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श्रमिकों की चीखों से गूंज उठा जिला अस्पताल
Updated Thu, 02 Nov 2017 02:30 AM IST
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श्रमिकों की चीखों से गूंज उठा जिला अस्पताल
रायबरेली। अरे अम्मा-बप्पा, मरजइब। बचाए लियो। यह काय होईगै। एनटीपीसी ऊंचाहार में बुधवार को हुए हादसे के बाद जिला अस्पताल में कुछ ऐसी ही श्रमिकों की चीखें सुनाई पड़ रही थी। एक के बाद एक श्रमिक एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाए जा रहे थे। चिकित्सकों की पूरी टीम बुलाई गई थी। कोई बेड पर चादर बिछा रहा था, तो कोई झुलसे श्रमिकों को स्ट्रेचर पर लादकर भर्ती करने ले जा रहा था। वहां मौजूद जिसने भी घायलों को देखा, उसका दिल कांप उठा। जुबां पर एक ही बात आती कि अरे यह क्या हो गया। दर्दनाक हादसा है।
एनपीटीसी ऊंचाहार में हुए हादसे के बाद झुलसे श्रमिकों को एक के बाद एक करके जिला अस्पताल पहुंचाया जा रहा था। हादसे की सूचना मिलने पर अस्पताल के समस्त चिकित्सकों और कर्मियों को बुला लिया गया। जैसे ही झुलसे श्रमिक अस्पताल पहुंचते, वे चीख पड़ते थे। हर कोई 80 फीसदी से ज्यादा झुलसा था। यह देख वहां पर मौजूद लोग सन्न रह जाते। अस्पताल में मौजूद चिकित्सक नाम पता लिखते और श्रमिकों को वार्ड भेज देते। हालत गंभीर होने पर लखनऊ रेफर कर देते। जहां पर जिला अस्पताल में सन्नाटा पसरा था, वहां इस घटना के बाद अफरातफरी मच गई। सीएमओ डॉ. डीके सिंह, सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव के अलावा डॉ. धर्मेद्र सिंह, डॉ. जय सिंह, डॉ. सलीम, डॉ. बीरबल, डॉ. टी.शम्सी, डॉ. अल्ताफ हुसैन, फार्मासिस्ट राजेश सिंह, संदीप आदि स्वास्स्थ्य कर्मी झुलसे श्रमिकों का इलाज करने में जुटे थे। सीएमओ ने बताया कि श्रमिकों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए 40 से ज्यादा एंबुलेंस गाड़ियां लगाई गई हैं।
एनटीपीसी अस्पताल मेें इलाज में भी ढिलाई
रोहनियां (रायबरेली)। हादसे के बाद एनटीपीसी अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों की भी कलई खुल गई। झुलसे श्रमिकों को अस्पताल भेजा जाता, लेकिन वहां पर स्टाफ नदारद था। सूचना पर स्टाफ पर पहुंचा, लेकिन श्रमिकों के इलाज में लापरवाही बरत रहा था। श्रमिकों का इलाज करने के बजाय उसे जिला अस्पताल या फिर सीएचसी रेफर कर रहा था। इससे लोगों में नाराजगी थी।
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आधा घंटे बाद मौके पर पहुंचे अफसर
एनपीटीसी में हादसे के बावजूद आधा घंटे बाद अफसर मौके पर पहुंचे। इससे श्रमिकों में नाराजगी रही। बताया जाता है कि एनपीटीसी में हादसा हो गया। सूचना के बावजूद अफसरों की ओर से घटनास्थल पहुंचने में तेजी नहीं दिखाई गई। इसके बाद बचाव राहत कार्य शुरू हो सका। एंबुलेंस की गाड़ियां देर से पहुंच सकी।
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रायबरेली। अरे अम्मा-बप्पा, मरजइब। बचाए लियो। यह काय होईगै। एनटीपीसी ऊंचाहार में बुधवार को हुए हादसे के बाद जिला अस्पताल में कुछ ऐसी ही श्रमिकों की चीखें सुनाई पड़ रही थी। एक के बाद एक श्रमिक एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाए जा रहे थे। चिकित्सकों की पूरी टीम बुलाई गई थी। कोई बेड पर चादर बिछा रहा था, तो कोई झुलसे श्रमिकों को स्ट्रेचर पर लादकर भर्ती करने ले जा रहा था। वहां मौजूद जिसने भी घायलों को देखा, उसका दिल कांप उठा। जुबां पर एक ही बात आती कि अरे यह क्या हो गया। दर्दनाक हादसा है।
एनपीटीसी ऊंचाहार में हुए हादसे के बाद झुलसे श्रमिकों को एक के बाद एक करके जिला अस्पताल पहुंचाया जा रहा था। हादसे की सूचना मिलने पर अस्पताल के समस्त चिकित्सकों और कर्मियों को बुला लिया गया। जैसे ही झुलसे श्रमिक अस्पताल पहुंचते, वे चीख पड़ते थे। हर कोई 80 फीसदी से ज्यादा झुलसा था। यह देख वहां पर मौजूद लोग सन्न रह जाते। अस्पताल में मौजूद चिकित्सक नाम पता लिखते और श्रमिकों को वार्ड भेज देते। हालत गंभीर होने पर लखनऊ रेफर कर देते। जहां पर जिला अस्पताल में सन्नाटा पसरा था, वहां इस घटना के बाद अफरातफरी मच गई। सीएमओ डॉ. डीके सिंह, सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव के अलावा डॉ. धर्मेद्र सिंह, डॉ. जय सिंह, डॉ. सलीम, डॉ. बीरबल, डॉ. टी.शम्सी, डॉ. अल्ताफ हुसैन, फार्मासिस्ट राजेश सिंह, संदीप आदि स्वास्स्थ्य कर्मी झुलसे श्रमिकों का इलाज करने में जुटे थे। सीएमओ ने बताया कि श्रमिकों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए 40 से ज्यादा एंबुलेंस गाड़ियां लगाई गई हैं।
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एनटीपीसी अस्पताल मेें इलाज में भी ढिलाई
रोहनियां (रायबरेली)। हादसे के बाद एनटीपीसी अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों की भी कलई खुल गई। झुलसे श्रमिकों को अस्पताल भेजा जाता, लेकिन वहां पर स्टाफ नदारद था। सूचना पर स्टाफ पर पहुंचा, लेकिन श्रमिकों के इलाज में लापरवाही बरत रहा था। श्रमिकों का इलाज करने के बजाय उसे जिला अस्पताल या फिर सीएचसी रेफर कर रहा था। इससे लोगों में नाराजगी थी।
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आधा घंटे बाद मौके पर पहुंचे अफसर
एनपीटीसी में हादसे के बावजूद आधा घंटे बाद अफसर मौके पर पहुंचे। इससे श्रमिकों में नाराजगी रही। बताया जाता है कि एनपीटीसी में हादसा हो गया। सूचना के बावजूद अफसरों की ओर से घटनास्थल पहुंचने में तेजी नहीं दिखाई गई। इसके बाद बचाव राहत कार्य शुरू हो सका। एंबुलेंस की गाड़ियां देर से पहुंच सकी।