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1600 करोड़ खर्च लेकिन आठ वर्ष बाद भी रेल का पहिया नहीं बना

Mon, 23 Aug 2021 11:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 11:57 PM IST
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1600 crores spent but even after eight years the rail wheel was not made
लालगंज (रायबरेली)। केंद्रीय इस्पात मंत्रालय की नवरत्न कंपनियों में से एक राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) की यहां निर्माणाधीन इकाई फोर्ज्ड व्हील प्लांट (रेल पहिया कारखाना) का शिलान्यास आठ अक्तूबर 2013 को कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने किया था।
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आठ वर्ष बाद भी 1683 करोड़ की लागत से बन रहे इस कारखाने से व्यावसायिक उत्पादन अभी नहीं शुरू हो सका जबकि इसके निर्माण में अब तक 1600 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। कोविड-19 के साथ ही विदेशी तकनीक व विशेषज्ञों पर निर्भरता के चलते इसका निर्माण धीमी गति से हुआ। रेलवे ने छह हजार पहियों का आर्डर भी इस वित्तीय वर्ष के लिए कारखाने को उत्पादन शुरू हो जाने की उम्मीद पर दे दिया है।
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रेल पहिया कारखाने की आधारशिला सोनिया गांधी ने आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना परिसर में ही आठ अक्तूबर 2013 में रखी थी। रेल कोच कारखाने ने अपनी पहले से अधिगृहीत जमीन में से 50 एकड़ जमीन इसके निर्माण के लिए दे दी थी। अंतर्राष्ट्रीय बिडिंग में जर्मनी की एसएमएस कंपनी को निर्माण और उत्पादन का काम दिया गया। पूरी तरह जर्मन तकनीक पर आधारित यह कारखाना काफी दिनों से निर्माण के अंतिम चरण को छूने की कोशिश में लगा हुआ है।
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प्रबंधन का काम देख रहे अफसरों ने कई बार तो इससे रेल पहिए का उत्पादन शुरू होने का पूर्वानुमान भी बता दिया था लेकिन अभी तक उत्पादन शुरू नहीं हो सका। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक रेलवे ने इस वित्त वर्ष के लिए कारखाने को एक हजार लोको व्हील्स और पांच हजार एलएचबी व्हील्स बनाने का आर्डर भी दे दिया है। बताते हैं कि जर्मन विशेषज्ञों पर निर्भरता के चलते कारखाने का निर्माण अपेक्षा के अनुरूप गति से नहीं हो सका।
आधारशिला रखने के लिए आयोजित समारोह में सोनिया गांधी ने इस कंपनी के अधिकारियों से आग्रह किया था कि इसमें रायबरेली के लोगों को भी रोजगार दिया जाए। समारोह में आए आरआईएनएल के आला अधिकारियों ने भी सांसद गांधी के अनुरोध को मानते हुए घोषणा की थी कि कारखाने में रखे जाने वाले ज्यादातर लोग रायबरेली के ही होंगे लेकिन अभी तक यहां तैनात कई अधिकारी व कर्मचारी बाहर के ही हैं।
रेल पहिया कारखाने के निर्माण का प्रबंधन देख रहे जीएम एसके झा ने बताया कि कोविड-19 के सेकेंड फेज के चलते सारे जर्मन विशेषज्ञ लौट गए थे। इसलिए कारखाने के पूरा होने में थोड़ा अधिक समय लग गया। अब कारखाना बनकर पूरी तरह से तैयार है। जर्मनी के तीन इंजीनियर वापस आ गए हैं। कुछ कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद आ जाएंगे।

अभी तक ट्रायल के तौर पर 75 पहिए बनाए जा चुके हैं जिनकी गुणवत्ता का परीक्षण चल रहा है। परीक्षण पूरा होने के बाद रेलवे की ओर से इसके परीक्षण के लिए आरडीएसओ के विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा। उनकी क्लीयरेंस मिलने के बाद कामर्शियल उत्पादन शुरू हो सकेगा। रेलवे से अब तक एक हजार लोको व्हील्स और पांच हजार एलएचबी व्हील्स का आर्डर मिल गया है।
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