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एटीएस की गिरफ्त में 64 घंटे रह, छूटा तो लगा दूसरा जन्म हो गया
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गांव में अपने परिवार के साथ जमील फुल शर्ट पहने।
- फोटो : RAIBARAILY
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ऊंचाहार (रायबरेली)। अकोढ़िया में घर की देहरी पर पहुंचते ही जमील की आंखें खुशी से भर आईं। घर पहुंचते ही जीभर कर परिवार के लोगों को देखा। घरवाले भी पिछले तीन दिनों से अपने बेटे की सकुशल वापसी के लिए अल्लाह से मन्नतें कर रहे थे।
शुक्रवार को उनकी दुआ कुबूल हो गई। गांव के गलियारे पर जैसे ही जमील दिखा लोगों ने दौड़कर उसे गले लगा लिया। करीब 64 घंटे तक एटीएस की गिरफ्त में रहने के बाद बेगुनाह साबित होने पर जमील भी खुश था। गांव के लोग भी उसके घर पहुंचे और हाल-चाल पूछा लेकिन अभी तक मूलचंद्र उर्फ लाला के घर वापस न आने से यह खुशी कुछ फीकी सी दिखी।
कोतवाली क्षेत्र के अकोढ़िया गांव से एटीएस ने संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में मूलचंद्र व जमील को उठाया था। जमील ने बताया कि एटीएस ने 64 घंटे तक अपनी गिरफ्त में रखा।
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इस दौरान उसे 44 घंटे तक लॉकअप में रखा गया। पूछताछ के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। गांव के ही लाला से मुलाकात भी नहीं कराई। सिर्फ उसकी पहचान की जानकारी ली। इस दौरान युवक सिर्फ खुदा से दुआ करता रहा। जमील ने बताया कि ये तीन दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं थे।
बताया गया कि एटीएस ने मंगलवार सुबह सात बजे घर से उठाया और कोतवाली ले गए। दस मिनट रुकने के बाद एक रेस्टोरेंट में चाय व पकौड़ी खिलाई और सीधे लखनऊ पहुंचे। रास्ते में कोई पूछताछ नहीं की।
लखनऊ में तीन घंटे एक ऑफिस में बैठाए रखा। दिन में करीब एक बजे तीन वाहनों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए। बुधवार सुबह तीन बजे दिल्ली पहुंचे और उसे लॉकअप में डाल दिया गया। उसकी मानें तो उसे 44 घंटे लॉकअप में रखा गया। इस दौरान उसे दो बार खाना दिया जाता था और बुधवार व गुरुवार आधी रात लॉकअप में रहने के दौरान सिर्फ 15 मिनट के लिए बाहर निकाला गया और फिर अंदर कर दिया गया।
बताया कि पूरे घटनाक्रम में उससे पूछताछ के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। उसने बताया कि सिर्फ गांव से पकड़े गए दूसरे युवक मूलचंद्र उर्फ साजू उर्फ लाला से जान पहचान की ही बात पूछी गई। गुरुवार रात लगभग 11:30 बजे उसे रिहा किया गया। उसे प्रतापगढ़ के महेशगंज से पकड़े गए इंतियाज उर्फ कल्लू को रिहा करने के बाद लाने गए परिवारवालों के सुपुर्द कर दिया गया। उनके निजी वाहन से वह मानिकपुर पहुंचा और वहां से ऑटो से गांव पहुंचा। घर पहुंचा तो लगा आज दूसरा जन्म हुआ है।
प्रधान शिवमूरत तिवारी ने बताया कि जमील के निर्दोष साबित होने से खुशी है। गांव में लोगों में भी खुशी का माहौल है। हालांकि अभी लाला के बारे में कोई खबर नहीं मिली है।
साजू की पत्नी को उसके आने का इंतजार
मूलचंद्र उर्फ साजू की पत्नी सुधा श्रीवास्तव को अपने पति के आने का इंतजार है। जमील के पहुंचने की खबर सुनकर वह उसके घर पहुंची और पति के बारे में पूछा, लेकिन जमील की मूलचंद से मुलाकात न होने की बात सुनकर वह मायूस हो गई। पूर्व प्रधान फूलचंद वर्मा के फोन पर दिल्ली से कॉल आई थी, जिसमें उसे दिल्ली आने को कहा गया है, लेकिन मामले की वजह से लोग उससे बात भी नहीं करते हैं।
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शुक्रवार को उनकी दुआ कुबूल हो गई। गांव के गलियारे पर जैसे ही जमील दिखा लोगों ने दौड़कर उसे गले लगा लिया। करीब 64 घंटे तक एटीएस की गिरफ्त में रहने के बाद बेगुनाह साबित होने पर जमील भी खुश था। गांव के लोग भी उसके घर पहुंचे और हाल-चाल पूछा लेकिन अभी तक मूलचंद्र उर्फ लाला के घर वापस न आने से यह खुशी कुछ फीकी सी दिखी।
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कोतवाली क्षेत्र के अकोढ़िया गांव से एटीएस ने संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में मूलचंद्र व जमील को उठाया था। जमील ने बताया कि एटीएस ने 64 घंटे तक अपनी गिरफ्त में रखा।
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इस दौरान उसे 44 घंटे तक लॉकअप में रखा गया। पूछताछ के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। गांव के ही लाला से मुलाकात भी नहीं कराई। सिर्फ उसकी पहचान की जानकारी ली। इस दौरान युवक सिर्फ खुदा से दुआ करता रहा। जमील ने बताया कि ये तीन दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं थे।
बताया गया कि एटीएस ने मंगलवार सुबह सात बजे घर से उठाया और कोतवाली ले गए। दस मिनट रुकने के बाद एक रेस्टोरेंट में चाय व पकौड़ी खिलाई और सीधे लखनऊ पहुंचे। रास्ते में कोई पूछताछ नहीं की।
लखनऊ में तीन घंटे एक ऑफिस में बैठाए रखा। दिन में करीब एक बजे तीन वाहनों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए। बुधवार सुबह तीन बजे दिल्ली पहुंचे और उसे लॉकअप में डाल दिया गया। उसकी मानें तो उसे 44 घंटे लॉकअप में रखा गया। इस दौरान उसे दो बार खाना दिया जाता था और बुधवार व गुरुवार आधी रात लॉकअप में रहने के दौरान सिर्फ 15 मिनट के लिए बाहर निकाला गया और फिर अंदर कर दिया गया।
बताया कि पूरे घटनाक्रम में उससे पूछताछ के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। उसने बताया कि सिर्फ गांव से पकड़े गए दूसरे युवक मूलचंद्र उर्फ साजू उर्फ लाला से जान पहचान की ही बात पूछी गई। गुरुवार रात लगभग 11:30 बजे उसे रिहा किया गया। उसे प्रतापगढ़ के महेशगंज से पकड़े गए इंतियाज उर्फ कल्लू को रिहा करने के बाद लाने गए परिवारवालों के सुपुर्द कर दिया गया। उनके निजी वाहन से वह मानिकपुर पहुंचा और वहां से ऑटो से गांव पहुंचा। घर पहुंचा तो लगा आज दूसरा जन्म हुआ है।
प्रधान शिवमूरत तिवारी ने बताया कि जमील के निर्दोष साबित होने से खुशी है। गांव में लोगों में भी खुशी का माहौल है। हालांकि अभी लाला के बारे में कोई खबर नहीं मिली है।
साजू की पत्नी को उसके आने का इंतजार
मूलचंद्र उर्फ साजू की पत्नी सुधा श्रीवास्तव को अपने पति के आने का इंतजार है। जमील के पहुंचने की खबर सुनकर वह उसके घर पहुंची और पति के बारे में पूछा, लेकिन जमील की मूलचंद से मुलाकात न होने की बात सुनकर वह मायूस हो गई। पूर्व प्रधान फूलचंद वर्मा के फोन पर दिल्ली से कॉल आई थी, जिसमें उसे दिल्ली आने को कहा गया है, लेकिन मामले की वजह से लोग उससे बात भी नहीं करते हैं।