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कागजों पर उड़ गई 10 लाख की दवा, नहीं मरे मच्छर
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रायबरेली। जिले को कॉर्पोरेशन से मिली करीब 1500 दवा खर्च हो गई, लेकिन मच्छर नहीं मरे हैं। शहर से लेकर गांव तक करीब 10 लाख की दवा का छिड़काव और फॉगिंग के नाम पर कागजों में ही उड़ गई। इससे डेंगू, मलेरिया व अन्य मच्छरजनित रोगों का खतरा बरकरार है।
मच्छरों को मारने के लिए अब तक स्वास्थ्य विभाग को कॉर्पोरेशन से सीधे 1500 लीटर दवा मिली है। इसमें 900 लीटर दवा गांवों और शेष दवा नगर पालिका व जिले की अन्य नगर पंचायतों को फॉगिंग के लिए दी गई है।
सीएचसी के माध्यम से ब्लॉकों को दी गई दवा का छिड़काव ब्लॉक के माध्यम से ग्राम पंचायतों को करवाना था, लेकिन पंचायतों ने चुनिंदा स्थलों पर दवा का छिड़काव करवाकर खानापूर्ति की। गांवों में अब भी मच्छरों का प्रकोप है। लोग मच्छरजनित रोगों के चपेट में आ रहे हैं।
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नगर पालिका व नगर पंचायतों में भी फॉगिंग के नाम पर कागजी खानापूरी की गई है। चुनिंदा स्थलों पर फागिंग कराकर दवा कागजों पर ही उड़ा दी गई है।
इसी का नतीजा है कि जिले में अब तक जिले डेंगू के 46 केस में करीब 20 केस शहर के हैं। मच्छरजनित रोगों से निपटने के नाम पर सिर्फ खानापूरी की गई है। दवा के छिड़काव फॉगिंग के नाम पर बरती गई लापरवाही के कारण मच्छरों का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है।
...
डेंगू के लक्षण क्या
जिला मलेरिया अधिकारी रितु श्रीवास्तव का कहना है कि आमतौर पर बच्चों में डेंगू के लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते, क्योंकि वे सामान्य बुखार के जैसे ही होते हैं। वे बीमारी की गंभीरता पर भी निर्भर करते हैं। एंडीज मच्छर द्वारा काटे जाने के चार दिनों से लेकर दो सप्ताह के बीच कभी भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। तेज सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मिचली, ग्रंथियों में सूजन, जोड़ों, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द और त्वचा पर लाल चकत्ते होना, गंभीर लक्षणों में मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी होना, सांस आना और शरीर टूटना व बेचैनी आदि है।
कैसे करें बचाव
चूंकि डेंगू उपचार की कोई विशिष्ट प्रक्रिया नहीं है, इसलिए रोकथाम जरूरी है। मच्छरजनित रोगों में बुखार आना सामान्य है। हर कोई मच्छरों से बचने का प्रयास करें। घर में स्वच्छता रखें। कहीं भी पानी जमा न होने दें। बच्चे जब भी घर से बाहर जाएं तो उन्हें पूरी आस्तीन वाली शर्ट और फुल पैंट पहनाकर ही बाहर भेजें। दो दिनों से अधिक समय से लगातार बुखार है तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
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मच्छरों को मारने के लिए अब तक स्वास्थ्य विभाग को कॉर्पोरेशन से सीधे 1500 लीटर दवा मिली है। इसमें 900 लीटर दवा गांवों और शेष दवा नगर पालिका व जिले की अन्य नगर पंचायतों को फॉगिंग के लिए दी गई है।
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सीएचसी के माध्यम से ब्लॉकों को दी गई दवा का छिड़काव ब्लॉक के माध्यम से ग्राम पंचायतों को करवाना था, लेकिन पंचायतों ने चुनिंदा स्थलों पर दवा का छिड़काव करवाकर खानापूर्ति की। गांवों में अब भी मच्छरों का प्रकोप है। लोग मच्छरजनित रोगों के चपेट में आ रहे हैं।
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नगर पालिका व नगर पंचायतों में भी फॉगिंग के नाम पर कागजी खानापूरी की गई है। चुनिंदा स्थलों पर फागिंग कराकर दवा कागजों पर ही उड़ा दी गई है।
इसी का नतीजा है कि जिले में अब तक जिले डेंगू के 46 केस में करीब 20 केस शहर के हैं। मच्छरजनित रोगों से निपटने के नाम पर सिर्फ खानापूरी की गई है। दवा के छिड़काव फॉगिंग के नाम पर बरती गई लापरवाही के कारण मच्छरों का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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डेंगू के लक्षण क्या
जिला मलेरिया अधिकारी रितु श्रीवास्तव का कहना है कि आमतौर पर बच्चों में डेंगू के लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते, क्योंकि वे सामान्य बुखार के जैसे ही होते हैं। वे बीमारी की गंभीरता पर भी निर्भर करते हैं। एंडीज मच्छर द्वारा काटे जाने के चार दिनों से लेकर दो सप्ताह के बीच कभी भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। तेज सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मिचली, ग्रंथियों में सूजन, जोड़ों, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द और त्वचा पर लाल चकत्ते होना, गंभीर लक्षणों में मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी होना, सांस आना और शरीर टूटना व बेचैनी आदि है।
कैसे करें बचाव
चूंकि डेंगू उपचार की कोई विशिष्ट प्रक्रिया नहीं है, इसलिए रोकथाम जरूरी है। मच्छरजनित रोगों में बुखार आना सामान्य है। हर कोई मच्छरों से बचने का प्रयास करें। घर में स्वच्छता रखें। कहीं भी पानी जमा न होने दें। बच्चे जब भी घर से बाहर जाएं तो उन्हें पूरी आस्तीन वाली शर्ट और फुल पैंट पहनाकर ही बाहर भेजें। दो दिनों से अधिक समय से लगातार बुखार है तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।