सख्ती रही कि स्पष्ट आदेश न मिल पाने पर परीक्षक रोजाना की तरह मूल्यांकन केंद्र पहुंच गए। इससे अफरातफरी का माहौल रहा और परीक्षकों को घर लौटना पड़ा। जिले में मूल्यांकन के लिए चार केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगभग सवा तीन लाख कॉपियों को जांचने का काम होना है। इसके लिए 177 उप प्रधान परीक्षक एवं 1652 परीक्षक तैनात किए गए हैं।
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सोमवार से शुरू हुआ मूल्यांकन कार्य मंगलवार तक यानी दो दिन ही चला। जिसमें 54 हजार से अधिक कॉपियां जांची गईं। तीसरे दिन बुधवार को सुबह लोगों को मूल्यांकन कार्य स्थगित होने की जानकारी तो मिली, लेकिन स्पष्ट आदेश न मिल पाने के कारण मूल्यांकन केंद्र पहुंच गए। मूल्यांकन केंद्र के गेट पर परीक्षकों का मजमा लगा रहा, लेकिन ऊहापोह की स्थिति बनी रही।
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आखिरकार स्पष्ट रूप से मूल्यांकन कार्य 2 अप्रैल तक स्थगित होने का फरमान जारी हुआ तो परीक्षक घरों को लौट गए। मूल्यांकन कार्य स्थगित होने का फरमान मिलने पर चारों केंद्रों में कोठार को सील करा दिया गया। इसके पहले डीएचई एवं परीक्षकों से मूल्यांकन संबंधी प्रपत्र जमा कराए गए। सभी मूल्यांकन केंद्रों में पुलिस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
मूल्यांकन केंद्रों में किसी बाहरी तत्व को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सभी उप नियंत्रकों को कॉपियों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर मुआयना करने और व्यवस्था को परखने की हिदायत दी गई है, ताकि कहीं कोई समस्या उत्पन्न न होने पाए। डीआईओएस डॉ. चंद्रशेखर मालवीय ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बुधवार को मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रकों को उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं।
उन्हें कोठार कक्षों का नियमित निरीक्षण करने को कहा है। कॉपियों को चूहों, दीमक आदि से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव कराने, नमी, सीलन, पानी आदि से बचाव के उपाय करने समेत कई निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा है कि जिन कॉपियों का मूल्यांकन हो गया है, उसका ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड करा दें। निर्देशानुसार सारी व्यवस्थाएं कर दी गई हैं।