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भूमि की हेराफेरी के मामले में बढ़ सकती है मुश्किल, विवेचक ने मांगे अभिलेखागार से दस्तावेज

Fri, 30 Jul 2021 09:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 09:42 PM IST
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Action
रायबरेली। सदर तहसील और कलेक्ट्रेट में भूमि हेराफेरी किए जाने के मामले की जांच शुरू हो गई है। मामले की पड़ताल कर रहे विवेचक ने अभिलेखागार से प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए हैं।
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पुलिस जल्द मामले में नामजद कराए आरोपियों से पूछताछ भी करेगी। जिस तरह मामले में पुलिस ने जांच शुरू की है, उससे माना जा रहा है कि मामले में जल्द आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
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सदर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत रायबरेली-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उफरामऊ गांव स्थित करीब चार बीघा जमीन बंजर में दर्ज थी, जिसमें हेराफेरी कर ली गई थी।
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डीएम ने छह सदस्यीय टीम गठित करके जांच कराई तो खुलासा हुआ था कि राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से उफरामऊ गांव की रहने वाली स्व.सरजूदेई पत्नी ज्ञानधर प्रसाद के नाम बंजर जमीन को सरकारी दस्तावेजों में अंकित करा दिया गया।
यही नहीं स्व.सरजूदेई के वारिसों के नाम जमीन चढ़वाने के लिए एसडीएम कोर्ट से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर आदेश भी पारित करा दिया गया। जमीन की कीमत करीब दो करोड़ है।
जांच रिपोर्ट मिलने पर डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट एवं अभिलेखागार राजस्व प्रभारी अधिकारी की तहरीर पर तत्कालीन अभिलेखपाल राजस्व व संप्रति प्रशासनिक अधिकारी मंजूलता दीक्षित, कलेक्ट्रेट के एआरके देही अभिलेखागार राजस्व महादेव, तहसील कर्मी अभिलेखागार जमुना प्रसाद के अलावा उफरामऊ निवासी विद्याकांत, रमाकांत, श्रीकांत, गीता, विष्णुकांत, शिवाकांत, सोनल, पूवी अवस्थी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
मामले की विवेचना सदर कोतवाली में तैनात निरीक्षक अरुण कुमार अवस्थी को दी गई है। विवेचक का कहना है कि प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेज अभिलेखागार से मांगे हैं। दस्तावेज मिलने के बाद प्रकरण में कराए गए नामजद आरोपियों से पूछताछ की जाएगी। मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सदर तहसील में मनमानी की हद, हर दिन हो रहे खुलासे
सदर तहसील में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत से शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर कब्जा करने और फर्जी तरीके से चढ़वाने का खेल चल रहा है। हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। यह हाल तब है, जब मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। बावजूद उनका आदेश सदर तहसील के अफसरों के लिए मायने नहीं रखता। कुछ तो ऐसे लेखपाल हैं, जो प्रापर्टी डीलर में लिप्त हैं। पहले उफरामऊ और अब कोल्ड स्टोरेज की जमीन में खेल किए जाने के मामले से हड़कंप मचा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर भ्रष्ट अ धिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
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