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दो भाइयों समेत तीन को दस-दस वर्ष कैद
Updated Wed, 28 Feb 2018 12:21 AM IST
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दो भाइयों समेत तीन को दस-दस वर्ष की कैद
रायबरेली। कोर्ट ने रात में घर में घुसकर मारपीट करके मृत्यकारित करने वाले दो सगे भाइयों समेत तीन अभियुक्तों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही उन पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश विजेश कुमार ने मंगलवार को सुनाया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी (क्रिमिनल) अमरजीत के मुताबिक मामले की रिपोर्ट भदीहा निवासी पवन कुमार ने महराजगंज कोतवाली में दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट के अनुसार 12 अगस्त 2007 की रात उसके गांव के विपाती, राधेश्याम, शिव किशोर व हनुमान उसके घर आए। सभी ने सो रहे वादी के पिता शोभनाथ, चाचा अशर्फीलाल व बुआ शिवपती को गंभीर चोटें पहुंचाई।
इलाज के दौरान शिवपती की मौत हो गई। सभी अभियुक्त घर में रखा बक्सा भी उठा ले गए, जिसमें कुछ नकदी व जेवरात थे।
पुलिस ने विवेचना के बाद विपाती यादव, उसके बेटों राधेश्याम व शिव किशोर एवं हनुमान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। विचारण के दौरान विपाती यादव की मौत हो गई।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर राधेश्याम, शिवकिशोर व हनुमान को दोषी पाया और दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
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रायबरेली। कोर्ट ने रात में घर में घुसकर मारपीट करके मृत्यकारित करने वाले दो सगे भाइयों समेत तीन अभियुक्तों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही उन पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश विजेश कुमार ने मंगलवार को सुनाया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी (क्रिमिनल) अमरजीत के मुताबिक मामले की रिपोर्ट भदीहा निवासी पवन कुमार ने महराजगंज कोतवाली में दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट के अनुसार 12 अगस्त 2007 की रात उसके गांव के विपाती, राधेश्याम, शिव किशोर व हनुमान उसके घर आए। सभी ने सो रहे वादी के पिता शोभनाथ, चाचा अशर्फीलाल व बुआ शिवपती को गंभीर चोटें पहुंचाई।
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इलाज के दौरान शिवपती की मौत हो गई। सभी अभियुक्त घर में रखा बक्सा भी उठा ले गए, जिसमें कुछ नकदी व जेवरात थे।
पुलिस ने विवेचना के बाद विपाती यादव, उसके बेटों राधेश्याम व शिव किशोर एवं हनुमान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। विचारण के दौरान विपाती यादव की मौत हो गई।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर राधेश्याम, शिवकिशोर व हनुमान को दोषी पाया और दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।