{"_id":"6a95e9e3f0216de50d0b5f21","slug":"when-education-was-offered-in-the-english-medium-even-children-from-convent-schools-enrolled-pratapgarh-news-c-262-1-ptp1005-176657-2026-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pratapgarh News: अंग्रेजी माध्यम में दी शिक्षा तो कॉन्वेंट के बच्चों ने भी लिया दाखिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pratapgarh News: अंग्रेजी माध्यम में दी शिक्षा तो कॉन्वेंट के बच्चों ने भी लिया दाखिला
विज्ञापन
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित डॉ.देवेंद्र सिंह।
सरकारी स्कूल में बेहतर शिक्षा की धारणा को कंपोजिट विद्यालय बरना के प्रधानाध्यापक देवेंद्र ने साकार किया है। देवेंद्र ने अंग्रेजी माध्यम में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया तो कॉन्वेंट स्कूल के 15 बच्चे भी दाखिला लेने पहुंच गए। उनकी मेहनत से बच्चों के साथ ही अभिभावक भी गदगद हैं। अब लखनऊ में शिक्षक दिवस पर देवेंद्र को राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
मूलरूप से गौरा ब्लॉक निवासी डॉ. देवेंद्र प्रताप सिंह प्रयागराज के दारागंज में रहते हैं। वर्ष 2019 में उनकी प्रधानाध्यापक पद पर तैनाती बिहार के कंपोजिट विद्यालय बरना में हुई। तैनाती के बाद उन्होंने विद्यालय में पठन-पाठन की व्यवस्था दुरुस्त की। लोगों के मन में सरकारी विद्यालयों को लेकर बैठी गलतफहमी को दूर किया।
प्रधानाध्यापक पद ग्रहण करने के बाद देवेंद्र ने खंडहर हो चुके विद्यालय की मरम्मत कराई। उत्कृष्ट शिक्षण विधियों के प्रयोग से बच्चों में शिक्षा के रुचि जगाई। इस प्रयास से विद्यालय में नामांकन की संख्या 200 पार हो गई। नवीन विधा का प्रयोग कर अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देना शुरू किया तो आसपास के महंगे कॉन्वेंट विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों ने भी दाखिला ले लिया।
विज्ञापन
नई-नई विधाओं और खेल से पढ़ाई को बनाया मनोरंजक
डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि शिक्षण कार्य में नई-नई विधाओं का प्रयोग किया। बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी। योग-संगीत का माहौल विद्यालय में तैयार किया। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) विधा और कंप्यूटर प्रशिक्षण का कार्य भी विद्यालय शुरू कराया।
विज्ञान एवं तकनीकी की शिक्षा को बढ़ावा दिया। उसी का परिणाम है कि उनका राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयन हुआ। शिक्षक की सफलता पर शिक्षक संघ बिहार ब्लॉक के अध्यक्ष सुशील शुक्ला, राजीव सिंह, मानवेंद्र दुबे, डॉ. विनोद त्रिपाठी, बालेंद्र शुक्ला व बीएसए देवब्रत सिंह ने बधाई दी।
विज्ञापन
मूलरूप से गौरा ब्लॉक निवासी डॉ. देवेंद्र प्रताप सिंह प्रयागराज के दारागंज में रहते हैं। वर्ष 2019 में उनकी प्रधानाध्यापक पद पर तैनाती बिहार के कंपोजिट विद्यालय बरना में हुई। तैनाती के बाद उन्होंने विद्यालय में पठन-पाठन की व्यवस्था दुरुस्त की। लोगों के मन में सरकारी विद्यालयों को लेकर बैठी गलतफहमी को दूर किया।
विज्ञापन
प्रधानाध्यापक पद ग्रहण करने के बाद देवेंद्र ने खंडहर हो चुके विद्यालय की मरम्मत कराई। उत्कृष्ट शिक्षण विधियों के प्रयोग से बच्चों में शिक्षा के रुचि जगाई। इस प्रयास से विद्यालय में नामांकन की संख्या 200 पार हो गई। नवीन विधा का प्रयोग कर अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देना शुरू किया तो आसपास के महंगे कॉन्वेंट विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों ने भी दाखिला ले लिया।
विज्ञापन
नई-नई विधाओं और खेल से पढ़ाई को बनाया मनोरंजक
डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि शिक्षण कार्य में नई-नई विधाओं का प्रयोग किया। बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी। योग-संगीत का माहौल विद्यालय में तैयार किया। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) विधा और कंप्यूटर प्रशिक्षण का कार्य भी विद्यालय शुरू कराया।
विज्ञान एवं तकनीकी की शिक्षा को बढ़ावा दिया। उसी का परिणाम है कि उनका राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयन हुआ। शिक्षक की सफलता पर शिक्षक संघ बिहार ब्लॉक के अध्यक्ष सुशील शुक्ला, राजीव सिंह, मानवेंद्र दुबे, डॉ. विनोद त्रिपाठी, बालेंद्र शुक्ला व बीएसए देवब्रत सिंह ने बधाई दी।