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बिजली व्यवस्था पटरी पर लाने की 26 करोड़ की योजना ठप
Raebareli
Updated Tue, 01 Jul 2014 05:31 AM IST
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रायबरेली (ब्यूरो)। शहर को बदहाल बिजली आपूर्ति व्यवस्था से मुक्त कराने के लिए पुनर्गठित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) पर ब्रेक लग गया है। 26 करोड़ बजट वाले इस कार्यक्रम का मकसद जनता को सुचारु रूप से बिजली आपूर्ति दिलाना था। छह माह में मुश्किल से 10 फीसदी काम होने के बाद बंद हो गया है। इसकी वजह पॉवर कॉर्पोरेशन के अधिकारी मैटेरियल की कमी बता रहे हैं। जबकि चर्चा है कि काम करने वाली संस्था ही गायब है। माना जा रहा है कि केंद्र में सत्ता बदलने की वजह से इस योजना पर ब्रेक लगा है।
शहर में आए दिन तार टूटने और खस्ताहाल ट्रांसफार्मरों के फुंकने की घटनाएं आम हो गई हैं। इससे आपूर्ति प्रभावित होती है और कॉर्पोरेशन को भी लाइन लॉस का नुकसान होता है। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने शहर की बदहाल बिजली व्यवस्था का कायाकल्प करने के लिए 26 करोड़ की आरएपीडीआरपी योजना तैयार की। इसके तहत जर्जर तारों को बदल कर उनके स्थान पर केबल (एबीसी लाइन) बिछाने, वर्षों से काम करते-करते थक चुके ट्रांसफार्मरों को बदलना और नये ट्रांसफार्मरों की स्थापना होनी है। यही नहीं जमीन में रखे ट्रांसफार्मरों के लिए प्लेटफाॅर्म तैयार करना भी है। योजना को धरातल पर लाने की जिम्मेदारी कोलकाता की एक संस्था वीकोलॉरी को दी गई। शुरुआत में इस काम में तेजी आई, लेकिन चुनाव और उसके बाद यूपीए सरकार के सत्ता में बाहर होने के बाद से काम धीमा होता गया। अब तो यह काम पूरी तरह से ठप हो गया है।
शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुनर्गठित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) चल रहा है। इस समय मैटेरियल की कमी के कारण काम बंद है। यह काम लखनऊ के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर चल रहा है। इस काम से उनका कोई लेनादेना नहीं है। योजना को कोलकाता की वीकोलॉरी संस्था करा रही है। -पीके सिंह, एसडीओ टाउन
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काम क्यूं नहीं हो रहा है, इसकी जानकारी नहीं है। योजना का जिले के पावर कॉर्पोरेशन विभाग से कोई लेना-देना नहीं है। काम किसलिए बंद है और कब शुरू होगा, यह ऊपर के अधिकारी ही जानें।
-अशोक कुमार, अधिशासी अभियंता
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शहर में आए दिन तार टूटने और खस्ताहाल ट्रांसफार्मरों के फुंकने की घटनाएं आम हो गई हैं। इससे आपूर्ति प्रभावित होती है और कॉर्पोरेशन को भी लाइन लॉस का नुकसान होता है। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने शहर की बदहाल बिजली व्यवस्था का कायाकल्प करने के लिए 26 करोड़ की आरएपीडीआरपी योजना तैयार की। इसके तहत जर्जर तारों को बदल कर उनके स्थान पर केबल (एबीसी लाइन) बिछाने, वर्षों से काम करते-करते थक चुके ट्रांसफार्मरों को बदलना और नये ट्रांसफार्मरों की स्थापना होनी है। यही नहीं जमीन में रखे ट्रांसफार्मरों के लिए प्लेटफाॅर्म तैयार करना भी है। योजना को धरातल पर लाने की जिम्मेदारी कोलकाता की एक संस्था वीकोलॉरी को दी गई। शुरुआत में इस काम में तेजी आई, लेकिन चुनाव और उसके बाद यूपीए सरकार के सत्ता में बाहर होने के बाद से काम धीमा होता गया। अब तो यह काम पूरी तरह से ठप हो गया है।
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शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुनर्गठित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) चल रहा है। इस समय मैटेरियल की कमी के कारण काम बंद है। यह काम लखनऊ के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर चल रहा है। इस काम से उनका कोई लेनादेना नहीं है। योजना को कोलकाता की वीकोलॉरी संस्था करा रही है। -पीके सिंह, एसडीओ टाउन
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काम क्यूं नहीं हो रहा है, इसकी जानकारी नहीं है। योजना का जिले के पावर कॉर्पोरेशन विभाग से कोई लेना-देना नहीं है। काम किसलिए बंद है और कब शुरू होगा, यह ऊपर के अधिकारी ही जानें।
-अशोक कुमार, अधिशासी अभियंता