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ओवरब्रिज बनाने में मनमानी और कमीशनबाजी का खूब हुआ खेल
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रायबरेली। शहर के मामा चौराहे स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर 35 करोड़ रुपये से ओवरब्रिज में मनमानी और कमीशनबाजी के खेल में आम जनता पीस रही है।
इस पुल से भारी वाहन नहीं गुजर पा रहे हैं। खास बात ये है कि पुल के निर्माण के दौरान एनएचएआई ने सेतु निगम को ओवरब्रिज को घुमावदार करने का सुझाव दिया था, लेकिन उस सुझाव तक को ठेंगा दिखा दिया गया।
अब जब यह पुल गले की फांस बन गया है तो सेतु निगम के अफसर दावा कर रहे हैं कि मुख्यालय से बनाए गए ड्राइंग के हिसाब से ओवरब्रिज बनाया गया है।
इस लापरवाही की वजह से इस पुल को बनाने का जो मकसद था, वह पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। वहीं आम जनता के हिस्से की कमाई से तैयार यह पुल लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। जिला प्रशासन भी इस पर आंखें बंद किए हुए था।
इसी माह की 16 दिसंबर को मॉडर्न रेल कोच फैक्टरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुल का लोकार्पण किया था। शहर में बने इस नए ओवरब्रिज का शुभारंभ तो कर दिया गया, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया कि जिस उद्देश्य से ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया, वह सफल होगा या नहीं।
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ओवरब्रिज के निर्माण में आम जनता की गाढ़ी कमाई से 35 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। पर सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर सेतु निगम की ओर से बनाए गए इस पुल से एक साथ दो भारी वाहन नहीं निकल पा रहे हैं।
इससे भारी वाहनों के संचालन को शुरू कराने के बाद बंद कर दिया गया है। शहर में जाम की स्थिति जस की तस है। जिस मकसद को लेकर पुल बनवाया गया था वह पूरा नहीं हो रहा और लोगों को जाम की समस्या से निजात नहीं मिल रही है।
पुलिस विभाग ने इस पुल से भारी वाहनों के संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं। ‘अमर उजाला’ की ओर से लापरवाही की पोल खुलने पर जिम्मेदार विभागों के अफसरों में हड़कंप मच गया है।
एनएचएआई का दावा है कि जिस समय पुल का निर्माण हो रहा था, उस समय सेतु निगम को सुझाव दिया था कि इस पुल को लखनऊ में बने पुलों की तर्ज पर घुमावदार बनाया जाए। पर इसे अमल में नहीं लाया गया।
कहा जा रहा है कि मनमानी के साथ ही कमीशनबाजी के खेल में 35 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया यह पुल शहर के ढाई लाख लोगों के लिए नकारा साबित हो रहा है।
मामा चौराहा पर बनाए गए ओवरब्रिज लखनऊ-प्रयागराज हाईवे को जोड़ता है। निर्माण के दौरान एनएचएआई की ओर से प्रापर घुमाव का सुझाव दिया गया था, लेकिन घुमाव ज्यादा न देकर सीधे हाईवे से जोड़ दिया गया है।
अब्दुल बासिद, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई
लखनऊ मुख्यालय से मिले ड्राइंग से हुआ निर्माण
इंजीनियरों की ओर से सर्वे करने और लखनऊ मुख्यालय से मिले ड्राइंग के बाद ही ओवरब्रिज बनाने का कार्य शुरू कराया गया था। एनएचएआई के किसी तरह सुझाव की जानकारी नहीं है। जब पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तब उनकी तैनाती यहां नहीं थी।
डीआर सिंह, परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
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इस पुल से भारी वाहन नहीं गुजर पा रहे हैं। खास बात ये है कि पुल के निर्माण के दौरान एनएचएआई ने सेतु निगम को ओवरब्रिज को घुमावदार करने का सुझाव दिया था, लेकिन उस सुझाव तक को ठेंगा दिखा दिया गया।
अब जब यह पुल गले की फांस बन गया है तो सेतु निगम के अफसर दावा कर रहे हैं कि मुख्यालय से बनाए गए ड्राइंग के हिसाब से ओवरब्रिज बनाया गया है।
इस लापरवाही की वजह से इस पुल को बनाने का जो मकसद था, वह पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। वहीं आम जनता के हिस्से की कमाई से तैयार यह पुल लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। जिला प्रशासन भी इस पर आंखें बंद किए हुए था।
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इसी माह की 16 दिसंबर को मॉडर्न रेल कोच फैक्टरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुल का लोकार्पण किया था। शहर में बने इस नए ओवरब्रिज का शुभारंभ तो कर दिया गया, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया कि जिस उद्देश्य से ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया, वह सफल होगा या नहीं।
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ओवरब्रिज के निर्माण में आम जनता की गाढ़ी कमाई से 35 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। पर सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर सेतु निगम की ओर से बनाए गए इस पुल से एक साथ दो भारी वाहन नहीं निकल पा रहे हैं।
इससे भारी वाहनों के संचालन को शुरू कराने के बाद बंद कर दिया गया है। शहर में जाम की स्थिति जस की तस है। जिस मकसद को लेकर पुल बनवाया गया था वह पूरा नहीं हो रहा और लोगों को जाम की समस्या से निजात नहीं मिल रही है।
पुलिस विभाग ने इस पुल से भारी वाहनों के संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं। ‘अमर उजाला’ की ओर से लापरवाही की पोल खुलने पर जिम्मेदार विभागों के अफसरों में हड़कंप मच गया है।
एनएचएआई का दावा है कि जिस समय पुल का निर्माण हो रहा था, उस समय सेतु निगम को सुझाव दिया था कि इस पुल को लखनऊ में बने पुलों की तर्ज पर घुमावदार बनाया जाए। पर इसे अमल में नहीं लाया गया।
कहा जा रहा है कि मनमानी के साथ ही कमीशनबाजी के खेल में 35 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया यह पुल शहर के ढाई लाख लोगों के लिए नकारा साबित हो रहा है।
मामा चौराहा पर बनाए गए ओवरब्रिज लखनऊ-प्रयागराज हाईवे को जोड़ता है। निर्माण के दौरान एनएचएआई की ओर से प्रापर घुमाव का सुझाव दिया गया था, लेकिन घुमाव ज्यादा न देकर सीधे हाईवे से जोड़ दिया गया है।
अब्दुल बासिद, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई
लखनऊ मुख्यालय से मिले ड्राइंग से हुआ निर्माण
इंजीनियरों की ओर से सर्वे करने और लखनऊ मुख्यालय से मिले ड्राइंग के बाद ही ओवरब्रिज बनाने का कार्य शुरू कराया गया था। एनएचएआई के किसी तरह सुझाव की जानकारी नहीं है। जब पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तब उनकी तैनाती यहां नहीं थी।
डीआर सिंह, परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम