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15,620 लाडले दुबले व छोटे कद के, 3138 बहुत कमजोर
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रायबरेली। जिले में लाडले कुपोषण से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। पिछले महीने पोषण माह के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर 2,45,930 बच्चों की सेहत जांची गई, जिसमें 2,27,172 बच्चे स्वस्थ मिले।
15,620 लाडले दुबले, बौने और 3158 बच्चे अति कमजोर पाए गए। अति तीव्र कुपोषित (सैम) और मध्यम कुपोषित (मैम) मिले बच्चों को सुपोषित करने की कवायद शुरू की गई है।
शासन की ओर से लंबे समय से बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। हालांकि पूर्व में कुपोषित बच्चों की संख्या एक लाख से अधिक हुआ करती थी, लेकिन अब भी संख्या कम जरूर हुई है, लेकिन बच्चे कुपोषण से मुक्त नहीं हुए हैं।
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जिले में पोषण माह के दौरान शून्य से पांच वर्ष तक बच्चों की जांच में 15,620 बच्चे मैम (मध्यम कुपोषित) मिले। ये बच्चे दुबले और 3138 बच्चे सैम (अति तीव्र कुपोषित) पाए गए। जिले में बच्चों को कुपोषण से मुक्त करके उन्हें सुपोषित करने का काम शुरू कर दिया गया है।
जिले में सैम और मैम बच्चों की स्थिति
ब्लॉक मैम बच्चे सैम बच्चे
सरेनी 876 149
ऊंचाहार 1,587 215
हरचंदपुर 563 227
सतांव 410 120
खीरों 999 167
डलमऊ 615 40
जगतपुर 594 137
राही 793 171
बछरावां 784 179
महराजगंज 861 184
लालगंज 475 101
शिवगढ़ 1,277 222
अमावां 1,747 277
रोहनियां 369 130
गौरा 543 112
शहर 754 130
सलोन 631 219
डीह 1,120 188
छतोह 622 170
कुल 15,620 3138
ऐसे सुपोषित किए जा रहे कुपोषित लाडले
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को हर महीने ड्राई राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। हर 15 दिन पर कार्यकर्ता घरों में पहुंचकर बच्चों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। गंभीर बच्चों को कुपोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराकर उनका इलाज भी कराया जाता है।
माह के प्रथम बुधवार पर कुपोषित बच्चों को अस्पताल में बुलाकर उनकी सेहत की जांच के साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों को सेहतमंद बनाने के जिए जागरूक किया जाता है।
इंफैंटोमीटर मिले तो नपे दो साल से कम के बच्चों की लंबाई
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो साल से कम उम्र के बच्चों की लंबाई की नाप नहीं हो पा रही है। निदेशालय स्तर पर इन्फैंटोमीटर (ऊंचाई मापने का स्केल) परचेज करने की प्रक्रिया पिछले दो साल से चल रही है, लेकिन अब तक जिले को इन्फैंटोमीटर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसी स्थिति में दो साल से कम उम्र के बच्चों की लंबाई के हिसाब से स्वास्थ्य की जांच नहीं हो पा रही है।
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15,620 लाडले दुबले, बौने और 3158 बच्चे अति कमजोर पाए गए। अति तीव्र कुपोषित (सैम) और मध्यम कुपोषित (मैम) मिले बच्चों को सुपोषित करने की कवायद शुरू की गई है।
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शासन की ओर से लंबे समय से बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। हालांकि पूर्व में कुपोषित बच्चों की संख्या एक लाख से अधिक हुआ करती थी, लेकिन अब भी संख्या कम जरूर हुई है, लेकिन बच्चे कुपोषण से मुक्त नहीं हुए हैं।
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जिले में पोषण माह के दौरान शून्य से पांच वर्ष तक बच्चों की जांच में 15,620 बच्चे मैम (मध्यम कुपोषित) मिले। ये बच्चे दुबले और 3138 बच्चे सैम (अति तीव्र कुपोषित) पाए गए। जिले में बच्चों को कुपोषण से मुक्त करके उन्हें सुपोषित करने का काम शुरू कर दिया गया है।
जिले में सैम और मैम बच्चों की स्थिति
ब्लॉक मैम बच्चे सैम बच्चे
सरेनी 876 149
ऊंचाहार 1,587 215
हरचंदपुर 563 227
सतांव 410 120
खीरों 999 167
डलमऊ 615 40
जगतपुर 594 137
राही 793 171
बछरावां 784 179
महराजगंज 861 184
लालगंज 475 101
शिवगढ़ 1,277 222
अमावां 1,747 277
रोहनियां 369 130
गौरा 543 112
शहर 754 130
सलोन 631 219
डीह 1,120 188
छतोह 622 170
कुल 15,620 3138
ऐसे सुपोषित किए जा रहे कुपोषित लाडले
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को हर महीने ड्राई राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। हर 15 दिन पर कार्यकर्ता घरों में पहुंचकर बच्चों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। गंभीर बच्चों को कुपोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराकर उनका इलाज भी कराया जाता है।
माह के प्रथम बुधवार पर कुपोषित बच्चों को अस्पताल में बुलाकर उनकी सेहत की जांच के साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों को सेहतमंद बनाने के जिए जागरूक किया जाता है।
इंफैंटोमीटर मिले तो नपे दो साल से कम के बच्चों की लंबाई
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो साल से कम उम्र के बच्चों की लंबाई की नाप नहीं हो पा रही है। निदेशालय स्तर पर इन्फैंटोमीटर (ऊंचाई मापने का स्केल) परचेज करने की प्रक्रिया पिछले दो साल से चल रही है, लेकिन अब तक जिले को इन्फैंटोमीटर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसी स्थिति में दो साल से कम उम्र के बच्चों की लंबाई के हिसाब से स्वास्थ्य की जांच नहीं हो पा रही है।