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Raebareli News: सात साल में 15 हजार सडक़ हादसे, महज एक नेक इंसान मिला
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रायबरेली। सड़क हादसे में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचा कर जान बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए संचालित नेक इंसान योजना सात साल में दम तोड़ गई है। सात साल में 15 हजार से अधिक हादसे हुए और लोगों ने दरियादिली दिखाते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने का काम किया, लेकिन योजना के तहत जिले में अब तक मात्र एक व्यक्ति को ही पांच हजार का पुरस्कार मिल सका है। विभागीय अधिकारियों की सुस्ती के कारण योजना का लाभ जिले के नेक इंसानों को नहीं मिल पा रहा है।
सड़क हादसों में जनहानि को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने सात साल पहले नेक इंसान योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत हादसों में घायलों को अस्पताल पहुंचकर लोगों का जान बचाने का प्रयास करने वालों को पांच हजार रुपये तक का पुरस्कार देने की व्यवस्था की गई थी। इसका मकसद यह था कि लोग जागरूक हों और घायलों की मदद के लिए आगे आएं।
सात साल में 15 हजार से अधिक सड़क हादसे हुए। लोगों ने दरियादिली दिखाकर घायलों को अस्पताल पहुंचकर उनकी जान बचाने का प्रयास किया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी दरियादिल लोगों को पुरस्कार नहीं दे पाए। पिछले साल सड़क हादसे में घायल की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले ट्रांसपोर्टर राम मोहन सिंह को योजना के तहत पुरस्कार दिया गया। इनके अलावा सात साल में किसी को भी इस योजना का लाभ नहीं दिया गया।
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हादसों के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने वालों को नेक इंसान योजना का लाभ देने के लिए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की रिपोर्ट अनिवार्य है। दोनों विभागों से रिपोर्ट आने के बाद ही परिवहन विभाग की ओर से पुरस्कार देने की व्यवस्था है। अब तक इन दोनों विभागों की ओर से उत्साहित लोगों को पुरस्कार देने के लिए रिपोर्ट नहीं दी गई है।
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सड़क हादसों में जनहानि को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने सात साल पहले नेक इंसान योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत हादसों में घायलों को अस्पताल पहुंचकर लोगों का जान बचाने का प्रयास करने वालों को पांच हजार रुपये तक का पुरस्कार देने की व्यवस्था की गई थी। इसका मकसद यह था कि लोग जागरूक हों और घायलों की मदद के लिए आगे आएं।
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सात साल में 15 हजार से अधिक सड़क हादसे हुए। लोगों ने दरियादिली दिखाकर घायलों को अस्पताल पहुंचकर उनकी जान बचाने का प्रयास किया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी दरियादिल लोगों को पुरस्कार नहीं दे पाए। पिछले साल सड़क हादसे में घायल की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले ट्रांसपोर्टर राम मोहन सिंह को योजना के तहत पुरस्कार दिया गया। इनके अलावा सात साल में किसी को भी इस योजना का लाभ नहीं दिया गया।
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हादसों के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने वालों को नेक इंसान योजना का लाभ देने के लिए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की रिपोर्ट अनिवार्य है। दोनों विभागों से रिपोर्ट आने के बाद ही परिवहन विभाग की ओर से पुरस्कार देने की व्यवस्था है। अब तक इन दोनों विभागों की ओर से उत्साहित लोगों को पुरस्कार देने के लिए रिपोर्ट नहीं दी गई है।