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पीला वस्त्र है गायत्री परिवार की पहचान
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 04 Jan 2015 11:38 PM IST
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जमीन पर बिछी चटाई पर अमृतासन (खिचड़ी) ग्रहण करने के लिए लगी लंबी कतार, यज्ञ स्थल पर नामकरण, अन्नप्रासन, यज्ञोपवीत और गुरुमंत्र लेने के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा करने वाले लोगों की संख्या एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों में होती है। गायत्री परिवार के भक्तों की यह भीड़ दो दिन से शहर के जीआईसी मैदान में देखने को मिल रही है। यहां पर ऊंच-नीच, अमीर-गरीब की कोई खाईं नहीं है बल्कि पीला वस्त्र धारण करने वाला ही गायत्री परिवार का सदस्य है। शहर का जीआईसी मैदान दो दिन से गायत्री मंत्र से गुंजायमान हो उठा है।
शहर और गांव से उमड़ने वाले भक्तों का यह सैलाब सुबह से ही उमड़ना प्रारंभ हो जाता है। रविवार को महिला हो या पुरुष सुबह भगवान भास्कर की किरणों के साथ ही यज्ञ स्थल पर उमड़ने वाले भक्तों के सैलाब में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब की कोई खाईं नहीं है, बल्कि आपसी भ्रातृत्व प्रेम की झलक पीले वस्त्र में दिखाई पड़ती है। यज्ञस्थल पर खाली हाथ आने वाले भक्त झोली भर जाते हैं। यज्ञस्थल पर हवन सामग्री, आम की लकड़ी के साथ ही मिलने वाला प्रसाद गायत्री परिवार की ओर से वितरित किया जा रहा है। सुबह यज्ञस्थल की परिक्रमा और हवन-यज्ञ में शामिल होने के लिए पत्नी और बच्चों के साथ आने वाले भक्त दोपहर में अमृतासन ग्रहण करने के बाद कथा श्रवण करते हैं। बच्चों को अच्छे संस्कार और मां गायत्री की कृपा सदैव बरसने के लिए नामकरण, अन्नप्राशन, यज्ञोपवीत, मुंडन, विद्यारंभ और गुरुमंत्र कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग प्रतिभाग कर रहे हैं।
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शहर और गांव से उमड़ने वाले भक्तों का यह सैलाब सुबह से ही उमड़ना प्रारंभ हो जाता है। रविवार को महिला हो या पुरुष सुबह भगवान भास्कर की किरणों के साथ ही यज्ञ स्थल पर उमड़ने वाले भक्तों के सैलाब में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब की कोई खाईं नहीं है, बल्कि आपसी भ्रातृत्व प्रेम की झलक पीले वस्त्र में दिखाई पड़ती है। यज्ञस्थल पर खाली हाथ आने वाले भक्त झोली भर जाते हैं। यज्ञस्थल पर हवन सामग्री, आम की लकड़ी के साथ ही मिलने वाला प्रसाद गायत्री परिवार की ओर से वितरित किया जा रहा है। सुबह यज्ञस्थल की परिक्रमा और हवन-यज्ञ में शामिल होने के लिए पत्नी और बच्चों के साथ आने वाले भक्त दोपहर में अमृतासन ग्रहण करने के बाद कथा श्रवण करते हैं। बच्चों को अच्छे संस्कार और मां गायत्री की कृपा सदैव बरसने के लिए नामकरण, अन्नप्राशन, यज्ञोपवीत, मुंडन, विद्यारंभ और गुरुमंत्र कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग प्रतिभाग कर रहे हैं।
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