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वर्चस्व कायम करने को लेकर नफरत की आग में जल उठा अप्टा
Updated Wed, 28 Jun 2017 03:19 AM IST
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नफरत की आग में जल उठा अप्टा
चुनावी शंखनाद दूर, पर प्रधान के लिए रोहित अभी से तैयार कर रहा था जमीन
इस बार सीट सामान्य न होने पर अपने गांव में नहीं लड़ पाया था चुनाव
वर्तमान प्रधान के बेटे उसके इरादे को कामयाब न होने का कर रहे थे विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। वर्चस्व कायम करने को लेकर अप्टा गांव सोमवार रात नफरत की आग में जल उठा। रोहित शुक्ल प्रधान के लिए अभी से अपनी जमीन तैयार करने में जुटा था। बेशक गांव में उसके भाई की ससुराल है, लेकिन वह यहां अपना रुतबा कायम कर रहा था। घर बनवा रहा था। यही बात प्रधान के बेटों को अखरती थी। वैसे तो दोनों गुटों में यह नफरत की आग कई साल से जल रही थी, लेकिन यह शायद किसी को पता नहीं था कि यह रंजिश इतनी बड़ी वारदात का रूप ले लेगी। पुलिस की मानें तो दोनोें गुटों की ओर से गांव में अपना ही सिक्का जमाने की खातिर वारदात की मुख्य वजह बनी।
प्रतापगढ़ जिले के थाना संग्रामगढ़ के देवारा गांव निवासी देवेश शुक्ल की ऊंचाहार थाना क्षेत्र के पूरे भूसई में ससुराल है, जहां पर रोहित मकान बनवा रहा था। पास के गांव झमनी का पुरवा में ननिहाल भी है। बताया जाता है कि रोहित अपने गांव देवरा का पूर्व प्रधान भी था। इस बार सामान्य सीट नहीं थी। नतीजतन वह प्रधान नहीं बन पाया था, लेकिन वह अपने करीबी को प्रधान बनवाने में कामयाब हो गया था। यानि देवरा गांव में उसकी तूती बोलती थी, पर उसने अब भाई के ससुराल में ही रहकर प्रधान बनने का ख्वाब पाल लिया था। इसकी जमीन तैयार करने में जुट गया था। इसी को लेकर गांव के प्रधान रामश्री यादव के पुत्र राजा यादव से रोहित की तनातनी चल रही थी। बताया जा रहा है कि रोहित प्रधान बनकर अपना राजनीति कद भी क्षेत्र में बढ़ाना चाहता था। कहा जा रहा है कि मृतक रोहित के भाई को जो जमीन ससुराल में मिली थी, उसको लेकर भी प्रधान के बेटे से रोहित की कहासुनी हुई थी। वर्चस्व को लेकर दोनों पक्षों में अंदर ही अंदर तनातनी चल रही थी। सोमवार रात रोहित अपने लोगों के साथ ननिहाल जा रहा था। विवाद हुआ। गोली चली। मारपीट हुई। आग लगी और पांच लोगों की मौत हो गई, जिसमें रोहित भी शामिल था।
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चुनावी शंखनाद दूर, पर प्रधान के लिए रोहित अभी से तैयार कर रहा था जमीन
इस बार सीट सामान्य न होने पर अपने गांव में नहीं लड़ पाया था चुनाव
वर्तमान प्रधान के बेटे उसके इरादे को कामयाब न होने का कर रहे थे विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। वर्चस्व कायम करने को लेकर अप्टा गांव सोमवार रात नफरत की आग में जल उठा। रोहित शुक्ल प्रधान के लिए अभी से अपनी जमीन तैयार करने में जुटा था। बेशक गांव में उसके भाई की ससुराल है, लेकिन वह यहां अपना रुतबा कायम कर रहा था। घर बनवा रहा था। यही बात प्रधान के बेटों को अखरती थी। वैसे तो दोनों गुटों में यह नफरत की आग कई साल से जल रही थी, लेकिन यह शायद किसी को पता नहीं था कि यह रंजिश इतनी बड़ी वारदात का रूप ले लेगी। पुलिस की मानें तो दोनोें गुटों की ओर से गांव में अपना ही सिक्का जमाने की खातिर वारदात की मुख्य वजह बनी।
प्रतापगढ़ जिले के थाना संग्रामगढ़ के देवारा गांव निवासी देवेश शुक्ल की ऊंचाहार थाना क्षेत्र के पूरे भूसई में ससुराल है, जहां पर रोहित मकान बनवा रहा था। पास के गांव झमनी का पुरवा में ननिहाल भी है। बताया जाता है कि रोहित अपने गांव देवरा का पूर्व प्रधान भी था। इस बार सामान्य सीट नहीं थी। नतीजतन वह प्रधान नहीं बन पाया था, लेकिन वह अपने करीबी को प्रधान बनवाने में कामयाब हो गया था। यानि देवरा गांव में उसकी तूती बोलती थी, पर उसने अब भाई के ससुराल में ही रहकर प्रधान बनने का ख्वाब पाल लिया था। इसकी जमीन तैयार करने में जुट गया था। इसी को लेकर गांव के प्रधान रामश्री यादव के पुत्र राजा यादव से रोहित की तनातनी चल रही थी। बताया जा रहा है कि रोहित प्रधान बनकर अपना राजनीति कद भी क्षेत्र में बढ़ाना चाहता था। कहा जा रहा है कि मृतक रोहित के भाई को जो जमीन ससुराल में मिली थी, उसको लेकर भी प्रधान के बेटे से रोहित की कहासुनी हुई थी। वर्चस्व को लेकर दोनों पक्षों में अंदर ही अंदर तनातनी चल रही थी। सोमवार रात रोहित अपने लोगों के साथ ननिहाल जा रहा था। विवाद हुआ। गोली चली। मारपीट हुई। आग लगी और पांच लोगों की मौत हो गई, जिसमें रोहित भी शामिल था।
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