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दिवाली से पहले मरीजों को तोहफा, एम्स में अब ईएनटी की हो सकेगी अत्याधुनिक जांचें
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रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में नाक, कान, गला (ईएनटी) के रोगियों को विशेषज्ञ जांचों की सुविधा मिल गई है। एंडोस्कोपी, माइक्रोस्कोपिक और स्ट्रोबोस्कोपी जांच के लिए मरीजों को लखनऊ या अन्य बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
एम्स के अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने शुक्रवार को तीनों जांच के लिए ईएनटी वर्क स्टेशन का फीता काटकर शुभारंभ किया।
शहर से सटे दरियापुर स्थित एम्स में नौ जुलाई से मरीजों को भर्ती करके इलाज की सुविधा शुरू हो गई। पिछले दो साल से ओपीडी चल रही है। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई सहित अन्य बड़ी जांचें पहले ही शुरू हो चुकी हैं।
एम्स में मरीजों के लिए 200 बेडों की व्यवस्था है। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए भी अलग से 100 बेड रिजर्व रखे गए हैं।
जिले में सबसे बड़ी समस्या नाक, कान और गला के रोगियों को हो रही थी। जिले में जांच और इलाज की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को लखनऊ व अन्य बड़े शहरों का सहारा लेना पड़ता था।
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हालांकि एम्स में ईएनटी की ओपीडी पिछले तीन साल से चल रही है, लेकिन अब विशेषज्ञ सेवाएं शुरू की गईं हैं। विशेषज्ञ जांच शुरू कराने के लिए एम्स के अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने शुक्रवार को ईएनटी वर्क स्टेशन का फीता काटकर शुभारंभ किया।
इन जांचों के शुरू होने के बाद अब नाक, कान व गला के रोगियों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इस मौके पर डीन प्रो. नीरज कुमारी, रजिष्ट्रार/ वरिष्ठ प्रशासनक अधिकारी समीर शुक्ला, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गौरव कुमार उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
जांच के साथ ही मेडिकल टीचिंग में सहूलियतें
नाक, कान व गला विभाग की इंचार्ज अनन्या सोनी ने बताया कि ईएनटी वर्क स्टेशन में रोगियों की जांच होने के साथ ही पढ़ाई में भी काफी सहूलियतें मिलेंगी।
एम्स में नाक की एंडोस्कोपी जांच शुरू की गई है। इसके अलावा कान की माइक्रोस्कोपिक जांच शुरू हो गई है। स्ट्रोबोस्कोपी जांच गले की आवाज संबंधी समस्याओं के इलाज में कारगर होगी।
इसके हाई डेफिनिशन कैमरा और मॉनिटर भी है। इससे मेडिकल टीचिंग में भी काफी सुविधा मिलेगी। मरीजों को जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। जांच की सुविध मिलने के बाद अब मरीजों का बेहतर इलाज हो सकेगा।
किसानों की जमीन का हो रहा बैनामा, एम्स का जल्द विस्तार
एम्स के विस्तार के लिए किसानों की करीब 80 बीघा जमीन लेने का काम चल रहा है। शासन से 43 करोड़ रुपये मिलने के कारण् जमीनों का बैनामा हो रहा है। बैनामे का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। जल्द ही एम्स को जमीन मिलने के बाद विस्तार का काम शुरू हो जाएगा।
एम्स में लगातार स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का काम चल रहा है। तमाम जरूरी जांचे शुरू कराने के बाद गुरुवार को ईएनटी की विशेषज्ञ जांचें शुरू कराई गई है। जमीन मिलते ही एम्स के विस्तार का काम भी तेजी से कराया जाएगा।
प्रो. अरविंद राजवंशी, अधिशासी निदेशक, एम्स
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एम्स के अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने शुक्रवार को तीनों जांच के लिए ईएनटी वर्क स्टेशन का फीता काटकर शुभारंभ किया।
शहर से सटे दरियापुर स्थित एम्स में नौ जुलाई से मरीजों को भर्ती करके इलाज की सुविधा शुरू हो गई। पिछले दो साल से ओपीडी चल रही है। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई सहित अन्य बड़ी जांचें पहले ही शुरू हो चुकी हैं।
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एम्स में मरीजों के लिए 200 बेडों की व्यवस्था है। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए भी अलग से 100 बेड रिजर्व रखे गए हैं।
जिले में सबसे बड़ी समस्या नाक, कान और गला के रोगियों को हो रही थी। जिले में जांच और इलाज की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को लखनऊ व अन्य बड़े शहरों का सहारा लेना पड़ता था।
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हालांकि एम्स में ईएनटी की ओपीडी पिछले तीन साल से चल रही है, लेकिन अब विशेषज्ञ सेवाएं शुरू की गईं हैं। विशेषज्ञ जांच शुरू कराने के लिए एम्स के अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने शुक्रवार को ईएनटी वर्क स्टेशन का फीता काटकर शुभारंभ किया।
इन जांचों के शुरू होने के बाद अब नाक, कान व गला के रोगियों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इस मौके पर डीन प्रो. नीरज कुमारी, रजिष्ट्रार/ वरिष्ठ प्रशासनक अधिकारी समीर शुक्ला, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गौरव कुमार उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
जांच के साथ ही मेडिकल टीचिंग में सहूलियतें
नाक, कान व गला विभाग की इंचार्ज अनन्या सोनी ने बताया कि ईएनटी वर्क स्टेशन में रोगियों की जांच होने के साथ ही पढ़ाई में भी काफी सहूलियतें मिलेंगी।
एम्स में नाक की एंडोस्कोपी जांच शुरू की गई है। इसके अलावा कान की माइक्रोस्कोपिक जांच शुरू हो गई है। स्ट्रोबोस्कोपी जांच गले की आवाज संबंधी समस्याओं के इलाज में कारगर होगी।
इसके हाई डेफिनिशन कैमरा और मॉनिटर भी है। इससे मेडिकल टीचिंग में भी काफी सुविधा मिलेगी। मरीजों को जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। जांच की सुविध मिलने के बाद अब मरीजों का बेहतर इलाज हो सकेगा।
किसानों की जमीन का हो रहा बैनामा, एम्स का जल्द विस्तार
एम्स के विस्तार के लिए किसानों की करीब 80 बीघा जमीन लेने का काम चल रहा है। शासन से 43 करोड़ रुपये मिलने के कारण् जमीनों का बैनामा हो रहा है। बैनामे का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। जल्द ही एम्स को जमीन मिलने के बाद विस्तार का काम शुरू हो जाएगा।
एम्स में लगातार स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का काम चल रहा है। तमाम जरूरी जांचे शुरू कराने के बाद गुरुवार को ईएनटी की विशेषज्ञ जांचें शुरू कराई गई है। जमीन मिलते ही एम्स के विस्तार का काम भी तेजी से कराया जाएगा।
प्रो. अरविंद राजवंशी, अधिशासी निदेशक, एम्स