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एनटीपीसी हादसे की जांच
Updated Thu, 07 Dec 2017 01:18 AM IST
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एनटीपीसी हादसे की जांच, मानवाधिकार आयोग ने मजदूरों के दर्ज किए बयान
रायबरेली। एनटीपीसी ऊंचाहार में हुए हादसे की जांच करने आई मानवाधिकार आयोग की टीम ने दूसरे दिन बुधवार को परियोजना के आसपास के गांवों की खाक छानी। हादसे में घायल हुए मजदूरों से मुलाकात की। उनका हालचाल जाना और हादसे के बारे में गहन पूछताछ की। खासतौर से यह जानने की कोशिश की कि घटना के समय सुरक्षा के क्या इंतजाम थे। कितनी मदद कब और कैसे मिली। यह टीम अभी यहां रुक कर जांच कर रही है।
गौरतलब है कि 01 नवंबर को एनटीपीसी में हुए दर्दनाक हादसे की जांच के लिए राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग की दो टीमें परियोजना में डेरा डाले हुए हैं। टीमों ने मंगलवार को हादसे वाली यूनिट की छानबीन की थी। अधिकारियों से हादसे का शिकार हुए लोगों के इलाज की व्यवस्था व किए गए सहयोग के बारे में पूछताछ की थी। दूसरे दिन बुधवार को टीम ने परियोजना कैंपस से बाहर निकलकर आसपास के गांवों का दौरा किया। इसके बाद हादसे में घायल हुए मजदूरों से मुलाकात की। टीम सबसे पहले हादसे में घायल बहेरवा गांव के मो. यूसुफ से मिली और उनसे हादसे की जानकारी ली। इसके बाद टीम खिरोधरपुर गांव के घायल रूपचंद व अरविंद, बसुवई गांव के अनिल कुमार, तरैया मजरे रोहनिया गांव के हंसराज, सरेनी क्षेत्र के राजेश कुमार से मुलाकात की।
टीम के सदस्यों ने घायलों से हादसे के वक्त सुरक्षा के इंतजाम, घटना के बाद एनटीपीसी ने इलाज की व्यवस्था और परियोजना और सरकार से मिली अनुग्रह राशि से संतुष्ट है कि नहीं आदि बिंदुओं पर पूछताछ की। टीम ने घायलों के बयान दर्ज करने के बाद हस्ताक्षर भी कराए। परियोजना के जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम घायलों से मिली है और उनसे हादसे की बाबत जानकारी ली है। आयोग की टीम अभी जांच के लिए यहीं रुकी है।
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पूछताछ में भावुक हो गए मजदूर, छलके आंसू
हादसे के एक महीना बाद जब मानवाधिकार आयोग की टीम घायलों का हालचाल लेने पहुंची तो मजदूर भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू छलक पड़े। घायल अरविंद ने टीम को बताया कि एनटीपीसी के अधिकारियों की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। खतरे का संकेत होने के बाद भी यूनिट बंद नहीं की गई। रूपचंद ने बताया कि काम करते समय अचानक भूकंप की तरह झटका लगा, सामने राख का गुबार था, ऊपर से आग बरस रही थी, भगवान ने किसी तरह बचा लिया। राजेश ने बताया कि हादसे के वक्त वह वायरिंग कर रहा था, अचानक धमाका हुआ और अफरातफरी मच गई। बसुवई के अनिल कुमार ने हादसे का ठीकरा परियोजना अधिकारियों पर फोड़ा। वह घायलों को मिलने वाली मदद से संतुष्ट नहीं दिखा। उसका कहना है कि मदद और मिलनी चाहिए।
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रायबरेली। एनटीपीसी ऊंचाहार में हुए हादसे की जांच करने आई मानवाधिकार आयोग की टीम ने दूसरे दिन बुधवार को परियोजना के आसपास के गांवों की खाक छानी। हादसे में घायल हुए मजदूरों से मुलाकात की। उनका हालचाल जाना और हादसे के बारे में गहन पूछताछ की। खासतौर से यह जानने की कोशिश की कि घटना के समय सुरक्षा के क्या इंतजाम थे। कितनी मदद कब और कैसे मिली। यह टीम अभी यहां रुक कर जांच कर रही है।
गौरतलब है कि 01 नवंबर को एनटीपीसी में हुए दर्दनाक हादसे की जांच के लिए राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग की दो टीमें परियोजना में डेरा डाले हुए हैं। टीमों ने मंगलवार को हादसे वाली यूनिट की छानबीन की थी। अधिकारियों से हादसे का शिकार हुए लोगों के इलाज की व्यवस्था व किए गए सहयोग के बारे में पूछताछ की थी। दूसरे दिन बुधवार को टीम ने परियोजना कैंपस से बाहर निकलकर आसपास के गांवों का दौरा किया। इसके बाद हादसे में घायल हुए मजदूरों से मुलाकात की। टीम सबसे पहले हादसे में घायल बहेरवा गांव के मो. यूसुफ से मिली और उनसे हादसे की जानकारी ली। इसके बाद टीम खिरोधरपुर गांव के घायल रूपचंद व अरविंद, बसुवई गांव के अनिल कुमार, तरैया मजरे रोहनिया गांव के हंसराज, सरेनी क्षेत्र के राजेश कुमार से मुलाकात की।
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टीम के सदस्यों ने घायलों से हादसे के वक्त सुरक्षा के इंतजाम, घटना के बाद एनटीपीसी ने इलाज की व्यवस्था और परियोजना और सरकार से मिली अनुग्रह राशि से संतुष्ट है कि नहीं आदि बिंदुओं पर पूछताछ की। टीम ने घायलों के बयान दर्ज करने के बाद हस्ताक्षर भी कराए। परियोजना के जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम घायलों से मिली है और उनसे हादसे की बाबत जानकारी ली है। आयोग की टीम अभी जांच के लिए यहीं रुकी है।
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पूछताछ में भावुक हो गए मजदूर, छलके आंसू
हादसे के एक महीना बाद जब मानवाधिकार आयोग की टीम घायलों का हालचाल लेने पहुंची तो मजदूर भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू छलक पड़े। घायल अरविंद ने टीम को बताया कि एनटीपीसी के अधिकारियों की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। खतरे का संकेत होने के बाद भी यूनिट बंद नहीं की गई। रूपचंद ने बताया कि काम करते समय अचानक भूकंप की तरह झटका लगा, सामने राख का गुबार था, ऊपर से आग बरस रही थी, भगवान ने किसी तरह बचा लिया। राजेश ने बताया कि हादसे के वक्त वह वायरिंग कर रहा था, अचानक धमाका हुआ और अफरातफरी मच गई। बसुवई के अनिल कुमार ने हादसे का ठीकरा परियोजना अधिकारियों पर फोड़ा। वह घायलों को मिलने वाली मदद से संतुष्ट नहीं दिखा। उसका कहना है कि मदद और मिलनी चाहिए।