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दस्तावेज तैयार करने में अफसरों के बीच माथापच्ची
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कमला नेहरू एजुकेशनल सोसाइटी की जमीन।
- फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। कमला नेहरू एजुकेशनल सोसाइटी की जमीन का मामला पेचीदा होता जा रहा है। हाईकोर्ट की ओर से जमीन से जुड़े दस्तावेज तलब किए जाने से अफसरों में हड़कंप मचा है। अधिकारी दस्तावेज तैयार करने में जुटे हैं, ताकि जल्द से जल्द दस्तावेज कोर्ट को उपलब्ध कराया जा सके।
अधिकारियों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज कई सेटों में तैयार किए जा रहे हैं। दस्तावेज तैयार होते ही अदालत को सौंप दिए जाएंगे।
लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिविल लाइंस स्थित कमला नेहरू एजुकेशनल सोसाइटी की जमीन का मामला काफी दिनों से चल रहा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व द्वारा सोसाइटी के अध्यक्ष, सचिव के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट को सोसाइटी ने अवमानना के लंबित मामले से जोड़कर ही हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को आवंटित जमीन के सभी दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में तलब किए हैं। जिला प्रशासन की तरफ से दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए पुरानी फाइलों को खंगाला जा रहा है। जरूरी दस्तावेजों को निकाला जा रहा है।
मामला हाईकोर्ट से जुड़ा होने की वजह से अधिकारी किसी तरह की चूक नहीं चाहते हैं। यही वजह है कि कई सेटों में दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) एवं प्रभारी अधिकारी नजूल प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि हाईकोर्ट ने जमीन से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं।
कई सेटों में दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। जल्द दस्तावेज कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे। गौरतलब है कि एडीएम (वित्त एवं राजस्व) एवं प्रभारी अधिकारी नजूल प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने सदर कोतवाली में पूर्व सांसद शीला कौल के बेटे विक्रम कौल, तत्कालीन नजूल लिपिक छेदीलाल जौहरी, तत्कालीन लेखपाल प्रवीण कुमार मिश्रा, तत्कालीन प्रभारी कानूनगो प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन तहसीलदार सदर कृष्ण पाल सिंह, सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष सचिव व अन्य पदाधिकारी गण, कमला नेहरू एजुकेशनल सोसाइटी के सचिव सुनील देव, तत्कालीन एडीएम (वित्त एवं राजस्व) मदन पाल आर्या, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी विंध्यवासिनी प्रसाद, तत्कालीन राजस्व सहायक द्वितीय नजूल लिपिक रामकृष्ण श्रीवास्तव, प्रभु टाउन निवासी सुनील कुमार एवं तत्कालीन उप निबंधक सदर घनश्याम के खिलाफ सदर कोतवाली में जमीन में जालसाजी करने की एफआईआर दर्ज कराई है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले को अब संज्ञान में लिया है। ऐसे में इस बेशकीमती जमीन को लेकर मामला और गर्म हो गया है।
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अधिकारियों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज कई सेटों में तैयार किए जा रहे हैं। दस्तावेज तैयार होते ही अदालत को सौंप दिए जाएंगे।
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लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिविल लाइंस स्थित कमला नेहरू एजुकेशनल सोसाइटी की जमीन का मामला काफी दिनों से चल रहा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व द्वारा सोसाइटी के अध्यक्ष, सचिव के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट को सोसाइटी ने अवमानना के लंबित मामले से जोड़कर ही हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को आवंटित जमीन के सभी दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में तलब किए हैं। जिला प्रशासन की तरफ से दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए पुरानी फाइलों को खंगाला जा रहा है। जरूरी दस्तावेजों को निकाला जा रहा है।
मामला हाईकोर्ट से जुड़ा होने की वजह से अधिकारी किसी तरह की चूक नहीं चाहते हैं। यही वजह है कि कई सेटों में दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) एवं प्रभारी अधिकारी नजूल प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि हाईकोर्ट ने जमीन से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं।
कई सेटों में दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। जल्द दस्तावेज कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे। गौरतलब है कि एडीएम (वित्त एवं राजस्व) एवं प्रभारी अधिकारी नजूल प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने सदर कोतवाली में पूर्व सांसद शीला कौल के बेटे विक्रम कौल, तत्कालीन नजूल लिपिक छेदीलाल जौहरी, तत्कालीन लेखपाल प्रवीण कुमार मिश्रा, तत्कालीन प्रभारी कानूनगो प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन तहसीलदार सदर कृष्ण पाल सिंह, सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष सचिव व अन्य पदाधिकारी गण, कमला नेहरू एजुकेशनल सोसाइटी के सचिव सुनील देव, तत्कालीन एडीएम (वित्त एवं राजस्व) मदन पाल आर्या, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी विंध्यवासिनी प्रसाद, तत्कालीन राजस्व सहायक द्वितीय नजूल लिपिक रामकृष्ण श्रीवास्तव, प्रभु टाउन निवासी सुनील कुमार एवं तत्कालीन उप निबंधक सदर घनश्याम के खिलाफ सदर कोतवाली में जमीन में जालसाजी करने की एफआईआर दर्ज कराई है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले को अब संज्ञान में लिया है। ऐसे में इस बेशकीमती जमीन को लेकर मामला और गर्म हो गया है।