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खुद को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Mon, 21 Nov 2016 11:18 PM IST
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खुद को जिंदा साबित करने के लिए पेंशनरों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। नोट बंदी के बाद से बैंकों में जीवित प्रमाणपत्र जमा नहीं किए जा रहे हैं। इससे उन्हें जिला मुख्यालय की शरण लेनी पड़ रही है। जिला कोषागार में सोमवार को पेंशनरों के आने का सिलसिला लगा रहा। कोई लाठी के सहारे पहुंचा तो कोई परिवारीजनों का सहारा लेकर जीवित प्रमाणपत्र जमा करने पहुंचा।
पेंशनर उमराई देवी, रामपती, रामपती और जनक दुलारी का कहना था कि बैंकों में जीवित प्रमाणपत्र जमा न होने की वजह से जिला मुख्यालय आना पड़ा। क्षेत्रीय बैंकों में पुराने नोट बैंक जमा करने और नए नोट बदलने के कार्य को ही महत्व दिया जा रहा है। भीड़ के चलते पेंशनर बैंकों के अंदर नहीं जा पा रहे हैं।
जिला मुख्यालय आने तक में परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिला कोषाधिकारी सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी का कहना है कि यहां आने वाले पेंशनरों का जीवित प्रमाणपत्र आसानी से जमा हो जाता है। बैंकों में भी जीवित प्रमाणपत्र जमा करने की सुविधा है। इसलिए बैंक अधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
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पेंशनर उमराई देवी, रामपती, रामपती और जनक दुलारी का कहना था कि बैंकों में जीवित प्रमाणपत्र जमा न होने की वजह से जिला मुख्यालय आना पड़ा। क्षेत्रीय बैंकों में पुराने नोट बैंक जमा करने और नए नोट बदलने के कार्य को ही महत्व दिया जा रहा है। भीड़ के चलते पेंशनर बैंकों के अंदर नहीं जा पा रहे हैं।
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जिला मुख्यालय आने तक में परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिला कोषाधिकारी सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी का कहना है कि यहां आने वाले पेंशनरों का जीवित प्रमाणपत्र आसानी से जमा हो जाता है। बैंकों में भी जीवित प्रमाणपत्र जमा करने की सुविधा है। इसलिए बैंक अधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
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