{"_id":"5a8c6a3c4f1c1b187e8b7581","slug":"81519151676-raebareli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संशोधित 19-57-50","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
संशोधित 19-57-50
Updated Wed, 21 Feb 2018 01:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नहीं मिली एंबुलेंस, सड़क किनारे प्रसव, नवजात की मौत
खीरों (रायबरेली)। सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर की गई महिला को काफी इंतजार के बाद भी मंगलवार को एंबुलेंस नहीं मिल सकी।
काफी समय बीतने पर जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो घबराया उसका पति बाइक पर बैठाकर उसे जिला अस्पताल ले जाने लगा। लेकिन इसी बीच रास्ते में ही जमीन पर प्रसव हो गया।
इससे जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ गई। दोनों को सीएचसी ले जाया गया, जहां नवजात ने दम तोड़ दिया। वहीं प्रसूता को भर्ती कर लिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की इस मनमानी से परिवारीजनों में नाराजगी है। पीड़ित पक्ष ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
खीरों ब्लॉक क्षेत्र के भूपखेड़ा मजरे धुराई निवासी सोमवती (25) को प्रसव के लिए खीरों सीएचसी में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल में एक घंटे तक इलाज के नाम पर खानापूरी के बाद डॉ. मनोज कुमार ने प्रसूता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
साथ में आई आशा बहू ने 102 एंबुलेंस व 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी लेकिन काफी देर बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस दौरान प्रसूता की हालत बिगड़न लगी।
यह देख सोमवती का पति प्रेम शंकर उसे बाइक पर बैठाकर जिला अस्पताल चल दिया। लेकिन सीएचसी से महज 100 मीटर दूर ही सोमवती को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
वह बाइक से उतर कर सड़क किनारे जमीन पर लेट गई। इसी बीच आशा बहू राजरानी भी पैदल दौड़ते हुए मौके पर पहुंच गई। किसी तरह आसपास की महिलाओं की मदद से आशा बहू ने प्रसव कराया।
प्रसव के बाद नवजात व महिला की हालत बिगड़ने लगी। दोनों को आननफानन सीएचसी पहुंचाया गया, लेकिन कुछ देर बाद ही नवजात ने दम तोड़ दिया।
वहीं प्रसूता को भर्ती कर इलाज किया गया। उधर, नवजात की मौत को लेकर परिवारीजनों में गुस्सा है। परिवार के लोगों की मानें तो अगर एंबुलेंस समय से मिल जाती तो सड़क किनारे प्रसव न होता और नवजात की जान बच जाती।
विज्ञापन
विज्ञापन
खीरों (रायबरेली)। सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर की गई महिला को काफी इंतजार के बाद भी मंगलवार को एंबुलेंस नहीं मिल सकी।
काफी समय बीतने पर जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो घबराया उसका पति बाइक पर बैठाकर उसे जिला अस्पताल ले जाने लगा। लेकिन इसी बीच रास्ते में ही जमीन पर प्रसव हो गया।
इससे जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ गई। दोनों को सीएचसी ले जाया गया, जहां नवजात ने दम तोड़ दिया। वहीं प्रसूता को भर्ती कर लिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की इस मनमानी से परिवारीजनों में नाराजगी है। पीड़ित पक्ष ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
खीरों ब्लॉक क्षेत्र के भूपखेड़ा मजरे धुराई निवासी सोमवती (25) को प्रसव के लिए खीरों सीएचसी में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल में एक घंटे तक इलाज के नाम पर खानापूरी के बाद डॉ. मनोज कुमार ने प्रसूता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
साथ में आई आशा बहू ने 102 एंबुलेंस व 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी लेकिन काफी देर बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस दौरान प्रसूता की हालत बिगड़न लगी।
यह देख सोमवती का पति प्रेम शंकर उसे बाइक पर बैठाकर जिला अस्पताल चल दिया। लेकिन सीएचसी से महज 100 मीटर दूर ही सोमवती को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
वह बाइक से उतर कर सड़क किनारे जमीन पर लेट गई। इसी बीच आशा बहू राजरानी भी पैदल दौड़ते हुए मौके पर पहुंच गई। किसी तरह आसपास की महिलाओं की मदद से आशा बहू ने प्रसव कराया।
विज्ञापन
प्रसव के बाद नवजात व महिला की हालत बिगड़ने लगी। दोनों को आननफानन सीएचसी पहुंचाया गया, लेकिन कुछ देर बाद ही नवजात ने दम तोड़ दिया।
वहीं प्रसूता को भर्ती कर इलाज किया गया। उधर, नवजात की मौत को लेकर परिवारीजनों में गुस्सा है। परिवार के लोगों की मानें तो अगर एंबुलेंस समय से मिल जाती तो सड़क किनारे प्रसव न होता और नवजात की जान बच जाती।
विज्ञापन