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‘औषधीय रसायन के प्रयोग में बरतें सावधानी’
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Sat, 19 Mar 2016 11:53 PM IST
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राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर) के आठवें सेमिनार में शनिवार को उपस्थित छात्र-छत्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर) का आठवां नाइपर सीएसआईआर-सीडीआरआई सिम्पोजियम सेमिनार के दूसरे दिन शोधकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. विनोद तिवारी ने औषधीय रसायन में उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि दवाओं में औषधीय रसायन का प्रयोग में सावधानी बरतनी चाहिए। लखनऊ के डॉ. भूपेंद्र तिवारी ने शोध से दिखाया कि किस तरह से कार्बन, कार्बन ब्रांड को तोड़कर चिरल मेडिसिनिरी इम्पोटेंट कम्पाउंड बनाया जा सकता है।
डॉ. दिपांकर कोले ने अपने शोध परिणामों को प्रस्तुत किया। द्वितीय वर्ष के छात्र आशीष ठाकुर ने कैरल कैटलिस्ट एक्टिवेशन एनर्जी पर कोई भी रसायन कैसे निर्भर करता है प्रश्न किया। जवाब में डॉ. भूपेंद्र तिवारी ने बताया कि उत्प्रेरक एक्टिव एनर्जी पर निर्भर रहता है।
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सिम्पोजियम के पांचवें सेशन के दौरान वर्तमान समय में जिन दवाई पर अनुसंधान चल रहा है, उस विषय पर प्रकाश डाला गया। भोपाल से आए प्रो एनके जैन ने अपने व्याख्यान में कंट्रोल्ड और नोवल औषधीय डिलिवरी सिस्टम रिटरोस्पेक्ट और प्रास्पेक्ट्रस के बारे में विस्तार से बताया।
इसके अलावा राजेश अग्रवाल, वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बी. मिश्र ने विभिन्न औषधीयों के बारे में बताया। अंतिम सेशन में डॉ. रजनीश कुमार चतुर्वेदी अनुसंधान के संबंध में बताया कि किस प्रकार वैज्ञानिक सबसे पहले चूहे को विशेष बनाकर अनुसंधान करते हैं।
वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. ज्ञान प्रकाश मोदी, डॉ. दमनप्रीत सिंह ने अपना वैज्ञानिक व्याख्यान दिए। इस मौके पर डॉ. एसके रथ, डॉ. रितु त्रिवेदी, डॉ. पीआर मिश्र, डॉ. केएन तिवारी आदि मौजूद रहे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में नाइपर के छात्र-छात्राओं ने डांस, गीत आदि प्रस्तुत कर खूब धमाल मचाया। वहीं नाइपर परियोजना निदेशक डॉ. पीके शुक्ल ने पोस्टर प्रजेंटेशन विजेता अनिका सूद और उपविजेता भलाला कृपाल प्रभुभाई को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। सिम्पोजियम कमेटी सचिव डॉ. अनुज गर्ग ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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उन्होंने कहा कि दवाओं में औषधीय रसायन का प्रयोग में सावधानी बरतनी चाहिए। लखनऊ के डॉ. भूपेंद्र तिवारी ने शोध से दिखाया कि किस तरह से कार्बन, कार्बन ब्रांड को तोड़कर चिरल मेडिसिनिरी इम्पोटेंट कम्पाउंड बनाया जा सकता है।
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डॉ. दिपांकर कोले ने अपने शोध परिणामों को प्रस्तुत किया। द्वितीय वर्ष के छात्र आशीष ठाकुर ने कैरल कैटलिस्ट एक्टिवेशन एनर्जी पर कोई भी रसायन कैसे निर्भर करता है प्रश्न किया। जवाब में डॉ. भूपेंद्र तिवारी ने बताया कि उत्प्रेरक एक्टिव एनर्जी पर निर्भर रहता है।
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सिम्पोजियम के पांचवें सेशन के दौरान वर्तमान समय में जिन दवाई पर अनुसंधान चल रहा है, उस विषय पर प्रकाश डाला गया। भोपाल से आए प्रो एनके जैन ने अपने व्याख्यान में कंट्रोल्ड और नोवल औषधीय डिलिवरी सिस्टम रिटरोस्पेक्ट और प्रास्पेक्ट्रस के बारे में विस्तार से बताया।
इसके अलावा राजेश अग्रवाल, वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बी. मिश्र ने विभिन्न औषधीयों के बारे में बताया। अंतिम सेशन में डॉ. रजनीश कुमार चतुर्वेदी अनुसंधान के संबंध में बताया कि किस प्रकार वैज्ञानिक सबसे पहले चूहे को विशेष बनाकर अनुसंधान करते हैं।
वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. ज्ञान प्रकाश मोदी, डॉ. दमनप्रीत सिंह ने अपना वैज्ञानिक व्याख्यान दिए। इस मौके पर डॉ. एसके रथ, डॉ. रितु त्रिवेदी, डॉ. पीआर मिश्र, डॉ. केएन तिवारी आदि मौजूद रहे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में नाइपर के छात्र-छात्राओं ने डांस, गीत आदि प्रस्तुत कर खूब धमाल मचाया। वहीं नाइपर परियोजना निदेशक डॉ. पीके शुक्ल ने पोस्टर प्रजेंटेशन विजेता अनिका सूद और उपविजेता भलाला कृपाल प्रभुभाई को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। सिम्पोजियम कमेटी सचिव डॉ. अनुज गर्ग ने धन्यवाद ज्ञापित किया।