{"_id":"60c79c358ebc3e87100c3206","slug":"80-thousand-population-is-not-getting-electricity-supply-properly-raibaraily-news-lko582467558","type":"story","status":"publish","title_hn":"80 हजार आबादी को बिजली की आपूर्ति ठीक से नहीं मिल रही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
80 हजार आबादी को बिजली की आपूर्ति ठीक से नहीं मिल रही
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। विद्युत उपकेंद्र उत्तरपारा को ट्रांसमिशन डलमऊ से जोड़ने के लिए बनाई गई 33 केवी लाइन एक दिन भी नहीं चल पाई। यह हालत तब है जब इस लाइन के निर्माण में 1.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
पहले से बनी लाइन में फॉल्ट होने के कारण आए दिन आपूर्ति बंद रहती है। इससे करीब 80 हजार आबादी को बिजली संकट से जूझना पड़ता है। पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं की निरंकुशता के कारण उपभोक्ता बेहाल हैं।
विद्युत उपकेंद्र उत्तरपारा को गदागंज विद्युत उपकेंद्र को आने वाली 33 केवी लाइन से आपूर्ति मिलती है। इस लाइन के तार जर्जर हो गए हैं। जगह-जगह तार पर पेड़ की डालियां आ जाने के कारण अक्सर फॉल्ट ही बना रहता है। इसके अलावा गर्मियों में उपभोक्ताओं को लो-वोलटेज की समस्या से भी जूझना पड़ता है।
विज्ञापन
इस समस्या को देखते हुए 1.40 लाख रुपये की लागत से उत्तरपारा विद्युत उपकेंद्र को ट्रांसमिशन डलमऊ से जोड़ने के लिए नई लाइन का निर्माण कराया गया। लाइन का निर्माण पूरा तो हो गया लेकिन चार्ज करने के बाद ही लाइन धड़ाम हो गई। घटिया इंसुलेटर पंक्चर हो गए। कई जगह पोल भी झुक गए। यही वजह है कि अभी तक इस लाइन से बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है।
इस लाइन का निर्माण सेकेंड्री वर्क डिवीजन लखनऊ ने कराया है। लाइन के निर्माण में इतनी मनमानी हुई है कि देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ज्यादा बिजली के खंभों की ग्राउंटिंग तक नहीं कराई गई है। इस वजह से पोल झुक गए हैं।
लाइनों के ऊपर पेड़ की डालियां पसर गईं हैं। ट्री-कटिंग भी नहीं कराई गई है। सेकेंड्री वर्क डिवीजन के अभियंता और काम कराने वाले ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया सामग्री लगाई गई है। इंसुलेटर घटिया क्वालिटी के होने के कारण पंक्चर हो रहे हैं। यह देखने वाला कोई नहीं है।
सेकेंड्री वर्क डिवीजन लखनऊ के अवर अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि लाइन चालू हो चुकी है। हवा और बारिश की वजह से लाइन में फॉल्ट आया है। ट्री-कटिंग कराने के बाद पूरी लाइन चालू कराई जाएगी। कुछ बिजली खंभों की ग्राउंटिंग शेष है। उसे भी पूरा कराया जाएगा।
विज्ञापन
पहले से बनी लाइन में फॉल्ट होने के कारण आए दिन आपूर्ति बंद रहती है। इससे करीब 80 हजार आबादी को बिजली संकट से जूझना पड़ता है। पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं की निरंकुशता के कारण उपभोक्ता बेहाल हैं।
विज्ञापन
विद्युत उपकेंद्र उत्तरपारा को गदागंज विद्युत उपकेंद्र को आने वाली 33 केवी लाइन से आपूर्ति मिलती है। इस लाइन के तार जर्जर हो गए हैं। जगह-जगह तार पर पेड़ की डालियां आ जाने के कारण अक्सर फॉल्ट ही बना रहता है। इसके अलावा गर्मियों में उपभोक्ताओं को लो-वोलटेज की समस्या से भी जूझना पड़ता है।
विज्ञापन
इस समस्या को देखते हुए 1.40 लाख रुपये की लागत से उत्तरपारा विद्युत उपकेंद्र को ट्रांसमिशन डलमऊ से जोड़ने के लिए नई लाइन का निर्माण कराया गया। लाइन का निर्माण पूरा तो हो गया लेकिन चार्ज करने के बाद ही लाइन धड़ाम हो गई। घटिया इंसुलेटर पंक्चर हो गए। कई जगह पोल भी झुक गए। यही वजह है कि अभी तक इस लाइन से बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है।
इस लाइन का निर्माण सेकेंड्री वर्क डिवीजन लखनऊ ने कराया है। लाइन के निर्माण में इतनी मनमानी हुई है कि देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ज्यादा बिजली के खंभों की ग्राउंटिंग तक नहीं कराई गई है। इस वजह से पोल झुक गए हैं।
लाइनों के ऊपर पेड़ की डालियां पसर गईं हैं। ट्री-कटिंग भी नहीं कराई गई है। सेकेंड्री वर्क डिवीजन के अभियंता और काम कराने वाले ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया सामग्री लगाई गई है। इंसुलेटर घटिया क्वालिटी के होने के कारण पंक्चर हो रहे हैं। यह देखने वाला कोई नहीं है।
सेकेंड्री वर्क डिवीजन लखनऊ के अवर अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि लाइन चालू हो चुकी है। हवा और बारिश की वजह से लाइन में फॉल्ट आया है। ट्री-कटिंग कराने के बाद पूरी लाइन चालू कराई जाएगी। कुछ बिजली खंभों की ग्राउंटिंग शेष है। उसे भी पूरा कराया जाएगा।