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मौसम की आंखमिचौली से फसलों की आफत
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Feb 2016 12:02 AM IST
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मौसम की आंखमिचौली का यही हाल रहा तो अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। शनिवार रात बूंदाबांदी और हवा चलने के कारण किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं। एक सप्ताह से कभी आसमान में बदली तो कभी धूप निकल आती है। तापमान भी बढ़ रहा है। रात में बूंदाबांदी भी हुई और हवा भी चली।
किसानों का मानना है कि बदली छाने से जहां सरसों पर माहू का प्रकोप बढ़ेगा। वहीं हवा चलने के कारण गेहूं के खेत की नमी कम हो जाएगी। जिसका असर फसल उत्पादन पर पडे़गा। यदि बारिश हो गई तो आलू की फसल को भी नुकसान होगा। वजह अधिकतर किसानों ने अभी तक आलू की खोदाई नहीं की है।
रविवार को मौसम साफ हो गया, लेकिन दिनभर हवा चली। ऐसे में बड़ी हो चुकी गेहूं के फसल गिरने का खतरा भी मंडरा रहा है। इस बार डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर गेहूं, 12 हजार हेक्टेयर पर आलू और दो हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की फसल बोई गई है।
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बरुवा गांव के किसान ज्योति प्रसाद यादव, निगोही गांव के रंजीत सिंह, कचनावां के राजकुमार यादव, डीह संजय द्विवेदी कहते हैं कि सरसों की फसल में पहले से ही माहू लग रहा है। बदली छाने के कारण माहू का खतरा और बढ़ गया है। हवा भी चल रही है, जिससे गेहूं के फसल के गिरने का खतरा बढ़ गया है।
वैसे तो अभी ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन मौसम का मिजाज ऐसा रहा तो इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा। जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय का कहना है कि मौसम के चलते अभी कोई नुकसान नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर के वैज्ञानिक डॉ. आरके कनौजिया ने डॉ. आरके कनौजिय अभी वैसे हालात नहीं हैं कि फसलों को नुकसान हो।
लेकिन मौसम इसी तरह रहा तो यह रबी की फसल के लिए ठीक नहीं होगा। तापमान बढ़ा है। सरसों की फसल पर पहले से ही माहू लग रहा है। आए दिन बदली छाने से माहू का प्रकोप और बढ़ गया है। हवा चलने के कारण गेहूं की खेत की नमी कम होगी। जिसका असर फसल उत्पादन पर पढ़ रहा है।
हालांकि अभी फसल छोटी है, जिससे उसके जमीन में गिरने की गुंजाइश कम है। इसलिए जरूरी है कि माहू से बचने के लिए सरसों की फसल में दवा का छिड़काव किया जाए। साथ ही गेहूं की सिंचाई की जाए, ताकि खेत में नमी बरकरार रहे।
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किसानों का मानना है कि बदली छाने से जहां सरसों पर माहू का प्रकोप बढ़ेगा। वहीं हवा चलने के कारण गेहूं के खेत की नमी कम हो जाएगी। जिसका असर फसल उत्पादन पर पडे़गा। यदि बारिश हो गई तो आलू की फसल को भी नुकसान होगा। वजह अधिकतर किसानों ने अभी तक आलू की खोदाई नहीं की है।
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रविवार को मौसम साफ हो गया, लेकिन दिनभर हवा चली। ऐसे में बड़ी हो चुकी गेहूं के फसल गिरने का खतरा भी मंडरा रहा है। इस बार डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर गेहूं, 12 हजार हेक्टेयर पर आलू और दो हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की फसल बोई गई है।
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बरुवा गांव के किसान ज्योति प्रसाद यादव, निगोही गांव के रंजीत सिंह, कचनावां के राजकुमार यादव, डीह संजय द्विवेदी कहते हैं कि सरसों की फसल में पहले से ही माहू लग रहा है। बदली छाने के कारण माहू का खतरा और बढ़ गया है। हवा भी चल रही है, जिससे गेहूं के फसल के गिरने का खतरा बढ़ गया है।
वैसे तो अभी ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन मौसम का मिजाज ऐसा रहा तो इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा। जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय का कहना है कि मौसम के चलते अभी कोई नुकसान नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर के वैज्ञानिक डॉ. आरके कनौजिया ने डॉ. आरके कनौजिय अभी वैसे हालात नहीं हैं कि फसलों को नुकसान हो।
लेकिन मौसम इसी तरह रहा तो यह रबी की फसल के लिए ठीक नहीं होगा। तापमान बढ़ा है। सरसों की फसल पर पहले से ही माहू लग रहा है। आए दिन बदली छाने से माहू का प्रकोप और बढ़ गया है। हवा चलने के कारण गेहूं की खेत की नमी कम होगी। जिसका असर फसल उत्पादन पर पढ़ रहा है।
हालांकि अभी फसल छोटी है, जिससे उसके जमीन में गिरने की गुंजाइश कम है। इसलिए जरूरी है कि माहू से बचने के लिए सरसों की फसल में दवा का छिड़काव किया जाए। साथ ही गेहूं की सिंचाई की जाए, ताकि खेत में नमी बरकरार रहे।