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Raebareli News: पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
Sun, 27 Sep 2026 01:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sun, 27 Sep 2026 01:26 AM IST
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गोकना गंगा तट पर शनिवार को भाद्र पूर्णिमा पर पूर्वजों को तर्पण करते श्रद्धालु।
रायबरेली। पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू हो गई। डलमऊ, ऊंचाहार और सरेनी क्षेत्र के गंगा तटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान करके अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में सूक्ष्म रूप में पितृ हमारे बीच आते हैं। उनकी पूजा, श्राद्ध, तर्पण आदि करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
डलमऊ के किलाघाट, सड़क घाट, वीआईपी घाट, रानी शिवाला घाट, संकट मोचन घाट, पक्का घाट में पर गंगा मैया के जयकारों के साथ आस्था की डुबकी लगाई। मंदिरों, शिवालयों में पूजा-अर्चना करके सुख समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने जौ, चावल, काले तिल और कुश हाथ में लेकर तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में मंत्रोच्चारण के बीच अपने-अपने पितरों को जल तर्पण किया।
ऊंचाहार के गोकना गंगा घाट पर पिंडदान, तर्पण और श्राद्धकर्म किए जाते हैं। पं. प्रदीप शुक्ला ने बताया कि पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है कि देवताओं की पूजा से पहले पितरों का पूजन आवश्यक है। जब पितर प्रसन्न होते हैं तो देवता भी खुश होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी पितृपक्ष का विशेष महत्व माना गया है। पितृ दोष के चलते व्यक्ति जीवन में सफलता नहीं पाता है।
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सरेनी के गेंगासों, रालपुर घाट पर लोगों ने डुबकी लगाई। इसके बाद गेंगासों, संगठा देवी, मुंडमालेश्वर में जलाभिषेक किया। पुरोहित संतोष कुमार तिवारी पूजा अर्चना कराई।
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डलमऊ के किलाघाट, सड़क घाट, वीआईपी घाट, रानी शिवाला घाट, संकट मोचन घाट, पक्का घाट में पर गंगा मैया के जयकारों के साथ आस्था की डुबकी लगाई। मंदिरों, शिवालयों में पूजा-अर्चना करके सुख समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने जौ, चावल, काले तिल और कुश हाथ में लेकर तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में मंत्रोच्चारण के बीच अपने-अपने पितरों को जल तर्पण किया।
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ऊंचाहार के गोकना गंगा घाट पर पिंडदान, तर्पण और श्राद्धकर्म किए जाते हैं। पं. प्रदीप शुक्ला ने बताया कि पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है कि देवताओं की पूजा से पहले पितरों का पूजन आवश्यक है। जब पितर प्रसन्न होते हैं तो देवता भी खुश होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी पितृपक्ष का विशेष महत्व माना गया है। पितृ दोष के चलते व्यक्ति जीवन में सफलता नहीं पाता है।
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सरेनी के गेंगासों, रालपुर घाट पर लोगों ने डुबकी लगाई। इसके बाद गेंगासों, संगठा देवी, मुंडमालेश्वर में जलाभिषेक किया। पुरोहित संतोष कुमार तिवारी पूजा अर्चना कराई।