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सई का जलस्तर बढ़ा, तरकोल गांव पानी से घिरा
Updated Mon, 10 Sep 2018 12:05 AM IST
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डीह (रायबरेली)। सलोन का तरकोल गांव एक बार फिर सई नदी काजलस्तर बढ़ने से पानी से घिर गया है। ग्रामीणों का घरों से निकलना बंद हो गया।
जलस्तर बढ़ने से तहसील प्रशासन ने गांव पहुंचकर आने-जाने के लिए नाव लगवाई, तब जाकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ गया तो घरों तक पानी पहुंच जाएगा। गांव में जलभराव होने के कारण स्कूल भी बंद हैं। शिक्षक गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे पढ़ाई ठप है।
तरकोल मजरे बघौला गांव के पास से निकली सई नदी में एक बार फि र उफान आ गया। जलस्तर इतना बढ़ गया है कि पानी गांव के चारों तरफ भर गया।
तरकोल गांव के पास से होकर सई नदी निकली है। जलस्तर बढ़ाने पर गांव टापू बन जाता है। शुक्रवार रात अचानक जलस्तर बढ़ने लगा। सुबह से पानी बढ़ ही रहा है।
पानी गांव के करीब तक पहुंच गया। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। इसकी जानकारी होने पर सलोन तहसीलदार रामकुमार शुक्ला गांव पहुंचे।
सुरक्षित आवागमन के लिए नाव लगवा दी है। ग्राम प्रधान हरिमोहन ने बताया कि ग्रामीणों को आने-जाने के लिए नाव लगा दी गई है।
नाविकों को नहीं मिला मेहनताना, आक्रोश
डीह। सलोन तहसील क्षेत्र में पिछले माह अगस्त में सई नदी में उफान आने पर नाव लगाकर लोगों को सुरक्षित लाने और ले जाने के लिए लगाए गए नाविकों को मजदूरी नहीं मिली है।
इससे नाविकों में आक्रोश है। तरकोल गांव के पास से सई नदी निकली है। एक अगस्त को जलस्तर बढ़ने से गांव में बाढ़ आ गई थी। इससे दो नावें लगाई गईं थीं।
नावों को चलाने के लिए तरकोल गांव के दयालाल, रामलाल, दिनेश, राकेश, हरिकेश, अशोक, दीपक को लगाया गया था। एक से 23 अगस्त तक दिन-रात नाव चला कर लोगों को सुरक्षित लाने ले जाने में मदद की।
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इतनी मेहनत के बाद भी आज तक नाविकों को मजदूरी नहीं दी गई, जिससें नाविकों में आक्रोश है। इसी तरह कचनावां गांव में भी पूरे गोड़ियन, पूरे पासिन गांव में दो नाव लगाई। नाविकों व नाव की मजदूरी नहीं दी गयी। ग्राम प्रधान मेवालाल ने बताया की मजदूरी न मिलने से नाविकों में नाराजगी जताई है।
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जलस्तर बढ़ने से तहसील प्रशासन ने गांव पहुंचकर आने-जाने के लिए नाव लगवाई, तब जाकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ गया तो घरों तक पानी पहुंच जाएगा। गांव में जलभराव होने के कारण स्कूल भी बंद हैं। शिक्षक गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे पढ़ाई ठप है।
तरकोल मजरे बघौला गांव के पास से निकली सई नदी में एक बार फि र उफान आ गया। जलस्तर इतना बढ़ गया है कि पानी गांव के चारों तरफ भर गया।
तरकोल गांव के पास से होकर सई नदी निकली है। जलस्तर बढ़ाने पर गांव टापू बन जाता है। शुक्रवार रात अचानक जलस्तर बढ़ने लगा। सुबह से पानी बढ़ ही रहा है।
पानी गांव के करीब तक पहुंच गया। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। इसकी जानकारी होने पर सलोन तहसीलदार रामकुमार शुक्ला गांव पहुंचे।
सुरक्षित आवागमन के लिए नाव लगवा दी है। ग्राम प्रधान हरिमोहन ने बताया कि ग्रामीणों को आने-जाने के लिए नाव लगा दी गई है।
नाविकों को नहीं मिला मेहनताना, आक्रोश
डीह। सलोन तहसील क्षेत्र में पिछले माह अगस्त में सई नदी में उफान आने पर नाव लगाकर लोगों को सुरक्षित लाने और ले जाने के लिए लगाए गए नाविकों को मजदूरी नहीं मिली है।
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इससे नाविकों में आक्रोश है। तरकोल गांव के पास से सई नदी निकली है। एक अगस्त को जलस्तर बढ़ने से गांव में बाढ़ आ गई थी। इससे दो नावें लगाई गईं थीं।
नावों को चलाने के लिए तरकोल गांव के दयालाल, रामलाल, दिनेश, राकेश, हरिकेश, अशोक, दीपक को लगाया गया था। एक से 23 अगस्त तक दिन-रात नाव चला कर लोगों को सुरक्षित लाने ले जाने में मदद की।
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इतनी मेहनत के बाद भी आज तक नाविकों को मजदूरी नहीं दी गई, जिससें नाविकों में आक्रोश है। इसी तरह कचनावां गांव में भी पूरे गोड़ियन, पूरे पासिन गांव में दो नाव लगाई। नाविकों व नाव की मजदूरी नहीं दी गयी। ग्राम प्रधान मेवालाल ने बताया की मजदूरी न मिलने से नाविकों में नाराजगी जताई है।