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खतरे में रजबहे और माइनरों का अस्तित्व
Updated Mon, 24 Jul 2017 01:18 AM IST
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नहर पाट बनाए भवन और मॉल
रायबरेली। जिले में किसानों की सिंचाई के लिए बनाई गई माइनरें और रजबहों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में जहां किसान नहरों की पटरियों को काटकर खेत में मिला रहे हैं, वहीं शहर से निकली नहरें पूरी तरह गायब हो गई है। नहरों को पाट कर उन पर भवन और मॉल बना लिए गए। नहरों के जीर्णोद्धार के लिए सिंचाई विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यही कारण है कि पानी आने पर नहरों की पटरियां कट जाती है। इससे फसलें जलमग्न हो जाती है। सिंचाई मंत्री ने दो माह पहले न सिर्फ नहरों पर मकान बनाकर कब्जा करने वालों से सर्किल रेट पर वसूली करने के निर्देश दिए थे, बल्कि अवैध कब्जा को हटवाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं टूटी।
जिले में 453 छोटी बड़ी नहरें निकली हैं। इसमें से एक दर्जन से ज्यादा नहरों पर कब्जा हो गया है। किसी ने नहर की पटरी काट कर खेत बना लिया तो किसी ने पटरी में मकान का निर्माण करा लिया। सिंचाई विभाग कब्जा हटवाने में नाकाम साबित हो रहा है। शहर से होकर गुजरी ऐशबाग नहर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है। नहर की भूमि पर आलीशान भवन और मॉल बन गए हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कब्जा हटवाने का कोई प्रयास नहीं किया। इसी तरह रायबरेली रजबहे का भी अस्तित्व समाप्त हो गया है। राही ब्लॉक क्षेत्र के सड़वा, विनोहरा, पंडित का पुरवा गांव के पास से निकली सड़वा माइनर की पटरी पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसके चलते नहर की पटरी एक मेड़ में तब्दील होकर रह गई। गांव के लोगों ने नहर की पटरी को काटकर खेत में मिला लिया है तो कुछ लोगों ने अवैध निर्माण करके कब्जा कर लिया है। राही ब्लॉक क्षेत्र के ही जरौला, गोंदवारा, भुएमऊ गांव के पास से होकर निकली आयासपुर डीही माइनर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया गया है। इस माइनर की पटरी पर एक प्राथमिक विद्यालय भी बना है। इलाकाई लोगों ने इसकी कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कुछ लोगों ने नहर की पटरी पर मकान बनवा लिया है। इससे पटरी से आवागमन बंद हो गया है।
विभागीय कर्मचारियों की शह पर हो रहे कब्जे
लोगों का मानना है कि नहरों पर कब्जे विभागीय कर्मचारियों की मदद से किए जा रहे हैं। कर्मचारी ही कब्जा करने वाले के नाम पर लाखों रुपया ऐंठ रहे हैं। शिकायत होने पर टाल देते हैं। सेटिंग गेटिंग करके रातों रात भवन का निर्माण करा देते हैं। मकान की छत पड़ने के बाद भवन स्वामी का पूरी तरह से कब्जा हो जाता है। शहर से होकर निकली नहरों में पूरी तरह से कब्जा हो गया है।
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नहरों से अवैध कब्जा हटवाने और निर्माण कराने वालों से सर्किल रेट पर वसूली करके मालिकाना हक दिए जाने के दिशा निर्देश मिले हैं। शहर से होकर निकली ऐशबाग, रायबरेली रजबहे पर मकान बन गए हैं। सहायक अभियंता सौरभ चौधरी को नहरों की पैमाइश कराकर कब्जा करने वालों के नाम मांगे गए है। नाम की लिस्ट मिलने के बाद उसे उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। आगे दिशा निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।-सिद्धार्थ कुमार, नोडल अधिकारी सिंचाई विभाग
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रायबरेली। जिले में किसानों की सिंचाई के लिए बनाई गई माइनरें और रजबहों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में जहां किसान नहरों की पटरियों को काटकर खेत में मिला रहे हैं, वहीं शहर से निकली नहरें पूरी तरह गायब हो गई है। नहरों को पाट कर उन पर भवन और मॉल बना लिए गए। नहरों के जीर्णोद्धार के लिए सिंचाई विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यही कारण है कि पानी आने पर नहरों की पटरियां कट जाती है। इससे फसलें जलमग्न हो जाती है। सिंचाई मंत्री ने दो माह पहले न सिर्फ नहरों पर मकान बनाकर कब्जा करने वालों से सर्किल रेट पर वसूली करने के निर्देश दिए थे, बल्कि अवैध कब्जा को हटवाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं टूटी।
जिले में 453 छोटी बड़ी नहरें निकली हैं। इसमें से एक दर्जन से ज्यादा नहरों पर कब्जा हो गया है। किसी ने नहर की पटरी काट कर खेत बना लिया तो किसी ने पटरी में मकान का निर्माण करा लिया। सिंचाई विभाग कब्जा हटवाने में नाकाम साबित हो रहा है। शहर से होकर गुजरी ऐशबाग नहर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है। नहर की भूमि पर आलीशान भवन और मॉल बन गए हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कब्जा हटवाने का कोई प्रयास नहीं किया। इसी तरह रायबरेली रजबहे का भी अस्तित्व समाप्त हो गया है। राही ब्लॉक क्षेत्र के सड़वा, विनोहरा, पंडित का पुरवा गांव के पास से निकली सड़वा माइनर की पटरी पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसके चलते नहर की पटरी एक मेड़ में तब्दील होकर रह गई। गांव के लोगों ने नहर की पटरी को काटकर खेत में मिला लिया है तो कुछ लोगों ने अवैध निर्माण करके कब्जा कर लिया है। राही ब्लॉक क्षेत्र के ही जरौला, गोंदवारा, भुएमऊ गांव के पास से होकर निकली आयासपुर डीही माइनर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया गया है। इस माइनर की पटरी पर एक प्राथमिक विद्यालय भी बना है। इलाकाई लोगों ने इसकी कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कुछ लोगों ने नहर की पटरी पर मकान बनवा लिया है। इससे पटरी से आवागमन बंद हो गया है।
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विभागीय कर्मचारियों की शह पर हो रहे कब्जे
लोगों का मानना है कि नहरों पर कब्जे विभागीय कर्मचारियों की मदद से किए जा रहे हैं। कर्मचारी ही कब्जा करने वाले के नाम पर लाखों रुपया ऐंठ रहे हैं। शिकायत होने पर टाल देते हैं। सेटिंग गेटिंग करके रातों रात भवन का निर्माण करा देते हैं। मकान की छत पड़ने के बाद भवन स्वामी का पूरी तरह से कब्जा हो जाता है। शहर से होकर निकली नहरों में पूरी तरह से कब्जा हो गया है।
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नहरों से अवैध कब्जा हटवाने और निर्माण कराने वालों से सर्किल रेट पर वसूली करके मालिकाना हक दिए जाने के दिशा निर्देश मिले हैं। शहर से होकर निकली ऐशबाग, रायबरेली रजबहे पर मकान बन गए हैं। सहायक अभियंता सौरभ चौधरी को नहरों की पैमाइश कराकर कब्जा करने वालों के नाम मांगे गए है। नाम की लिस्ट मिलने के बाद उसे उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। आगे दिशा निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।-सिद्धार्थ कुमार, नोडल अधिकारी सिंचाई विभाग