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पावर कॉर्पोरेशन के अफसरों की लापरवाही का सच

Wed, 20 Sep 2017 12:03 AM IST
Updated Wed, 20 Sep 2017 12:03 AM IST
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पावर कॉर्पोरेशन के अफसरों की लापरवाही का सच
चोरी की बिजली से रोशन हो रहे तीन लाख घर
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रायबरेली। एक तरफ जिले में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या से उपभोक्ता बेहाल हैं। बावजूद इसके पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी बेपरवाह हैं। उनकी लापरवाही का ही नतीजा है कि चोरी की बिजली से तीन लाख घर रोशन हो रहे हैं। वहीं बिजली चोरी रोकने के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। खास बात ये है कि कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां पर अफसर कार्रवाई करने के लिए कभी पहुंचते ही नहीं।
सरकार के अभियान और अपील के बाद भी जिले में बिजली चोरी नहीं रुक रही है। पावर कॉर्पोरेशन के रिकॉर्ड में जिले में हाउस होल्ड की संख्या करीब आठ लाख है। जबकि विद्युत कनेक्शन करीब पांच लाख उपभोक्ताओं ने ही लिया है। शायद ही ऐसा कोई घर हो जहां पर बिजली का बल्ब नहीं जलता। इससे साफ जाहिर है कि तीन लाख घरों में चोरी की बिजली जल रही है। बिजली चोरी रोकने में अफसर नाकाम साबित हो रहे हैं। इसका खामियाजा उन उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है, जो नियमित बिजली का बिल जमा करते हैं। छह महीने में तीनों डिवीजन के अभियंताओं ने 44 लोगों को बिजली चोरी करते पकड़ा है और इनसे चार लाख 68 हजार रुपये शमन शुल्क सरकारी खजाने में जमा कराया गया है। लोगों का मानना है यदि बिजली चोरी पर सख्ती की जाए तो विद्युत आपूर्ति कुछ हद तक सुधर सकती है।
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कहां कितने पकड़े गए
वितरण खंड प्रथम 08
वितरण खंड द्वितीय 35
वितरण खंड तृतीय 01

कम नहीं हो रहा लाइन लॉस
जिले में करीब 42 विद्युत उपकेंद्र हैं। प्रदेश सरकार प्रत्येक उपकेंद्र में लाइनलॉस 15 फीसदी करने का लगातार प्रयास कर रही है। लेकिन जिले में शायद ही कोई ऐसा उपकेंद्र हो जहां 40 से 50 फीसदी लाइन लॉस न हो। इससे साफ जाहिर है कि जिले में जितनी बिजली मिल रही है, उसमें करीब 40 फीसदी बिजली चोरी हो रही है।
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अभियान चलाकर की जाएगी छापेमारी
मैं अभी कुछ दिनों पहले ही आया हूं। जानकारी के अनुसार जितने मकान हैं उतने कनेक्शन नहीं हैं। बिजली चोरी पकड़ने के लिए जल्द टीमें गठित कर छापेमारी अभियान चलाया जाएगा। छह महीने में बिजली चोरी के मामले कम पकड़े गए हैं। बिजली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। - अशोक कुमार दोहरे, नोडल अधिकारी पावर कॉर्पोरेशन
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