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एक दशक बाद सपा ने लहराया परचम
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रायबरेली। विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार कुछ खास रहे। समाजवादी पार्टी ने एक दशक बाद परचम लहराकर वापसी की है।
जिले की छह विधानसभा सीटों में से चार पर जीत दर्ज कर अपनी ताकत का अहसास कराया तो दो सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए दूसरे स्थान पर रही। भाजपा ने सभी सीटों पर भले ही पूरी ताकत लगाई हो, लेकिन सपा ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
पिछले तीन चुनावों पर गौर करें तो मुकाबले काफी दिलचस्प थे और नतीजे भी चौंकाने वाले थे। जिले में छह विधानसभा सीटें हैं। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में जिले की पांच सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था।
सदर सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अखिलेश सिंह ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में चार सीटों पर समाजवादी पार्टी दूसरे स्थान पर थी। कांग्रेस अपने गढ़ में सफल जरूर हुई, लेकिन यह कामयाबी उसके पास टिक नहीं सकी और अगले चुनाव में उसके हाथ से सभी सीटें खिसक गईं।
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पिछले नतीजों से सबक लेते हुए समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2012 के चुनाव में काफी मेहनत की और पांच सीटों पर कब्जा जमा लिया।
सदर सीट पर पहले की तरह अखिलेश सिंह ही जीते, लेकिन इस सीट पर सपा ने दूसरी पोजीशन बनाई थी।
वर्ष 2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी काफी कमजोर नजर आई। यही वजह रही कि उसके पास सिर्फ ऊंचाहार सीट ही बची, बाकी सीटें हार गई।
सदर और हरचंदपुर सीट कांग्रेस ने जीती तो बछरावां, सलोन और सरेनी की सीटेें भाजपा के खाते में चली गईं। बाद में कांग्रेस से जीते विधायकों की नजदीकियां भाजपा से बढ़ती गईं, जिससे कांग्रेस की जमीन खिसकने लगी। 2022 के चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह साफ हो गई तो सपा ने सफलता अर्जित कर वापसी की।
जिले में सरेनी, ऊंचाहार, बछरावां, हरचंदपुर सीट पर सपा प्रत्याशी जीते। सलोन और सदर सीट पर जीतने वाली भाजपा को सपा ने कड़ी टक्कर दी। सपा के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव बताते हैं कि वर्ष 2002 में पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं। उसके पहले के चुनावों में भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया था।
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जिले की छह विधानसभा सीटों में से चार पर जीत दर्ज कर अपनी ताकत का अहसास कराया तो दो सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए दूसरे स्थान पर रही। भाजपा ने सभी सीटों पर भले ही पूरी ताकत लगाई हो, लेकिन सपा ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
पिछले तीन चुनावों पर गौर करें तो मुकाबले काफी दिलचस्प थे और नतीजे भी चौंकाने वाले थे। जिले में छह विधानसभा सीटें हैं। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में जिले की पांच सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था।
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सदर सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अखिलेश सिंह ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में चार सीटों पर समाजवादी पार्टी दूसरे स्थान पर थी। कांग्रेस अपने गढ़ में सफल जरूर हुई, लेकिन यह कामयाबी उसके पास टिक नहीं सकी और अगले चुनाव में उसके हाथ से सभी सीटें खिसक गईं।
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पिछले नतीजों से सबक लेते हुए समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2012 के चुनाव में काफी मेहनत की और पांच सीटों पर कब्जा जमा लिया।
सदर सीट पर पहले की तरह अखिलेश सिंह ही जीते, लेकिन इस सीट पर सपा ने दूसरी पोजीशन बनाई थी।
वर्ष 2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी काफी कमजोर नजर आई। यही वजह रही कि उसके पास सिर्फ ऊंचाहार सीट ही बची, बाकी सीटें हार गई।
सदर और हरचंदपुर सीट कांग्रेस ने जीती तो बछरावां, सलोन और सरेनी की सीटेें भाजपा के खाते में चली गईं। बाद में कांग्रेस से जीते विधायकों की नजदीकियां भाजपा से बढ़ती गईं, जिससे कांग्रेस की जमीन खिसकने लगी। 2022 के चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह साफ हो गई तो सपा ने सफलता अर्जित कर वापसी की।
जिले में सरेनी, ऊंचाहार, बछरावां, हरचंदपुर सीट पर सपा प्रत्याशी जीते। सलोन और सदर सीट पर जीतने वाली भाजपा को सपा ने कड़ी टक्कर दी। सपा के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव बताते हैं कि वर्ष 2002 में पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं। उसके पहले के चुनावों में भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया था।