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जिले में 50 करोड़ का कारोबार ठप
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:57 AM IST
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रायबरेली में बुधवार काे पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के बाजारों पर भी 1000 -500 का नोट बंद होने से व्यापक असर पड़ा। अनुमान है कि अकेले बुधवार को 50 करोड़ रुपये का कारोबार ठप रहा। ग्राहक के न आने के कारण सभी प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। शोरूम और दुकानें शाम होने से पहले ही बंद हो गईं।
500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए जाने के चलते बुधवार को लोग हलाकान रहे। दुकानदार बोहनी तक को तरस गए। एटीेएम के शटर गिरे रहे तो बैंकों और डाकघरों में भी रुपयों के लेनदेन का कामकाज नहीं हो सका। बैंकों के बाहर ताला लटका रहा और अंदर बैठकर अधिकारियों और कर्मचारियों ने कामकाज निपटाया।
लोग रुपया निकालने जाते, लेकिन बैंक में लटका ताला देख वापस हो जाते। हाथी पार्क स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा में बाहर से ताला बंद था। अंदर अधिकारी, कर्मचारी बैठकर अन्य जरूरी काम कर रहे थे। बैंक के बाहर लगे एटीएम का शटर डाउन था। दिनेश कुमार, अर्जुन गुप्ता, राहुल वैश्य रुपया निकालने पहुंचे, लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
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इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक समेत अन्य बैंकों में बाहर से ताला लटका था। एटीएम से शटर गिरे थे। प्रधान डाकघर, उपडाकघर व शाखा डाक घरों में पैसों का लेनदेन नहीं किया गया। बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की संख्या कम दिखी।
जो लोग पहुंचे, उन्हें टिकट पाने में परेशानी झेलनी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद पुराना नोट लेकर उन्हें टिकट थमाया गया। हालांकि खानपान के लिए वेंडरों ने यात्रियों से फुटकर रुपये लिए। वहीं बस स्टेशन पर भी मुसाफिरों की तादाद कम दिखी।
यात्री मो. इस्लाम, सूरज यादव, अरविंद पाल, आदर्श त्रिवेदी का कहना था कि उन्हें लखनऊ जाना था। 500 रुपये के नोट नहीं लिए गए। बाद में किसी तरह छुट्टे रुपये की व्यवस्था करके टिकट दिया गया
पुराने नोट बंद होने के चलते सुबह शहर और देहात क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर डीजल व पेट्रोल भराने को लेकर लोगों में मारामारी दिखी। पेट्रोल पंप पर खुले पैसे वापस करने का चक्कर ही नहीं था। पंप पर ऑपरेटरों का कहना था कि जितने का नोट है पूरे का पेट्रोल लेना होगा।
कम या खुले का कोई चक्कर नहीं। ज्यादातर पंपों पर सूचना चस्पा की गई थी। उसमें लिखा था कि 500 व 1000 रुपये के नोट देने पर पूरे पैसे का पेट्रोल या डीजल दिया जाएगा। इसके अलावा फुटकर रुपया देने पर भी ईंधन भरा जा रहा था। यही हाल कमोवेश जिले के 200 पेट्रोल पंपों का था।
वाहन चालक ईंधन डलाने के लिए लाइन में लग रहे थे। देहात के ग्राहकों में पेट्रोल लेने में होड़ दिख रही थी। कचहरी रोड, सिविल लाइंस, मुंशीगंज, रतापुर के पेट्रोल पंपों पर भी लोगों की लाइनें लगी रही।
पुराने नोट बंद से रोगियों और तीमारदारों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। जिला अस्पताल गेट पर दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। लगभग हर मेडिकल स्टोर पर लोगों की भीड़ दिखी, लेकिन सभी परेशान थे।
वजह रुपयों के छुट्टा न होने से दवाएं मिलने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में कुछ संचालकों ने पर्ची लिखकर रोगियों को दिया और बाद में रुपया लेेने की बात कही। यही नहीं कुछ ऐसे मेडिकल स्टोर संचालक रहे, जिन्होंने 500 और एक हजार रुपये का नोट लेकर भी दवाएं दी।
हरचंदपुर के उमेश कुमार के बेटे की की तबियत खराब थी, लेकिन उसके पास 500 रुपये का नोट था। प्राइवेट सीटी स्कैन सेंटर ने सीटी स्कैन करने से मना कर दिया तो वह जिला अस्पताल पहुंचा। वहां पहुंचने पर 500 का नोट लेकर सिटी स्कैन किया गया।
शहर और देहात क्षेत्रों के प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानों पर लोगों की संख्या कम दिखी। शहर के कैपरगंज बाजार, किराना बाजार, सब्जी मंडी, विशंभर मार्केट में दुकानदार बैठे रहे। सराफा कारोबार आशु गुप्ता का कहना था कि कैपरगंज सोने चांदी की दुकानें खुली तो हैं, लेकिन ग्राहक नहीं आ रहे हैं।
ऐसा करेंसी न होने के कारण हो रहा है। अन्य दुकानदार विवेक श्रीवास्तव, मोनू गुप्ता ने कहा कि सरकार के निर्णय से दुकानदार, ग्राहक सभी परेशान हैं। आलोक कुमार व सुनील ने कहा कि 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने व नए मिलने में समय लगेगा, तब तक कारोबार प्रभावित रहेगा।
डलमऊ क्षेत्र के घुरवारा निवासी कमलेश शुक्ला की बेटी वंदना की शादी 17 नवंबर को है। बेटी की शादी के लिए जरूरी सामान खरीदना है। इसके लिए रुपयों का इंतजाम किया था, लेकिन 500 और एक हजार रुपये के नोट चलना बंद हो गए हैं।
एटीएम और बैंक से दो-चार हजार रुपये देने की बात कही गई है। ऐसे में शादी कैसे होगी, इससे परेशान हूं। कमलेश ही नहीं, बल्कि ऐसे कई परिवार हैं, जिनके घरों में शादी है। पुराने नोट बंद हो गए हैं। इससे उनकी रातों की नींद हराम हो गई है।
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500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए जाने के चलते बुधवार को लोग हलाकान रहे। दुकानदार बोहनी तक को तरस गए। एटीेएम के शटर गिरे रहे तो बैंकों और डाकघरों में भी रुपयों के लेनदेन का कामकाज नहीं हो सका। बैंकों के बाहर ताला लटका रहा और अंदर बैठकर अधिकारियों और कर्मचारियों ने कामकाज निपटाया।
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लोग रुपया निकालने जाते, लेकिन बैंक में लटका ताला देख वापस हो जाते। हाथी पार्क स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा में बाहर से ताला बंद था। अंदर अधिकारी, कर्मचारी बैठकर अन्य जरूरी काम कर रहे थे। बैंक के बाहर लगे एटीएम का शटर डाउन था। दिनेश कुमार, अर्जुन गुप्ता, राहुल वैश्य रुपया निकालने पहुंचे, लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
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इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक समेत अन्य बैंकों में बाहर से ताला लटका था। एटीएम से शटर गिरे थे। प्रधान डाकघर, उपडाकघर व शाखा डाक घरों में पैसों का लेनदेन नहीं किया गया। बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की संख्या कम दिखी।
जो लोग पहुंचे, उन्हें टिकट पाने में परेशानी झेलनी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद पुराना नोट लेकर उन्हें टिकट थमाया गया। हालांकि खानपान के लिए वेंडरों ने यात्रियों से फुटकर रुपये लिए। वहीं बस स्टेशन पर भी मुसाफिरों की तादाद कम दिखी।
यात्री मो. इस्लाम, सूरज यादव, अरविंद पाल, आदर्श त्रिवेदी का कहना था कि उन्हें लखनऊ जाना था। 500 रुपये के नोट नहीं लिए गए। बाद में किसी तरह छुट्टे रुपये की व्यवस्था करके टिकट दिया गया
पुराने नोट बंद होने के चलते सुबह शहर और देहात क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर डीजल व पेट्रोल भराने को लेकर लोगों में मारामारी दिखी। पेट्रोल पंप पर खुले पैसे वापस करने का चक्कर ही नहीं था। पंप पर ऑपरेटरों का कहना था कि जितने का नोट है पूरे का पेट्रोल लेना होगा।
कम या खुले का कोई चक्कर नहीं। ज्यादातर पंपों पर सूचना चस्पा की गई थी। उसमें लिखा था कि 500 व 1000 रुपये के नोट देने पर पूरे पैसे का पेट्रोल या डीजल दिया जाएगा। इसके अलावा फुटकर रुपया देने पर भी ईंधन भरा जा रहा था। यही हाल कमोवेश जिले के 200 पेट्रोल पंपों का था।
वाहन चालक ईंधन डलाने के लिए लाइन में लग रहे थे। देहात के ग्राहकों में पेट्रोल लेने में होड़ दिख रही थी। कचहरी रोड, सिविल लाइंस, मुंशीगंज, रतापुर के पेट्रोल पंपों पर भी लोगों की लाइनें लगी रही।
पुराने नोट बंद से रोगियों और तीमारदारों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। जिला अस्पताल गेट पर दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। लगभग हर मेडिकल स्टोर पर लोगों की भीड़ दिखी, लेकिन सभी परेशान थे।
वजह रुपयों के छुट्टा न होने से दवाएं मिलने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में कुछ संचालकों ने पर्ची लिखकर रोगियों को दिया और बाद में रुपया लेेने की बात कही। यही नहीं कुछ ऐसे मेडिकल स्टोर संचालक रहे, जिन्होंने 500 और एक हजार रुपये का नोट लेकर भी दवाएं दी।
हरचंदपुर के उमेश कुमार के बेटे की की तबियत खराब थी, लेकिन उसके पास 500 रुपये का नोट था। प्राइवेट सीटी स्कैन सेंटर ने सीटी स्कैन करने से मना कर दिया तो वह जिला अस्पताल पहुंचा। वहां पहुंचने पर 500 का नोट लेकर सिटी स्कैन किया गया।
शहर और देहात क्षेत्रों के प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानों पर लोगों की संख्या कम दिखी। शहर के कैपरगंज बाजार, किराना बाजार, सब्जी मंडी, विशंभर मार्केट में दुकानदार बैठे रहे। सराफा कारोबार आशु गुप्ता का कहना था कि कैपरगंज सोने चांदी की दुकानें खुली तो हैं, लेकिन ग्राहक नहीं आ रहे हैं।
ऐसा करेंसी न होने के कारण हो रहा है। अन्य दुकानदार विवेक श्रीवास्तव, मोनू गुप्ता ने कहा कि सरकार के निर्णय से दुकानदार, ग्राहक सभी परेशान हैं। आलोक कुमार व सुनील ने कहा कि 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने व नए मिलने में समय लगेगा, तब तक कारोबार प्रभावित रहेगा।
डलमऊ क्षेत्र के घुरवारा निवासी कमलेश शुक्ला की बेटी वंदना की शादी 17 नवंबर को है। बेटी की शादी के लिए जरूरी सामान खरीदना है। इसके लिए रुपयों का इंतजाम किया था, लेकिन 500 और एक हजार रुपये के नोट चलना बंद हो गए हैं।
एटीएम और बैंक से दो-चार हजार रुपये देने की बात कही गई है। ऐसे में शादी कैसे होगी, इससे परेशान हूं। कमलेश ही नहीं, बल्कि ऐसे कई परिवार हैं, जिनके घरों में शादी है। पुराने नोट बंद हो गए हैं। इससे उनकी रातों की नींद हराम हो गई है।