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दो निजी अस्पताल तय, भर्ती होंगे कोरोना के मरीज
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रायबरेली। कोरोना बेकाबू कहर के बीच राहत भरी खबर है। जिला प्रशासन ने शहर के दो निजी अस्पतालों को कोविड हॉस्पिटल बना दिया गया है। दोनों अस्पतालों में 35 मरीजों को एक साथ भर्ती करके इलाज करने की क्षमता है। हालांकि इलाज में आने वाला खर्च मरीजों को ही वहन करना होगा। जिले में अब कोरोना मरीजों के लिए बेड़ों की संख्या बढ़कर 385 हो गई है।
जिले में रेलकोच के एल-2 अस्पताल में 300 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। एम्स में भी 50 बेड का एल-3 अस्पताल संचालित कराया गया है। इसके बाद भी मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं।
जिले में एक भी निजी अस्पताल को कोविड मरीजों के लिए चिह्नित नहीं किया गया था। ऐसी दशा में इलाज के लिए रुपये भी खर्च करने के लिए तैयार लोगों को लखनऊ व अन्य शहरों में भर्ती होने के लिए भटकना पड़ रहा है। यहां तक कि बड़े शहरों में पहले से बेड फुल होने के कारण परेशानी ही हाथ आ रही है।
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कोविड मरीजों की सुविधा के लिए शहर के वृतांता हॉस्पिटल आईटीआई और जेल गार्डन रोड के सिटी नर्सिंग होम को चुना गया है। वृतांता में 20 बेड और सिटी नर्सिंग होम में 15 बेड कोविड मरीजों लिए आरक्षित किए गए हैं।
बुधवार को सीएमओ ने दोनों ही अस्पतालों को कोविड मरीज भर्ती करने के लिए निर्देश दिए। हालांकि दोनों ही अस्पतालों में अब तक मरीजों को भर्ती करने के संबंध में पूरे बंदोबस्त उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
वृतांता में दो वेंटीलेटर व 10 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध
आईटीआई स्थित वृतांता हॉस्पिटल में दो वेंटीलेटर और 10 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। अन्य बंदोबस्त के लिए हॉस्पिटल के संचालक ने सीएमओ को पत्र लिखा है, लेकिन सिटी नर्सिंगहोम में कोविड मरीजों के लिए कोई बंदोबस्त नहीं है। यहां वेंटीलेटर के साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडरों तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इस अस्पताल में कोविड मरीजों को भर्ती कराना खतरे से खाली नहीं है।
प्रस्ताव मिलने के बाद शहर के दो निजी अस्पतालों को कोविड मरीजों को भर्ती करके इलाज करने के लिए चिह्नित किया गया है। दोनों ही अस्पतालों को मिलाकर 35 मरीज भर्ती किए जा सकते हैं। इलाज में आने वाला खर्च संबंधित मरीजों को ही उठाना होगा। जिले में अब बेडों की संख्या 385 हो गई है।
डॉ. बीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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जिले में रेलकोच के एल-2 अस्पताल में 300 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। एम्स में भी 50 बेड का एल-3 अस्पताल संचालित कराया गया है। इसके बाद भी मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं।
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जिले में एक भी निजी अस्पताल को कोविड मरीजों के लिए चिह्नित नहीं किया गया था। ऐसी दशा में इलाज के लिए रुपये भी खर्च करने के लिए तैयार लोगों को लखनऊ व अन्य शहरों में भर्ती होने के लिए भटकना पड़ रहा है। यहां तक कि बड़े शहरों में पहले से बेड फुल होने के कारण परेशानी ही हाथ आ रही है।
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कोविड मरीजों की सुविधा के लिए शहर के वृतांता हॉस्पिटल आईटीआई और जेल गार्डन रोड के सिटी नर्सिंग होम को चुना गया है। वृतांता में 20 बेड और सिटी नर्सिंग होम में 15 बेड कोविड मरीजों लिए आरक्षित किए गए हैं।
बुधवार को सीएमओ ने दोनों ही अस्पतालों को कोविड मरीज भर्ती करने के लिए निर्देश दिए। हालांकि दोनों ही अस्पतालों में अब तक मरीजों को भर्ती करने के संबंध में पूरे बंदोबस्त उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
वृतांता में दो वेंटीलेटर व 10 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध
आईटीआई स्थित वृतांता हॉस्पिटल में दो वेंटीलेटर और 10 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। अन्य बंदोबस्त के लिए हॉस्पिटल के संचालक ने सीएमओ को पत्र लिखा है, लेकिन सिटी नर्सिंगहोम में कोविड मरीजों के लिए कोई बंदोबस्त नहीं है। यहां वेंटीलेटर के साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडरों तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इस अस्पताल में कोविड मरीजों को भर्ती कराना खतरे से खाली नहीं है।
प्रस्ताव मिलने के बाद शहर के दो निजी अस्पतालों को कोविड मरीजों को भर्ती करके इलाज करने के लिए चिह्नित किया गया है। दोनों ही अस्पतालों को मिलाकर 35 मरीज भर्ती किए जा सकते हैं। इलाज में आने वाला खर्च संबंधित मरीजों को ही उठाना होगा। जिले में अब बेडों की संख्या 385 हो गई है।
डॉ. बीरेंद्र सिंह, सीएमओ