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गले में फंसा भुना चना, थम गईं मासूम की सांसें
Wed, 17 Apr 2019 11:56 PM IST
rajni rajni
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: rajni rajni
Updated Wed, 17 Apr 2019 11:56 PM IST
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लालगंज कोतवाली क्षेत्र के धनाभाद गांव में भुना चना गले में फंस जाने से एक मासूम की मौत हो गई। घटना ने सभी को झकझोर कर दिया। परिवारीजनों को इस बात का अहसास नहीं हो रहा है कि महज चना गले में फंसने से उनके जिगर का टुकड़ा उनसे दूर हो जाएगा। रह-रहकर परिवारीजन रो पड़ते हैं। कहते हैं कि यह सब कैसे हो गया। परिवारीजनों ने बच्चे को सीएचसी भी पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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धनाभाद निवासी कोटेदार चंद्रनाथ निर्मल ने खेत से चने के हरे पेड़ लाकर भूना था। वह खा रहे थे। उसी समय उनका पोता रुद्र (2.3) भी वहां आ गया और चना खाने की जिद करने लगा। चंद्रनाथ ने उसे भी चने दे दिए।
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एक चना रुद्र के गले में फंस गया और उसकी तबियत बिगड़ने लगी। आननफानन में परिवार के लोग उसे सीएचसी लेकर आए। सीएचसी में डॉक्टर ने मासूम को मृत घोषित कर दिया। रुद्र की मौत से परिवार सदमे में है।
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पिता योगेंद्र उर्फ मोनू ने बताया कि रुद्र इकलौता संतान था। वहीं बेटे की मौत से मां सविता का भी रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम बच्चे की मौत ने सभी को झकझोर कर दिया है। लोगों का कहना है कि गले में चना फंसने से मौत होने का मामला पहली बार सुना है।
चंद्रनाथ का कहना है कि भुना चना खाते वक्त रुद्र ठीक था। अचानक चना गले में फंस गया। उसे तेज दर्द होना शुरू हो गया। उसे सीएचसी पहुंचाया, लेकिन उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
उधर, लालगंज कोतवाली प्रभारी विनोद सिंह का कहना है कि भुना चना गले में फंसने से बच्चे की मौत की जानकारी उन्हें नहीं है और न ही इस तरह की घटना की कोई सूचना कोतवाली में दी गई है।
खाने के लिए तरल पदार्थ दिए जाएं : संतोष सिंह
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संतोष सिंह का कहना है कि मासूम बच्चे की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है। खासकर खानपान के दौरान। माता-पिता को चाहिए कि छोटे बच्चों को खाने के लिए हार्ड खाद्य पदार्थ न देकर तरल पदार्थ दिए जाएं।
बच्चों को अपनी निगरानी में रखना चाहिए। खाना भी उन्हें अपनी निगरानी में खिलाएं। सांस की नली में कोई चीज जाने पर पहले बच्चे को छींक आती है। ऐसे में यह न भ्रम पालें कि छींक आई तो तुरंत ठीक हो जाएगा। ऐसा होने पर बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर इलाज कराएं। यदि देर की गई तो बच्चे की जान पर भी खतरा बन सकता है।
एनटी सर्जन को दिखाना होता है जरूरी : सीएमओ
सीएमओ डॉ. डीके सिंह का कहना है कि यदि बच्चे के गले में कुछ फंस जाता है तो अभिभावक किसी तरह की लापरवाही न बरतें। न ही झोलाछाप के पास जाएं। पांच से दस मिनट के बीच उसे एनटी सर्जन को दिखाकर इलाज कराएं। यदि देरी हो जाएगी तो बच्चे के जान जाने का खतरा रहता है।