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Raebareli News: अधीक्षकों के पास ही दम तोड़ रहीं शिकायतें

Fri, 30 May 2025 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली Updated Fri, 30 May 2025 12:48 AM IST
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Complaints are dying with the superintendents only
रायबरेली। जिले के सरकारी अस्पतालों में दवा के काले कारोबार से डॉक्टर तो मालामाल हो रहे हैं, लेकिन मरीज ठगे जा रहे हैं। वर्षों से चल रहे इस खेल को रोक पाने में आला अधिकारी नाकाम हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टरों की सेटिंग लखनऊ में बैठे कारोबारियों से है। सीधे सेटिंग होने के कारण खुलेआम दवाएं लिखी जा रही हैं। जिला अस्पताल के पूर्व सीएमएस डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने बीती 17 फरवरी को बाजार से सीटी स्कैन कराने के लिए ओपीडी कक्ष में परची पकड़ी थी।
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बीती 17 मार्च को सीएमएस को बाहरी लोग ओपीडी कक्षों में दवा की परची लिखते मिले थे। डीएम हर्षिता माथुर के आदेश पर बीती 25 मार्च को तीन सदस्यीय कमेटी ने मरीजों को बाजार से दवा लिखने के संबंध में जांच शुरू की थी। एक-एक करके कई मामले पकड़ में आए और जांच भी शुरू हुई, लेकिन अब तक किसी का बाल-बांका नहीं हो सका।
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जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक दवा के काले कारोबार का हिस्सा अधीक्षकों तक पहुंच जाता है। इसी कारण अस्पतालों में ही मामलों को निपटा दिया जाता है। सीएचसी और पीएचसी में तो डॉक्टरों के कारनामे निराले ही हैं। शिकायतें अधीक्षकों तक सीमित रहने के कारण दवा का खेल थम नहीं रहा है।
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चर्चा तो यहां तक है कि कई सीएचसी अधीक्षकों की सेटिंग वाली दवाएं ही उनके यहां तैनात डॉकटर लिखते हैं।
कई सीएचसी में अधीक्षकों को उनका हिस्सा मिल जाता है। इसी कारण शिकायतों को अस्पताल स्तर पर ही निपटा दिया जाता है। मरीज सीएमओ या डीएम के स्तर पर शिकायत नहीं पहुंच पाती है।
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