{"_id":"5a4290254f1c1bce408bf5af","slug":"was-seized-14-years-ago","type":"story","status":"publish","title_hn":"14 साल बाद उदयप्रताप की जब्त करोड़ों रुपये की संपत्ति रिलीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
14 साल बाद उदयप्रताप की जब्त करोड़ों रुपये की संपत्ति रिलीज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 26 Dec 2017 11:39 PM IST
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
- फोटो : pratapgarah
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बसपा सरकार में कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनके पिता उदय प्रताप सिंह की गिरफ्तारी के बाद भदरी महल से जब्त करोड़ों रुपये के हीरा, पन्ना, सोना, चांदी से भरे बाक्स को मंगलवार को ट्रेजरी से रिलीज कर दिया गया। तकरीबन 1,07,55,272 रुपये कीमत के आभूषणों से भरे चार बाक्स को उदय प्रताप सिंह की मौजूदगी में वरिष्ठ कोषाधिकारी ने हस्तगत कराया।
कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया और उनके पिता उदय प्रताप सिंह को 25 जनवरी वर्ष 2003 में बसपा कार्यकाल में पोटा के तहत गिरफ्तार किया गया था। तत्कालीन डीएम मो. मुस्तफा और एसपी ए सतीश गणेश की अगुवाई में भदरी महल में हुई छापेमारी में करोड़ों रुपये के आभूषणों से भरे बाक्स जब्त कर कोषागार में रखवा दिए गए। महल में करोड़ों रुपये की अकूत संपत्ति मिलने पर तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मुकदमा प्रारंभ किया गया। 2012 विधानसभा चुनाव में सपा सरकार के सत्ता में आने के बाद राजा भैया और उदय प्रताप सिंह पर से पोटा हटा दिया गया। इसके बाद तत्कालीन डीएम आरएस वर्मा ने मुकदमे का निपटारा करते हुए उदयप्रताप सिंह की जब्त संपत्ति जारी करने का आदेश दिया था, मगर मामला करोड़ों रुपये का होने के कारण वरिष्ठ कोषाधिकारी के आयकर विभाग के संज्ञान में लाने के कारण रिलीज नहीं किया जा सका। वरिष्ठ कोषाधिकारी दीपक बाबू कहा कि आयकर विभाग की हरी झंडी नहीं मिलने के कारण अधिक समय लग गया। आभूषण रिलीज होने के समय एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष डॉ. केएन ओझा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया और उनके पिता उदय प्रताप सिंह को 25 जनवरी वर्ष 2003 में बसपा कार्यकाल में पोटा के तहत गिरफ्तार किया गया था। तत्कालीन डीएम मो. मुस्तफा और एसपी ए सतीश गणेश की अगुवाई में भदरी महल में हुई छापेमारी में करोड़ों रुपये के आभूषणों से भरे बाक्स जब्त कर कोषागार में रखवा दिए गए। महल में करोड़ों रुपये की अकूत संपत्ति मिलने पर तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मुकदमा प्रारंभ किया गया। 2012 विधानसभा चुनाव में सपा सरकार के सत्ता में आने के बाद राजा भैया और उदय प्रताप सिंह पर से पोटा हटा दिया गया। इसके बाद तत्कालीन डीएम आरएस वर्मा ने मुकदमे का निपटारा करते हुए उदयप्रताप सिंह की जब्त संपत्ति जारी करने का आदेश दिया था, मगर मामला करोड़ों रुपये का होने के कारण वरिष्ठ कोषाधिकारी के आयकर विभाग के संज्ञान में लाने के कारण रिलीज नहीं किया जा सका। वरिष्ठ कोषाधिकारी दीपक बाबू कहा कि आयकर विभाग की हरी झंडी नहीं मिलने के कारण अधिक समय लग गया। आभूषण रिलीज होने के समय एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष डॉ. केएन ओझा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन