{"_id":"60d355108ebc3e29ec2ac64b","slug":"corona-raibaraily-news-lko583801595","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना से जान गंवाने वाले गरीबों के घर खुशहाली लाएगी ‘आशा’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना से जान गंवाने वाले गरीबों के घर खुशहाली लाएगी ‘आशा’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय कोरोना के चपेट में आने के बाद जान गंवाने वाले अनुसूचित जाति के गरीब आश्रितों के घर खुशहाली लाएगा। इसके लिए आशा योजना संचालित की गई है।
योजना के तहत उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम ने अनुसूचित जाति के मृतकों के आश्रितों की मदद करेगा। रोजगार स्थापित करने के लिए पांच-पांच लाख रुपये का कर्ज आश्रितों को दिलाया जाएगा, जिसमें 20 फीसदी तक अनुदान भी मिलेगा।
मामले में शासन से जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) से कोरोना से अनुसूचित जाति के संक्रमितों की मौतों की रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही बजट मिलते ही ऋण लेने की व्यवस्था की जाएगी।
विज्ञापन
जिले में कोरोना के चपेट में आने के बाद अब तक 346 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इसमें करीब 100 मृतक अनुसूचित जाति के हैं। भारत सरकार के संज्ञान में आया है कि अनुसूचित जाति के तमाम ऐसे मृतक हैं, जो मेहनत करके अपना परिवार चला रहे थे।
उनकी मौत के बाद अब परिवार को चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मृतकों के आश्रितों का रोजगार स्थापित करवाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से आशा योजना संचालित की है।
मंत्रालय की मंशा पर उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम कोरोना से जान गंवाने वाले आश्रितों को रोजगार के लिए कर्ज दिलाने की प्रक्रिया में जुट गया है।
विभाग ने जिले में अनुसूचित जाति के मृतकों की रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही शासन से बजट और लक्ष्य मिलते ही लाभार्थियों को पांच-पांच लाख रुपये का ऋण दिलाया जाएगा। आश्रितों को एक-एक लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। शेष धनराशि को आसान किस्तों में अदा करना होगा।
आय तीन लाख और उम्र 18 साल के ऊपर होनी जरूरी
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के महाप्रबंधक आरपी सिंह ने जारी पत्र में लाभार्थियों की पात्रता के संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए हैं। कोरोना से मरने वाले अनुसूचित जाति के व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
उनके परिवार की वार्षिक आय भी तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। मृतक परिवार का मुख्य कमाई करने वाला सदस्य होना चाहिए। कोविड-10 से मृतक का प्रमाणपत्र होना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की आशा योजना से अनुसूचित जाति के कोरोना से मृतकों के आश्रितों को पांच-पांच लाख रुपये का ऋण रोजगार स्थापित करने के लिए दिया जाएगा। मृतकों की सूची ब्लॉकों को पत्र भेजकर मंगवायी गई है। जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सुनीता सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास)
विज्ञापन
योजना के तहत उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम ने अनुसूचित जाति के मृतकों के आश्रितों की मदद करेगा। रोजगार स्थापित करने के लिए पांच-पांच लाख रुपये का कर्ज आश्रितों को दिलाया जाएगा, जिसमें 20 फीसदी तक अनुदान भी मिलेगा।
विज्ञापन
मामले में शासन से जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) से कोरोना से अनुसूचित जाति के संक्रमितों की मौतों की रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही बजट मिलते ही ऋण लेने की व्यवस्था की जाएगी।
विज्ञापन
जिले में कोरोना के चपेट में आने के बाद अब तक 346 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इसमें करीब 100 मृतक अनुसूचित जाति के हैं। भारत सरकार के संज्ञान में आया है कि अनुसूचित जाति के तमाम ऐसे मृतक हैं, जो मेहनत करके अपना परिवार चला रहे थे।
उनकी मौत के बाद अब परिवार को चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मृतकों के आश्रितों का रोजगार स्थापित करवाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से आशा योजना संचालित की है।
मंत्रालय की मंशा पर उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम कोरोना से जान गंवाने वाले आश्रितों को रोजगार के लिए कर्ज दिलाने की प्रक्रिया में जुट गया है।
विभाग ने जिले में अनुसूचित जाति के मृतकों की रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही शासन से बजट और लक्ष्य मिलते ही लाभार्थियों को पांच-पांच लाख रुपये का ऋण दिलाया जाएगा। आश्रितों को एक-एक लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। शेष धनराशि को आसान किस्तों में अदा करना होगा।
आय तीन लाख और उम्र 18 साल के ऊपर होनी जरूरी
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के महाप्रबंधक आरपी सिंह ने जारी पत्र में लाभार्थियों की पात्रता के संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए हैं। कोरोना से मरने वाले अनुसूचित जाति के व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
उनके परिवार की वार्षिक आय भी तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। मृतक परिवार का मुख्य कमाई करने वाला सदस्य होना चाहिए। कोविड-10 से मृतक का प्रमाणपत्र होना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की आशा योजना से अनुसूचित जाति के कोरोना से मृतकों के आश्रितों को पांच-पांच लाख रुपये का ऋण रोजगार स्थापित करने के लिए दिया जाएगा। मृतकों की सूची ब्लॉकों को पत्र भेजकर मंगवायी गई है। जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सुनीता सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास)