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मनमानी से बाज नहीं आ रही बिलिंग एजेंसियां
Updated Wed, 14 Mar 2018 12:00 AM IST
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मनमानी से बाज नहीं आ रहीं बिलिंग एजेंसियां
रायबरेली। पावर कॉर्पोरेशन में बिलिंग एजेंसियों की मनमानी के चलते उपभोक्ताओं को सही बिजली बिल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उपभोक्ता चाहकर भी बिजली का बिल नहीं जमा कर रहे हैं।
बिल ठीक कराने के लिए उपभोक्ताओं को पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। सबसे खराब हालत विद्युत वितरण खंड द्वितीय और तृतीय की है। कर्मचारी घर बैठकर ही बिल निकाल रहे हैं। वहीं विभागीय अभियंता कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीण अंचलों में घर-घर जाकर बिजली बिल निकालने की कवायद पर पानी फिरता दिख रहा है। राजस्व बढ़ाने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने जिस एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी है। उसके कर्मचारी अपने जेबें भरने में लगे हैं।
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इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। मुराईबाग कस्बा निवासी रामअचल ने बताया कि उन्होंने जनवरी में बिजली का बिल जमा किया।
मार्च का बिल 30 हजार भेज दिया गया। इसी तरह ऊंचाहार के दौलतपुर गांव निवासी शिवशंकर ने बताया कि उनके यहां तीन किलोवाट कामर्शियल कनेक्शन है।
फरवरी में 32 हजार रुपये बिजली का बिल जमा किया था। मार्च में 40 हजार रुपये का बिल भेज दिया गया। ऐसे ही कई उपभोक्ता जो बिजली का बिल सुधरवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। विभागीय कर्मचारी भी बिल ठीक करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को कई-कई दिन तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
....
मनमानी की पुष्टि होने पर होगी कार्रवाई
मीटर रीडरों की मनमानी की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके पहले भी कई रीडरों को हटाया जा चुका है। यदि उपभोक्ताओं के बिल में त्रुटि है तो वह डिवीजनों में एक्सईएन से शिकायत करके बिल को शुद्ध करा सकते हैं। किसी उपभोक्ताओं को बेवजह परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
पंकज श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन
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रायबरेली। पावर कॉर्पोरेशन में बिलिंग एजेंसियों की मनमानी के चलते उपभोक्ताओं को सही बिजली बिल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उपभोक्ता चाहकर भी बिजली का बिल नहीं जमा कर रहे हैं।
बिल ठीक कराने के लिए उपभोक्ताओं को पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। सबसे खराब हालत विद्युत वितरण खंड द्वितीय और तृतीय की है। कर्मचारी घर बैठकर ही बिल निकाल रहे हैं। वहीं विभागीय अभियंता कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
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ग्रामीण अंचलों में घर-घर जाकर बिजली बिल निकालने की कवायद पर पानी फिरता दिख रहा है। राजस्व बढ़ाने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने जिस एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी है। उसके कर्मचारी अपने जेबें भरने में लगे हैं।
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इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। मुराईबाग कस्बा निवासी रामअचल ने बताया कि उन्होंने जनवरी में बिजली का बिल जमा किया।
मार्च का बिल 30 हजार भेज दिया गया। इसी तरह ऊंचाहार के दौलतपुर गांव निवासी शिवशंकर ने बताया कि उनके यहां तीन किलोवाट कामर्शियल कनेक्शन है।
फरवरी में 32 हजार रुपये बिजली का बिल जमा किया था। मार्च में 40 हजार रुपये का बिल भेज दिया गया। ऐसे ही कई उपभोक्ता जो बिजली का बिल सुधरवाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। विभागीय कर्मचारी भी बिल ठीक करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को कई-कई दिन तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
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मनमानी की पुष्टि होने पर होगी कार्रवाई
मीटर रीडरों की मनमानी की पुष्टि होने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके पहले भी कई रीडरों को हटाया जा चुका है। यदि उपभोक्ताओं के बिल में त्रुटि है तो वह डिवीजनों में एक्सईएन से शिकायत करके बिल को शुद्ध करा सकते हैं। किसी उपभोक्ताओं को बेवजह परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
पंकज श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन