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सिल्ट सफाई में 10 करोड़ खर्च, लेकिन किसानों की मेहनत पर फिर रहा पानी

Sat, 19 Dec 2020 11:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Dec 2020 11:45 PM IST
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10 crore spent in cleaning the silt, yet the canals are being cut
रायबरेली। भले ही नहरों की सफाई कर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए हों लेकिन अन्नदाताओं की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। खरीफ और फिर रवी सीजन में नहरों में भरपूर पानी पहुंचाने के लिए 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन धरातल पर कहीं सिल्ट सफाई नहीं दिख रही है।
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सिल्ट निकाल कर पटरियों पर डंप कर दी गई। ड्रेसिंग तक कराने की जहमत नहीं उठाई गई। यही वजह है कि पानी छोड़े जाने के साथ ही पटरी पर रखी सिल्ट फिर नहरों में फैल गई। अब पानी छोड़े जाने पर पटरियां कट जा रही हैं और उफनाता पानी गेहूं की फसल डुबो कर बर्बाद कर दे रहा है।
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जिले में करीब 2200 किलोमीटर नहरें हैं। इसमें करीब 1074 किलोमीटर नहरों की सफाई खरीफ की फसल से पहले कराई गई थी। बाकी नहरों की सफाई रवी सीजन में कराई गई। नहरों में हेड से टेल तक पानी पहुंचाने के लिए शासन से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। किसानों को भरपूर पानी तो नहीं मिल रहा है, पटरियों की कटान से गेहूं की फसल जरूर बर्बाद हो रही है। जिले से होकर आठ खंडों की नहरें निकली हैं। सभी खंडों को नहरों के हिसाब से बजट आवंटित कर दिया गया है।
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खरीफ की फसल में छह करोड़ जबकि रवी के सीजन में चार करोड़ रुपये सिल्ट सफाई पर खर्च किए गए। सफाई के साथ-साथ पटरियों की मरम्मत कराई जानी थी लेकिन नहीं कराई गई। जाहिर है कि सिंचाई विभाग की मिलीभगत से ठेकेदारों ने अपनी जेबें भरी होंगी। हालत यह है कि डीह, छतोह, खीरों और सरेनी, लालगंज व सतांव क्षेत्र की नहरों में अब तक पानी ही नहीं पहुंचा है।
इससे किसानों को सिंचाई के संकट जूझना पड़ रहा है। डलमऊ, राही, सलोन, जगतपुर व दीनशाह गौरा ब्लॉक क्षेत्र में पानी आया लेकिन ठीक से सफाई नहीं होने के कारण हर दिन नहरों में कटान होने से फसलें तबाह हो रही हैं।
जिले में 1800 माइनरें हैं लेकिन इनके अंत में जलनिकासी के लिए बने गूल (नाली) पर कब्जा हो गया है। इस वजह से माइनरें उफनाकर कट जाती हैं। ये नालियां नहर से निकलकर किसी तालाब या नाले में मिली रहती हैं।
यदि नहर में पानी ज्यादा आ जाए तो नहर उफनाने के बजाय नालियों से होते हुए पानी तालाब या नाले में चला जाता है लेकिन नालियां पटी होने या फिर उन पर कब्जा होने के चलते नहरें उफनाकर कट जाती हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। इस ओर विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं देते हैं।
सिंचाई विभाग के नोडल अधिकारी हेमंत कुमार वर्मा ने बताया कि सभी नहरों में पानी पहुंचाया जा रहा है। नहरों के गूल पर अतिक्रमण जरूर है जिसे हटवाने के लिए एई और जेई के अलावा राजस्व कर्मियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

जिन नहरों में पानी नहीं पहुंचा है, वहां पानी पहुंचाने के लिए कहा गया है। अगले सप्ताह सभी नहरों में पानी पहुंच जाएगा। कटान रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे।
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