{"_id":"5c6b0d98ed2f9b72855bbb40e46c1f36","slug":"empty-fields-planting-wheat-is-unable-to-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खाली पड़े खेत, नहीं हो पा रही गेहूं की बोआई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खाली पड़े खेत, नहीं हो पा रही गेहूं की बोआई
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Nov 2015 11:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस साल धान, मक्का, ज्वार आदि की 60 फीसदी फसल बर्बादी की भेंट चढ़ गई। अब रबी की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
जिले को सूखाग्रस्त तो घोषित कर दिया गया है, लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर इससे क्या-क्या किसानों को फायदा मिलेगा, ताकि मायूस चेहरों पर खुशी आ सके।
इससे पूर्व बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से नुकसान हुआ था। जिसका मुआवजा आज तक किसानों को नहीं मिला है। अब सूखे से गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर, मक्का, गेहूं, जौ आदि की फसलों की बोआई नहीं हो पा रही है।
ऐसे में खेत खाली पड़े हैं। नहरों में धूल उड़ रही है तो राजकीय नलकूप शोपीस बने हैं। इस साल बारिश न होने का असर खेती पर पड़ा। अधिकतर खेत खाली पड़े हैं।
जिन किसानों के पास निजी संसाधन थे, वही धान की रोपाई और मक्का, ज्वार की फसलों की बोआई कर पाए। मौसम व कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस साल महज 125.6 मिमी वर्षा हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले को सूखाग्रस्त तो घोषित कर दिया गया है, लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर इससे क्या-क्या किसानों को फायदा मिलेगा, ताकि मायूस चेहरों पर खुशी आ सके।
इससे पूर्व बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से नुकसान हुआ था। जिसका मुआवजा आज तक किसानों को नहीं मिला है। अब सूखे से गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर, मक्का, गेहूं, जौ आदि की फसलों की बोआई नहीं हो पा रही है।
ऐसे में खेत खाली पड़े हैं। नहरों में धूल उड़ रही है तो राजकीय नलकूप शोपीस बने हैं। इस साल बारिश न होने का असर खेती पर पड़ा। अधिकतर खेत खाली पड़े हैं।
विज्ञापन
जिन किसानों के पास निजी संसाधन थे, वही धान की रोपाई और मक्का, ज्वार की फसलों की बोआई कर पाए। मौसम व कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस साल महज 125.6 मिमी वर्षा हुई है।
विज्ञापन