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Raebareli News: मांग 400 मेगावाट पार, गहराया बिजली संकट
Wed, 23 Jul 2025 01:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Wed, 23 Jul 2025 01:05 AM IST
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खीरों उपकेंद्र के खार्ड में लगे उपकरण।
रायबरेली। सावन में बारिश हो नहीं रही है और गर्मी भी अपने चरम पर है। इसके अलावा शहर से लेकर लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के हाहाकार मचा है। गर्मी और उमस से परेशान लोगों ने अब सड़क पर उतरना शुरू कर दिया है। कभी धरना-प्रदर्शन तो कभी ज्ञापन सौंपकर लोग समस्या को दूर करने की मांग कर रहे हैं।
बारिश नहीं होने से समस्या और बढ़ गई है। किसान निजी नलकूप और राजकीय नलकूपों के सहारे सिंचाई कर रहे हैं। इससे बिजली की मांग 405 मेगावाट पहुंच गई है। उपकेंद्र ओवरलोड होने से कभी उपकेंद्रों में लगे उपकरण फुंक रहे हैं, तो कभी तार टूटने की घटनाएं हो रही हैं। जिले में 54 उपकेंद्रों से करीब पांच लाख उपभोक्ताओं को बिजली मिलती है। धान की रोपाई का अंतिम समय चल रहा है। बारिश नहीं होने और नहरों में पानी नहीं आने से 22 हजार निजी नलकूप और 300 राजकीय नलकूपों पर किसान निर्भर हैं।
यही वजह है कि 15 दिन पहले जहां बिजली की मांग 350 मेगावाट थी, वहीं अब मांग 405 मेगावाट पहुंच गई है। बिजली की मांग बढ़ने पर उपकेंद्रों पर लगे उपकरण हांफने लगे हैं। शहर में जहां बिजली की आवाजाही से लोग परेशान हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में बिजली के शेड्यूल धड़ाम हो गया है। 18 घंटे में महज 10 से 12 घंटे बिजली मिल रही है।
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लो-वोल्टेज से शोपीस बने बिजली उपकरण
बिजली की मांग बढ़ने से वोल्टेज इतना कम आ रहा है कि बिजली उपकरण शोपीस बने हैं। किसान रामसिंह यादव, प्रमोद पटेल ने बताया कि वोल्टेज कम होने से नलकूप क्षमता के मुताबिक पानी नहीं दे पा रहे हैं। मोटरों के खराब होने का खतरा बना रहता है। बिजली की आवाजाही से धान की सिंचाई और रोपाई नहीं हो पा रही है। पंखा, कूलर, फ्रिज समेत अन्य उपकरण शोपीस बने हैं।
21 दिन में फुंक गए 130 ट्रांसफार्मर
वोल्टेज कम होने से ट्रांसफार्मरों के जलने का सिलसिला शुरू हो गया है। 21 दिन में 130 ट्रांसफार्मर दग गए हैं। विभागीय अभियंताओं का कहना है कि वोल्टेज कम होने से ट्रांसफार्मर बहुत जल्दी गर्म होकर खराब हो जाते हैं। बिजली की मांग अधिक है। यदि बारिश नहीं हुई, तो समस्या और विकराल होगी। जल्दी-जल्दी ट्रांसफार्मर खराब होने से उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
आपूर्ति शुरू होते ही ओवरलोड हो जाते फीडर
जिले के 54 उपकेंद्रों से 250 फीडर निकले हैं। बिजली की आवाजाही से बार-बार नलकूप न चलाना पड़े। इसके लिए किसान नलकूपों पर ऑटो कट लगा देते हैं। इसके लगाने से बिजली आते ही अपने-आप नलकूप चालू हो जाते हैं। यही वजह है कि उपकेंद्रों से फीडरों को चालू करते ही फीडर ओवरलोड हो जाते हैं। इस वजह से ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई हैं।
बारिश नहीं होने से मांग बढ़ी
धान की रोपाई का समय चल रहा है। बारिश नहीं होने से किसान नलकूपों के सहारे सिंचाई कर रहे हैं। बारिश हो जाए, तो काफी हद तक बिजली की समस्या से राहत मिल जाएगी।
-रामकुमार, मुख्य अभियंता पावर कॉर्पोरशन
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बारिश नहीं होने से समस्या और बढ़ गई है। किसान निजी नलकूप और राजकीय नलकूपों के सहारे सिंचाई कर रहे हैं। इससे बिजली की मांग 405 मेगावाट पहुंच गई है। उपकेंद्र ओवरलोड होने से कभी उपकेंद्रों में लगे उपकरण फुंक रहे हैं, तो कभी तार टूटने की घटनाएं हो रही हैं। जिले में 54 उपकेंद्रों से करीब पांच लाख उपभोक्ताओं को बिजली मिलती है। धान की रोपाई का अंतिम समय चल रहा है। बारिश नहीं होने और नहरों में पानी नहीं आने से 22 हजार निजी नलकूप और 300 राजकीय नलकूपों पर किसान निर्भर हैं।
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यही वजह है कि 15 दिन पहले जहां बिजली की मांग 350 मेगावाट थी, वहीं अब मांग 405 मेगावाट पहुंच गई है। बिजली की मांग बढ़ने पर उपकेंद्रों पर लगे उपकरण हांफने लगे हैं। शहर में जहां बिजली की आवाजाही से लोग परेशान हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में बिजली के शेड्यूल धड़ाम हो गया है। 18 घंटे में महज 10 से 12 घंटे बिजली मिल रही है।
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लो-वोल्टेज से शोपीस बने बिजली उपकरण
बिजली की मांग बढ़ने से वोल्टेज इतना कम आ रहा है कि बिजली उपकरण शोपीस बने हैं। किसान रामसिंह यादव, प्रमोद पटेल ने बताया कि वोल्टेज कम होने से नलकूप क्षमता के मुताबिक पानी नहीं दे पा रहे हैं। मोटरों के खराब होने का खतरा बना रहता है। बिजली की आवाजाही से धान की सिंचाई और रोपाई नहीं हो पा रही है। पंखा, कूलर, फ्रिज समेत अन्य उपकरण शोपीस बने हैं।
21 दिन में फुंक गए 130 ट्रांसफार्मर
वोल्टेज कम होने से ट्रांसफार्मरों के जलने का सिलसिला शुरू हो गया है। 21 दिन में 130 ट्रांसफार्मर दग गए हैं। विभागीय अभियंताओं का कहना है कि वोल्टेज कम होने से ट्रांसफार्मर बहुत जल्दी गर्म होकर खराब हो जाते हैं। बिजली की मांग अधिक है। यदि बारिश नहीं हुई, तो समस्या और विकराल होगी। जल्दी-जल्दी ट्रांसफार्मर खराब होने से उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
आपूर्ति शुरू होते ही ओवरलोड हो जाते फीडर
जिले के 54 उपकेंद्रों से 250 फीडर निकले हैं। बिजली की आवाजाही से बार-बार नलकूप न चलाना पड़े। इसके लिए किसान नलकूपों पर ऑटो कट लगा देते हैं। इसके लगाने से बिजली आते ही अपने-आप नलकूप चालू हो जाते हैं। यही वजह है कि उपकेंद्रों से फीडरों को चालू करते ही फीडर ओवरलोड हो जाते हैं। इस वजह से ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई हैं।
बारिश नहीं होने से मांग बढ़ी
धान की रोपाई का समय चल रहा है। बारिश नहीं होने से किसान नलकूपों के सहारे सिंचाई कर रहे हैं। बारिश हो जाए, तो काफी हद तक बिजली की समस्या से राहत मिल जाएगी।
-रामकुमार, मुख्य अभियंता पावर कॉर्पोरशन