{"_id":"5b4a42a14f1c1b41748b4b60","slug":"151531593377-raebareli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पतालों में नजराने के चक्कर में तीन नवजातों ने तोड़ा दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पतालों में नजराने के चक्कर में तीन नवजातों ने तोड़ा दम
Updated Sun, 15 Jul 2018 12:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। सरकारी अस्पतालों में मनमानी की सारी हदें पार हो चुकी हैं। प्रसव के बाद नजराने के चक्कर में नवजातों को जिला अस्पताल रेफर करने में देरी हो गई, जिसके कारण शनिवार को तीन नवजातों ने दम तोड़ दिया।
नवजातों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मृत हालत में लाया गया। सरेनी के एक मामले में परिजनों ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
मामले संज्ञान में आने के बाद प्रभारी सीएमओ डॉ. एसके चक ने एसीएमओ डॉ. कृष्णा सोनकर की अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर दी है।
सरेनी क्षेत्र के सुर्जीपुर गांव निवासी रूबी को गत शुक्रवार को प्रसव के लिए सीएचसी सरेनी में भर्ती कराया गया था। बताते हैं कि रात में सामान्य प्रसव हुआ था।
प्रसव के कुछ देर बाद नवजात की हालत बिगड़ने लगी। आरोप है कि सीएचसी के स्टाफ ने नजराने के चक्कर में नवजात को जिला अस्पताल भेजने में देरी कर दी।
इसी कारण नवजात को शनिवार की सुबह जिला अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सक ने नवजात को मृत घोषित कर दिया।
पीड़ित अनूप कुमार का आरोप है कि समय से रेफर कर दिया गया होता तो नवजात की मौत न होती। उसने जांच कराने की मांग की।
हरचंदपुर क्षेत्र के ककरोहा निवासी पूनम ने शुक्रवार की रात नवजात को जन्म दिया। यहां भी अस्पताल में लापरवाही के कारण जिला अस्पताल लाते-लाते नवजात की मौत हो गई।
विज्ञापन
ऊंचाहार क्षेत्र के किसुनदापुर निवासी रुचि देवी के नवजात को भी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मृत घोषित कर दिया गया। मामले संज्ञान में आने के बाद एसीएमओ डॉ. कृष्णा सोनकर की अध्यक्षता में जांच के लिए टीम गठित कर दी है।
जांच के लिए टीम गठित
नवजातों की मौत के तीन मामले प्रकाश में आए हैं। तीनों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मृत हालत में लाया गया था। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एसके चक, प्रभारी सीएमओ
विज्ञापन
नवजातों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मृत हालत में लाया गया। सरेनी के एक मामले में परिजनों ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
मामले संज्ञान में आने के बाद प्रभारी सीएमओ डॉ. एसके चक ने एसीएमओ डॉ. कृष्णा सोनकर की अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर दी है।
सरेनी क्षेत्र के सुर्जीपुर गांव निवासी रूबी को गत शुक्रवार को प्रसव के लिए सीएचसी सरेनी में भर्ती कराया गया था। बताते हैं कि रात में सामान्य प्रसव हुआ था।
विज्ञापन
प्रसव के कुछ देर बाद नवजात की हालत बिगड़ने लगी। आरोप है कि सीएचसी के स्टाफ ने नजराने के चक्कर में नवजात को जिला अस्पताल भेजने में देरी कर दी।
इसी कारण नवजात को शनिवार की सुबह जिला अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सक ने नवजात को मृत घोषित कर दिया।
पीड़ित अनूप कुमार का आरोप है कि समय से रेफर कर दिया गया होता तो नवजात की मौत न होती। उसने जांच कराने की मांग की।
हरचंदपुर क्षेत्र के ककरोहा निवासी पूनम ने शुक्रवार की रात नवजात को जन्म दिया। यहां भी अस्पताल में लापरवाही के कारण जिला अस्पताल लाते-लाते नवजात की मौत हो गई।
विज्ञापन
ऊंचाहार क्षेत्र के किसुनदापुर निवासी रुचि देवी के नवजात को भी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मृत घोषित कर दिया गया। मामले संज्ञान में आने के बाद एसीएमओ डॉ. कृष्णा सोनकर की अध्यक्षता में जांच के लिए टीम गठित कर दी है।
जांच के लिए टीम गठित
नवजातों की मौत के तीन मामले प्रकाश में आए हैं। तीनों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मृत हालत में लाया गया था। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एसके चक, प्रभारी सीएमओ