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तकनीकी अन्वेषक व एई पर कार्रवाई की संस्तुति
Raebareli
Updated Sat, 14 Jun 2014 05:31 AM IST
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रायबरेली। जिले के चर्चित विधायक निधि घोटाले में लागत से अधिक का इस्टीमेट बनाने के मामले में तकनीकी अन्वेषक व सहायक अभियंता फंस गए हैं। तीन सदस्यीय टीम की जांच में एक करोड़ 16 लाख का इस्टीमेट पकड़ में आया है। दोनों अभियंताओं ने जेब गर्म करने की नीयत से जानबूझकर लागत से अधिक कीमत के 33 इस्टीमेट बनाए। जांच में पुष्टि होने के बाद सीडीओ ने दोनों अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव को संस्तुति पत्र भेेजा है।
वर्ष 2012-13 में फर्जी शासनादेश पर राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ लिमिटेड ने ऊंचाहार, सरेनी, बछरावां और हरचंदपुर के सपा विधायकों से चार करोड़ 41 लाख रुपये का काम फर्जी शासनादेश बनाकर लिया था। लोकायुक्त कार्यालय की जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद संस्था द्वारा कराए गए कार्यों की जांच कराई गई। लोक निर्माण विभाग प्रथम खंड के अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के सहायक अभियंता और शारदा नहर दक्षिणी खंड के सहायक अभियंता की तकनीकी टीम की जांच में एक करोड़ 78 लाख का काम मौके पर मिला था। जांच में दो करोड़ 62 लाख का काम मौके पर नहीं पाया गया। मामले में राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ लिमिटेड व वैशाली कांस्ट्रक्शन के परियोजना प्रबंधक अशोक त्रिपाठी से वसूली के आदेश दिए गए हैं। जांच करने वाली टीम से ही इस्टीमेटों की भी जांच कराई तो सच्चाई उजागर हो गई। तकनीकी अन्वेषण अरुण कुमार शुक्ला ने अकेले ही 23 इस्टीमेट बनाए और पास किए। शेष 10 इस्टीमेट को तकनीकी अन्वेषक व डीआरडीए के सहायक अभियंता एसके त्रिपाठी ने भी ओवर इस्टीमेट बनाएं। जांच में एक करोड़ 16 लाख का ओवर इस्टीमेट मिलने के बाद दोनों अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए सीडीओ ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। पीडी इंद्रसेन सिंह ने बताया कि जांच में लागत से एक करोड़ 16 लाख का अधिक का इस्टीमेट पकड़ में आया है।
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वर्ष 2012-13 में फर्जी शासनादेश पर राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ लिमिटेड ने ऊंचाहार, सरेनी, बछरावां और हरचंदपुर के सपा विधायकों से चार करोड़ 41 लाख रुपये का काम फर्जी शासनादेश बनाकर लिया था। लोकायुक्त कार्यालय की जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद संस्था द्वारा कराए गए कार्यों की जांच कराई गई। लोक निर्माण विभाग प्रथम खंड के अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के सहायक अभियंता और शारदा नहर दक्षिणी खंड के सहायक अभियंता की तकनीकी टीम की जांच में एक करोड़ 78 लाख का काम मौके पर मिला था। जांच में दो करोड़ 62 लाख का काम मौके पर नहीं पाया गया। मामले में राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ लिमिटेड व वैशाली कांस्ट्रक्शन के परियोजना प्रबंधक अशोक त्रिपाठी से वसूली के आदेश दिए गए हैं। जांच करने वाली टीम से ही इस्टीमेटों की भी जांच कराई तो सच्चाई उजागर हो गई। तकनीकी अन्वेषण अरुण कुमार शुक्ला ने अकेले ही 23 इस्टीमेट बनाए और पास किए। शेष 10 इस्टीमेट को तकनीकी अन्वेषक व डीआरडीए के सहायक अभियंता एसके त्रिपाठी ने भी ओवर इस्टीमेट बनाएं। जांच में एक करोड़ 16 लाख का ओवर इस्टीमेट मिलने के बाद दोनों अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए सीडीओ ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। पीडी इंद्रसेन सिंह ने बताया कि जांच में लागत से एक करोड़ 16 लाख का अधिक का इस्टीमेट पकड़ में आया है।
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