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500 गांवों में मनरेगा ठप
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jan 2016 11:58 PM IST
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जिले में नई ग्राम पंचायतों के गठन के बाद विकास का पहिया दौड़ नहीं पा रहा है। गांव में श्रमिकों को रोजगार देने में मनरेगा दम नहीं भर पा रही है।
करीब 500 गांवों में मनरेगा का काम ठप है। ऐसे में डेढ़ लाख जॉब कार्ड धारक काम की तलाश में भटक रहे हैं। कहीं प्रस्ताव व इस्टीमेट पास न होने तो कहीं ग्राम पंचायतों का गठन न हो पाने के कारण काम ठप है।
153 नई ग्राम पंचायतों में किसी भी योजना से काम शुरू नहीं है। जबकि 144 ऐसी ग्राम पंचायतें जहां कोरम पूरा न होने के कारण गठन न होने से काम ठप है।
200 से अधिक गांवों में कर्मचारियों की मनमानी के कारण मनरेगा शुरू नहीं हो पा रही है। पंचायत चुनाव के कारण गांवों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप रहा।
अब चुनाव हो गया और ग्राम पंचायतों के गठन का काम भी पूरा हो गया, लेकिन विकास में रफ्तार नहीं आ पा रही है। खासकर मनरेग दम नहीं भर पा रही है।
जिले में मनरेगा में दो लाख 75 हजार 87 लोगों ने जॉब कार्ड बनवाया है। इन्हें काम मिलना चाहिए, लेकिन डेढ़ लाख से अधिक श्रमिकों को काम मात्र इसलिए नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कार्य आरंभ नहीं हो सका है।
राही ब्लॉक क्षेत्र के सुलखियापुर, सूरजकुंडा, खागीपुर सड़वा, दरियापुर, जगतपुर ब्लॉक के उडंवा, रोझइया गोकुलपुर, हेवतहा नेवढ़िया, सिद्धौर सहित अन्य ब्लॉकों की करीब 500 ग्राम पंचायतों में मनरेगा प्रभावित है।
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चुनाव के बाद से मनरेगा में एक भी श्रमिक को काम नहीं मिला है। इससे श्रमिक रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। कर्मचारियों की मनमानी के कारण श्रमिकों को परेशान होना पड़ रहा है।
मनरेगा में कार्य का इस्टीमेट पास होने के बाद ही काम शुरू कराया जा सकता है, लेकिन ग्राम पंचायत अधिकारी और तकनीकी सहायकों की लापरवाही के कारण प्रस्ताव व इस्टीमेट पास नहीं हो पा रहे हैं।
खासकर नई ग्राम पंचायतों में बड़ी समस्या है। ग्राम प्रधान इस्टीमेट पास कराने के लिए ब्लॉकों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
मनरेगा में अधिक से अधिक जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन रोजगार देने के आदेश है। लेकिन जिले में मात्र 688 श्रमिकों को ही चालू वित्तीय वर्ष में रोजगार मिल सका है।
इसमें रोहनियां ब्लॉक में मात्र पांच श्रमिकों को ही 100 दिन रोजगार मिल सका है। सबसे अधिक बछरावां में 130 श्रमिकों को 100 दिन काम मिला है।
इसके अलावा डीह में 52 व डलमऊ में 80 श्रमिकों को सौ दिन रोजगार मिल सका है। शेष ब्लॉकों में इससे कम काम दिया गया है।
उपायुक्त मनरेगा एसके उपाध्याय का कहना है कि ग्राम पंचायतों के गठन के बाद गांवों में मनरेगा के कार्य में तेजी लाई जा रही है। नई ग्राम पंचायतों के दिक्कतें आ रही है।
हालांकि बीडीओ और एपीओ को शत प्रतिशत ग्राम पंचायतों में मनरेगा शुरू कराने के आदेश दिए गए हैं। अगले सप्ताह में प्रगति अच्छी हो जाएगी।
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करीब 500 गांवों में मनरेगा का काम ठप है। ऐसे में डेढ़ लाख जॉब कार्ड धारक काम की तलाश में भटक रहे हैं। कहीं प्रस्ताव व इस्टीमेट पास न होने तो कहीं ग्राम पंचायतों का गठन न हो पाने के कारण काम ठप है।
153 नई ग्राम पंचायतों में किसी भी योजना से काम शुरू नहीं है। जबकि 144 ऐसी ग्राम पंचायतें जहां कोरम पूरा न होने के कारण गठन न होने से काम ठप है।
200 से अधिक गांवों में कर्मचारियों की मनमानी के कारण मनरेगा शुरू नहीं हो पा रही है। पंचायत चुनाव के कारण गांवों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप रहा।
अब चुनाव हो गया और ग्राम पंचायतों के गठन का काम भी पूरा हो गया, लेकिन विकास में रफ्तार नहीं आ पा रही है। खासकर मनरेग दम नहीं भर पा रही है।
जिले में मनरेगा में दो लाख 75 हजार 87 लोगों ने जॉब कार्ड बनवाया है। इन्हें काम मिलना चाहिए, लेकिन डेढ़ लाख से अधिक श्रमिकों को काम मात्र इसलिए नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कार्य आरंभ नहीं हो सका है।
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राही ब्लॉक क्षेत्र के सुलखियापुर, सूरजकुंडा, खागीपुर सड़वा, दरियापुर, जगतपुर ब्लॉक के उडंवा, रोझइया गोकुलपुर, हेवतहा नेवढ़िया, सिद्धौर सहित अन्य ब्लॉकों की करीब 500 ग्राम पंचायतों में मनरेगा प्रभावित है।
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चुनाव के बाद से मनरेगा में एक भी श्रमिक को काम नहीं मिला है। इससे श्रमिक रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। कर्मचारियों की मनमानी के कारण श्रमिकों को परेशान होना पड़ रहा है।
मनरेगा में कार्य का इस्टीमेट पास होने के बाद ही काम शुरू कराया जा सकता है, लेकिन ग्राम पंचायत अधिकारी और तकनीकी सहायकों की लापरवाही के कारण प्रस्ताव व इस्टीमेट पास नहीं हो पा रहे हैं।
खासकर नई ग्राम पंचायतों में बड़ी समस्या है। ग्राम प्रधान इस्टीमेट पास कराने के लिए ब्लॉकों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
मनरेगा में अधिक से अधिक जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन रोजगार देने के आदेश है। लेकिन जिले में मात्र 688 श्रमिकों को ही चालू वित्तीय वर्ष में रोजगार मिल सका है।
इसमें रोहनियां ब्लॉक में मात्र पांच श्रमिकों को ही 100 दिन रोजगार मिल सका है। सबसे अधिक बछरावां में 130 श्रमिकों को 100 दिन काम मिला है।
इसके अलावा डीह में 52 व डलमऊ में 80 श्रमिकों को सौ दिन रोजगार मिल सका है। शेष ब्लॉकों में इससे कम काम दिया गया है।
उपायुक्त मनरेगा एसके उपाध्याय का कहना है कि ग्राम पंचायतों के गठन के बाद गांवों में मनरेगा के कार्य में तेजी लाई जा रही है। नई ग्राम पंचायतों के दिक्कतें आ रही है।
हालांकि बीडीओ और एपीओ को शत प्रतिशत ग्राम पंचायतों में मनरेगा शुरू कराने के आदेश दिए गए हैं। अगले सप्ताह में प्रगति अच्छी हो जाएगी।