फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   80 करोड़ के गरीबों के आवासों की जांच करेगी टीएसी

80 करोड़ के गरीबों के आवासों की जांच करेगी टीएसी

Sat, 15 Sep 2018 12:35 AM IST
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:35 AM IST
विज्ञापन
80 करोड़ के गरीबों के आवासों की जांच करेगी टीएसी
रायबरेली। इंट्रीग्रेटेड हाउसिंग एवं स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) से शहरी गरीबों के लिए आवासों के निर्माण में प्रथम दृष्टया घालमेल पकड़ में आया है।
विज्ञापन



डीएम ने करीब 80 करोड़ से बनाए जा रहे दो हजार आवासों की जांच टेक्निकल ऑडिट कमेटी (टीएसी) से कराने की संस्तुति कर दी है। इससे आवासों का निर्माण करवा रही कांस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) के अधिकारी सकते में हैं।
विज्ञापन



नगर पालिका के अलावा नगर पंचायत लालगंज, बछरावां व डलमऊ में इंट्रीग्रेटेड हाउसिंग एवं स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) से करीब दो हजार गरीबों के लिए आवासों के निर्माण का काम लंबे समय से जारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन



पहले फेज के आवास भी अब तक पूरे नहीं कराए गए हैं। जो आवास पूरे भी हो चुके हैं, वे रहने लायक नहीं हैं। डीएम के निर्देश पर डूडा के परियोजना अधिकारी सुधाकांत मिश्रा व अन्य अधिकारियों की टीम ने शहर के वार्ड संख्या 26 के नयापुरवा में बन रहे गरीबों के आवासों की गुणवत्ता की जांच की थी।


भगवती के आवास में लिंटल लेवल के ऊपर ईंटों से चुनाई का काम चलता मिला था। ईंटें पीली मिलीं थी। उन्हें उठाकर जमीन पर फेंका गया तो टूट गई थीं। टीम ने ईंटों के तीन नमूने सील करके जांच के लिए विधि विश्लेषक प्रयोगशाला भेज दिए थे।


जांच में प्रथम दृष्टया आवासों की गुणवत्ता खराब मिलने पर डीएम संजय कुमार खत्री ने गंभीर रुख अपनाया है। डीएम ने आईएचएसडीपी से नगर पालिका व तीन नगर पंचायतों में बनाए जा रहे गरीबों के आवासों की तकनीकी जांच टीएसी से कराने की संस्तुति कर दी है।


टीएसी जांच के लिए शासन को पत्र भी भेज दिया गया है। जांच की संस्तुति के बाद निर्माण इकाई के इंजीनियरों और अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गई है।


राजीव आवासों में भी जमकर घालमेल
नगर पालिका और नगर पंचायतों में डूडा के माध्यम से पहले फेज में 636 और दूसरे फेज में 785 राजीव आवास बनवाने का काम शुरू किया गया था।


इसमें करीब 35 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था। सीएंडडीएस को निर्माण का काम दिया गया था। शुरू से ही निर्माण इकाई ने काम में मनमानी की।


जांच में मानकों की अनदेखी पकड़ में आई थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई थी। बजट खर्च होने के बाद भी आवास अधूरे होने पर प्रदेश में शहरी आवासों के निर्माण में सुप्रीम कोर्ट के गंभीर होने के बाद अनुसचिव अखिलानंद ने डूडा से पूरी रिपोर्ट तलब की है।



इंट्रीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत शहरी क्षेत्रों में करीब 80 करोड़ की लागत से दो हजार गरीबों के आवासों का काम सीएंडडीएस करवा रहा है। प्रथम दृष्टया जांच में आवासों की गुणवत्ता खराब मिलने पर डीएम ने टीएसी जांच के लिए संस्तुति कर दी है।
-सुधाकांत मिश्रा, परियोजना अधिकारी, डूडा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed